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'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' का दिखने लगा असर, PM मोदी की योजना से देश के Sex Ratio में सुधार

22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से पीएम मोदी ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना की शुरुआत की थी.
22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से पीएम मोदी ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना की शुरुआत की थी.

National Girl Child Day: राष्ट्रीय बालिका दिवस पर आज लड़कियों से संबंधित एक खुशखबरी आई है. मोदी सरकार (Modi Government) के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' (Beti Bachao Beti Padhao) अभियान से भारत के सेक्स अनुपात (Sex Ratio) में जबर्दस्त सुधार हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 24, 2021, 12:29 PM IST
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नई दिल्ली. राष्ट्रीय बालिका दिवस पर आज लड़कियों से संबंधित एक खुशखबरी आई है. मोदी सरकार (Modi Government) के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' (Beti Bachao Beti Padhao) अभियान का अब असर दिखने लगा है. भारत के सेक्स अनुपात (Sex Ratio) में जबर्दस्त सुधार हुआ है. बता दें कि साल 2014-15 में जन्म के समय प्रति एक हजार लड़कों पर 918 लड़कियों का जन्म हो रहा था, वहीं साल 2019-20 में यह आंकड़ा सुधर कर अब 934 तक पहुंच गया है. यह जानकारी शनिवार को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women & Child Development) ने साझा की.

भारत सरकार ने इस शानदार कामयाबी का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' को दी है. इस योजना की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को की गई थी. गौरतलब है कि केंद्रीय महिला एवं विकास मंत्रालय के अध्ययन में निकल कर आया है कि जिन 640 जिलों में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को लागू किया गया, उनमें से 422 जिलों जन्म के समय सेक्स अनुपात में काफी सुधार हुआ है. देश के कई जिले तो ऐसे हैं, जिनमें यह सुधार हैरान करने वाला है. उत्तर प्रदेश के मऊ जिले का ही उदाहरण लें तो यहां यह आंकड़ा 2015 में 694 का था. अब इस जिले के सेक्स अनुपात में अप्रत्याशित सुधार हुआ है और यह आंकड़ा 951 हो गया है. यानी अब मऊ का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर है.

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केंद्रीय महिला एवं विकास मंत्रालय के अध्ययन में यह बात निकल कर आया है.




हरियाणा के आंकड़े भी बदले
इसी तरह हरियाणा के करनाल में 2014-15 में प्रति एक हजार नवजात बालकों पर 758 बालिकाएं का जन्म होता था, जो 2019-20 में सुधर कर 898 हो गया है. हरियाणा के ही महेंद्रगढ़ में यह आंकड़ा 791 से बढ़ कर 919 हो गया और रेवाड़ी में 803 से बढ़ कर 924 हो गया. अगर बात करें पंजाब की पटियाला की तो जन्म के समय सेक्स का अनुपात 847 से सुधर कर 933 हो गया.

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इस योजना के जरिए समाज में लड़कियों के जन्म को लेकर मौजूद पूर्वाग्रहों को तोड़ने का उल्लेखनीय कार्य किया है. (सांकेतिक तस्वीर)


22 जनवरी 2015 को शुरू हुई थी यह योजना
इन आंकड़ों के जरिए कामयाबी की जो कहानी बयां हो रही उससे यह पता चलता है कि 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ योजना की शुरुआत कर के जिस दूरगामी सामाजिक बदलाव की नींव रखी थी, वह एक मौन सामाजिक क्रांति का रूप ले चुकी है.

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इस योजना के तहत व्यापक स्तर पर चलाए गए जन-जागरूकता अभियान से समाज में लड़कियों के जन्म को लेकर कई पूर्वाग्रह टूटे हैं. जागरूकता अभियान के साथ-साथ यह योजना ने सुनिश्चत की है कि कन्या भ्रूण हत्या से संबंधित कानूनों का सही क्रियान्वयन हो और स्कूलों में लड़कियों को शिक्षा के उचित अवसर मिल सके ताकि दूरगामी तौर पर महिला सशक्तिकरण के लक्ष्यों को हासिल कर लैंगिग बराबरी वाले समाज का निर्माण हो सके.
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