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sharjeel imam bail plea postponed till 26 may in delhi high court

राजद्रोह मामला: शरजील इमाम की जमानत अर्जी पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई 26 मई तक टली

 11 अप्रैल को भारतीय दंड संहिता और यूएपीए के तहत आरोपी शरजील इमाम को राहत देने से इनकार कर दिया था.

11 अप्रैल को भारतीय दंड संहिता और यूएपीए के तहत आरोपी शरजील इमाम को राहत देने से इनकार कर दिया था.

Delhi High Court on Sharjeel Imam: अंतरिम जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे शरजील इमाम के आवेदन पर सुनवाई टल गई है. उस पर सुनवाई के लिए अब 26 मई की तारीख तय की गई है.

हाइलाइट्स

इमाम ने निचली अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज करने के फैसले को चुनौती दी थी.

नई दिल्ली. राजद्रोह मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर अंतरिम जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे शरजील इमाम के आवेदन पर सुनवाई टल गई है. उस पर सुनवाई के लिए अब 26 मई की तारीख तय की गई है. जिस डिविजन बेंच के सामने आवेदन सुनवाई के लिए लगा था, वो बैठी नहीं.

दिल्ली हाईकोर्ट में जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम के खिलाफ यूएपीए के तहत दर्ज मामले में दायर जमानत अर्जी पर सुनवाई होनी थी. यह मामला वर्ष 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की कथित साजिश के आरोप में दर्ज किया गया है. इमाम ने निचली अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज करने के फैसले को चुनौती दी थी. शरजील इमाम की अर्जी पर सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और रजनीश भटनागर की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था.

सरकार खिलाफ भाषण देने का आरोप
गौरतलब है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र शरजील इमाम पर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ भाषण देने का आरोप है खासतौर पर दिसंबर 2019 में दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया में. इमाम ने अपनी अर्जी में कहा था कि कोई भी स्वीकार्य सामग्री के अभाव में निचली अदालत ने गलत तरीके से उसे दंगे कराने की साजिश का हिस्सा पाया और प्रथमदृष्टया उसके खिलाफ सख्त गैरकानूनी गतिविधि (निषेध) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत ‘आतंकवादी कृत्य’ का कोई मामला नहीं बनता.

कहा कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं
शरजील इमाम ने अर्जी में यह भी कहा था कि वह पीएचडी पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष का छात्र है और उसका पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. अर्जी में कहा गया कि निचली अदालत यह गौर करने में असफल रही कि पूरी जांच में खामी है और उसके भाषण व हिंसा में कोई संबंध नहीं है. अर्जी में दावा किया गया है कि इमाम को दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ ‘लक्षित अभियान के हिस्से’ के तहत गिरफ्तार किया और जब उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा हुई थी तब वह पहले ही अन्य मामलों में हिरासत में था, और उसका कथित सह षडयंत्रकारियों के साथ कोई संवाद नहीं हुआ था.

इससे पहले विशेष न्यायाधीश अमिताभ रावत ने 11 अप्रैल को भारतीय दंड संहिता और यूएपीए के तहत आरोपी शरजील इमाम को राहत देने से इनकार कर दिया था. फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में संशोधित नागरिकता अधिनियम के समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़प होने के बाद सांप्रदायिक हिंसा शुरू हो गई थी.

Tags: DELHI HIGH COURT, Sharjeel Imam

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