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Delhi Police: अब इस खास हथियार से शाहदरा पुलिस करेगी प्रदर्शनकारियों का मुकाबला, जानें पूरा मामला

शाहदरा जिला पुलिस के जवान खास तरह के डंडों के साथ.

शाहदरा जिला पुलिस के जवान खास तरह के डंडों के साथ.

दिल्ली की शाहदरा जिला पुलिस (Shahdara District Police) ने खास तरह के स्टील के डंडे बनवाए हैं, ताकि किसी भी तरह के उपद्रवियों से मुकाबला करके उन्हें रोका जा सके.

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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों (Agricultural Laws) को लेकर पंजाब, हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश समेत कई राज्‍यों के किसान दिल्‍ली बॉर्डर पर जमे हुए हैं. वहीं, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस (Republic Day) के मौके पर दिल्‍ली की सड़कों पर किसान ट्रैक्‍टर रैली के दौरान हुए उपद्रव में दिल्‍ली पुलिस को भी निशाना बनाया गया था. इसमें 150 से ज्‍यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे, जिसमें शाहदरा पुलिस के जवान भी शामिल थे. इस बीच दिल्ली की शाहदरा जिला पुलिस (Shahdara District Police) ने इस बार स्टील के डंडे बनवाए हैं, ताकि किसी भी तरह के उपद्रवियों से मुकाबला करके उन्हें रोका जा सके. यही नहीं, दिल्ली पुलिस ने उग्र प्रदर्शनकारियों से निपटने के किए खास तरह के डंडों में कटीले तार और कीलें भी लगाई गई हैं.

जानकारी के मुताबिक दिल्‍ली की शाहदरा जिला पुलिस को तलवार जैसे दिखने वाले खास तरह के स्टील डंडे देने के साथ एक बाजूबंद भी दिया गया है जिससे पुलिसकर्मी सामने से हमला करने वाले के हमले को रोक भी सकेंगे. हालांकि पुलिस की ओर से इसमें फेरबदल करने की सलाह इसे बनाने वाली कंपनी को दी गई है. इसके बाद इसे इस्‍तेमाल में लिया जा सकेगा.

बहरहाल, दिल्ली पुलिस ने 26 जनवरी को हुए उग्र भीड़ के पुलिस पर हमले में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिसमें ईस्ट दिल्ली, द्वारका और पश्चिमी दिल्ली में 3-3 एफआईआर, 2 आउटर नार्थ, एक शाहदरा और एक नार्थ जिले में दर्ज हुई हैं. दिल्ली के 6 जिलों में दर्ज की गई इन एफआईआर में बलवा, सरकारी संपत्ति को नुकसान और हथियार लूटने जैसी धाराएं शामिल हैं.

आपको बता दें कि अदालती लड़ाई के बाद किसानों को रैली करने की अनुमति दी गई थी. पुलिस ने सिंघू, टिकरी और गाजीपुर सीमाओं के पास 60 से अधिक किलोमीटर की रैली सुबह 11.30 बजे समाप्त होने के बाद ही में रैली शुरू करने को कहा था. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में रैली का विरोध करते हुए कहा था कि जिस समय इस रैली करने की मांग की गई थी वह ‘राष्ट्र के लिए शर्मिंदगी’ बन जाएगा. लेकिन अदालत, ने रैली की अनुमति देने या नहीं देने का जिम्मा दिल्ली पुलिस को सौंप दिया. जबकि किसानों और सरकार के बीच 11 दौर की वार्ता के बावजूद कृषि कानूनों पर कोई सहमति नहीं बन पाई है. किसानों ने 18 महीने तक कानून को सस्पेंड करने के केंद्र सरकार की अंतिम पेशकश ठुकरा दी.

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