कोरोना की तीसरी लहर से पहले सामने आया सीरो सर्वे, जानें द‍िल्‍ली के कितने बच्चे हो सकते हैं शिकार?

द‍िल्‍ली में सीवो सर्वे की पांचवीं र‍िपोर्ट आई सामने

द‍िल्‍ली में सीवो सर्वे की पांचवीं र‍िपोर्ट आई सामने

Delhi News: दि‍ल्‍ली में जनवरी में पांचवा सीरो सर्वे क‍िया गया था और इसका सैंपल साइज 28000 से अधिक था. चौथे सीरो सर्वे प‍िछले साल अक्‍टूबर में क‍िया गया था और इसका सैंपल साइज 15162 था. जानें दोनों सीरो सर्वे में क्‍या रही थी र‍िपोर्ट.

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प्रीत‍ि 

दिल्ली और देश में किए गए सीरो सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इस सर्वे के अनुसार, राजधानी दिल्ली में 60% से अधिक बच्चे कोरोना संक्रमित हो सकते हैं. दरअसल तीसरे सिरो सर्वे के बाद राजधानी में वयस्क जनसंख्या से ज्यादा अधिक प्रतिशत में बच्चों के अंदर एंटीबॉडी पाई गई है. इसका अर्थ है कि वह संक्रमित हो चुके हैं भले ही अधिकांश मामले बेहद मामूली रहे हो और गंभीर संक्रमण देखने को कम मिला हो.

जानें क्‍या रहे पांचवें सीरो सर्वे के नतीजे

जनवरी में दिल्ली के अंदर पांचवें दौर की सीरो सर्वे के सैंपल लिए गए थे, जिनका सैंपल साइज 28000 से अधिक था. उसमें दिल्ली की कुल जनसंख्या में आनुपातिक रूप से 56% से अधिक लोगों में एंटीबॉडी यानी संक्रमण पाया गया था‌. इस लिहाज से देश में दूसरी लहर की शुरुआत से पहले ही दिल्ली में 60% से अधिक बच्चे संक्रमण का शिकार हो चुके थे. भले ही आयु के आधार पर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में पांचवी सर्वे की रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की है.
क्‍या कहती है सीरो सर्वे की चौथी र‍िपोर्ट

यह सर्वे प‍िछले साल 15 से 21 अक्टूबर के बीच दिल्ली के सभी वॉर्डों में किया गया था. कुल 15162 सैंपल लिए गए और इनमें से 15015 सैंपल की जांच की गई. इसके मुताबिक, दिल्ली में उस समय 29.1% जनसंख्या संक्रमित हो चुकी थी, लेकिन बच्चों का प्रतिशत वयस्क लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा 34.7% था, जो 5 साल से लेकर 17 साल की आयु वर्ग के बीच रहे.

तीसरी लहर से पहले सीरो सर्वे पर डॉ बीएल शेरवाल क्‍या बोले, जानें



चाचा नेहरू बाल अस्पताल के निर्देशक डॉ बीएल शेरवाल ने कहा क‍ि इस बार राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में तब तक लॉकडाउन नहीं किया गया. जब तक बहुत बड़ी संख्या में पॉजिटिविटी रेट सामने नहीं आई. ऐसी स्थिति में जो जवान माता-पिता हैं जो काम के लिए बाहर निकलते हैं उनके जरिए बड़ी संख्या में बच्चे भी संक्रमित हुए. राजधानी दिल्ली में अधिकांश बच्चे एसिम्टोमैटिक रहे, हालांकि कुछ मामलों में बच्चों को भी अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आई और हमारे संज्ञान में भी है कि दिल्ली में कोरोना के चलते इस लहर में बच्चों की मौत भी हुई है. बच्चों के संक्रमण के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि बच्चों का टीकाकरण शुरू नहीं हुआ है. परिवार के अंदर बच्चों के साथ सोशल डिस्टेंसिंग नहीं रखी जा रही है, जिसकी वजह से भी किसी एक व्यक्ति के परिवार में संक्रमण होने की स्थिति में क्योंकि बच्चे सबके साथ रहते हैं बच्चे संक्रमित हो जाते हैं. अरविंद केजरीवाल के कदम की हम सराहना करते हैं. अगर किसी भी देश में ऐसा म्यूटेशन है जो बच्चों को प्रभावित कर सकता है तो हमें जितना संभव हो उससे बचना चाहिए.

दिल्ली सरकार बच्चों की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए कई तरह के प्रयास कर रहे हैं, जिसमें बच्चों के स्पेशलिस्ट और मेडिकल स्‍टॉफ की ट्रेनिंग, बच्चों के लिए बायपाइप, वेंटिलेटर खरीदने और अलग-अलग तरह की सुविधाएं महत्वपूर्ण है. एक वायरलोजिस्ट के रूप में मुझे लगता है कि हमें जीनोम स्टडी करनी चाहिए और खास उन म्यूटेशन के खिलाफ बच्चों की वैक्सीन का निर्माण करना चाहिए, जिससे बच्चे ज्यादा बड़ी संख्या में संक्रमित और प्रभावित होते हैं. साथ ही एसे ही फरवरी में संपन्न हुए अखिल भारतीय स्तर के सीरो सर्वे में भी यह बताया गया था कि जब देश की कुल जनसंख्या का केवल 21.5% अनुपात में संक्रमित पाया गया. तब भी पूरे भारत में एक चौथाई यानी 25% से अधिक बच्चे संक्रमित हो चुके थे, यानी आम वयस्क जनसंख्या की तुलना में अधिक ,इस सर्वे का सैंपल साइज 35700 से बड़ा था.

जानें सीरो सर्वे पर क्‍या कहना है डॉक्‍टर अजय गंभीर का

दिल्ली मेडिकल काउंसिल के पूर्व सदस्य डॉ अजय गंभीर ने कहा है क‍ि लगातार कोरोना वायरस अपना रूप बदल रहा है और बदलता रहेगा ऐसे में हमें भी चाहे बच्चों के लिए या बड़ों के लिए वैक्सीन को उसी आधार पर बदलना होगा. तभी हम लोगों की जान बचा सकते हैं और संक्रमण पर प्रभावी रूप से अंकुश लगा सकते हैं. खास बात यह है कि जब दिल्ली में देश की दूसरी और दिल्ली की चौथी लहर आने से पहले भी तकरीबन 60% जनसंख्या में एंटीबॉडी पाई गई थी और वह भी तब जब टीकाकरण की शुरुआत नहीं हुई थी. यानी वह नेचुरल आफ्टर इंफेक्शन एंटीबॉडी थी. उसके बावजूद दिल्ली में बड़ी संख्या में मामले आए और मृत्यु हुई ऐसे में अगर दिल्ली के बच्चों में अधिक मात्रा में एंटीबॉडी का संक्रमण है ,उसके बावजूद तीसरी लहर में बच्चे गंभीर संकट में हो सकते हैं.

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