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शाहीन बाग में ऐसे लिया जाता है हर फैसला, इस इंटरनेशनल प्रोटेस्ट से हैं प्रभावित
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Updated: February 3, 2020, 1:09 PM IST
शाहीन बाग में ऐसे लिया जाता है हर फैसला, इस इंटरनेशनल प्रोटेस्ट से हैं प्रभावित
सीएए के विरोध में शाहीन बाग में जमा प्रदर्शनकारी. फाइल फोटो.

शाहीन बाग़ (Shaheen Bagh) के प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हमारा प्रदर्शन फेसलेस है इसीलिए शाहीन बाग़ सहित देशभर के सभी प्रदर्शन कामयाब हैं और इसी के चलते 50 दिन बीत चुके हैं.

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  • Last Updated: February 3, 2020, 1:09 PM IST
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नई दिल्ली. यहां हर छोटे-बड़े फैसले से लेकर नारेबाजी तक के मुद्दे मंच से नहीं मंच के सामने से तय होते हैं. किस मामले में डेलीगेशन बात करेगा और उसमें कौन-कौन होगा, इसका फैसला भी मंच के सामने बैठी महिलाएं ही करती हैं. मंच का इस्तेमाल बात रखने के लिए होता है फैसला लेने के लिए नहीं. यह सब हो रहा है नागरिकता संशोधन कानून (CAA), नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) के विरोध में शाहीन बाग़ (Shaheen Bagh) में चल रहे प्रदर्शन में. प्रदर्शन में बैठे लोगों का कहना है, “हमारी कोशिश है कि हम इस प्रदर्शन को फेसलेस रखें, तभी प्रदर्शन कामयाब होगा और हांगकांग में भी बीते 10 महीने से ऐसा ही हो रहा है.”

50 दिन की कामयाबी पर यह बोले शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारी
हर रोज दिन से लेकर रात तक शाहीन बाग़ के प्रदर्शन में मौजूद रहने वाले शाहजाद अली बताते हैं, “जैसे ही सीएए के खिलाफ चलने वाला शाहीन बाग़ का प्रदर्शन सुर्खियां बटोरने लगा तो कुछ लोग यहां चेहरा चमकाने की कोशिश में लग गए. ऐसे लोगों में सियासत से जुड़े लोग भी थे तो एडवोकेट, एनजीओ चलाने वाले सामाजिक कार्याकर्ता आदि शामिल थे. लेकिन अच्छी बात यह थी कि पहले दिन से लेकर आज तक प्रदर्शन में शामिल होने वाली महिलाओं ने किसी को कामयाब नहीं होने दिया. हर फैसला ज़मीन पर बैठे लोगों की राय शुमारी के बाद ही लिया गया. अगर कोई बिना पूछे और बातचीत के प्रदर्शन को लेकर कहीं कोई वादा कर आया तो उसकी बात नहीं मानी गई.”

शाहीन बाग़ में चल रहे प्रदर्शन में बैठे लोग. (File Photo)


शाहीन बाग़ में कानून मंत्री के प्रस्ताव पर दोहराई यह बात
केंद्र सरकार में कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने हाल ही में कहा है कि वो शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों से बात करना चाहते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारी चाहें तो अपना एक स्वरूप तय कर बातचीत कर सकते हैं. इस बारे में तुरंत शाहीन बाग़ के मंच पर कानून मंत्री का प्रस्ताव रखा गया.

प्रस्ताव पर चर्चा के बाद मंच के सामने से फैसला आया कि पहले सीएए को वापस लेने संबंधी एक हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दिया जाए. बातचीत के लिए सरकार अपने प्रतिनिधि को शाहीन बाग़ के मंच पर भेजे और वो माइक से अपनी बात रखें. सीएए और शाहीन बाग़ के मुद्दे पर बंद कमरे में किसी भी तरह की बातचीत नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट महमूद प्राचा भी इस बात को दोहरा चुके हैं.ये भी पढ़ें:- 

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First published: February 3, 2020, 12:48 PM IST
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