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पितृ पक्ष: दिल्‍ली में कोविड से मरने वालों की अस्थियां लेने भी नहीं आए परिजन, अब बिहार के गया में होगा पिंडदान

दिल्‍ली की संस्‍था साउथ एशियन फोरम पीपल अगेन्‍स्‍ट टैरर कोरोना में मारे गए लोगों का बिहार के गया में पिंडदान करने जा रही है.

दिल्‍ली की संस्‍था साउथ एशियन फोरम पीपल अगेन्‍स्‍ट टैरर कोरोना में मारे गए लोगों का बिहार के गया में पिंडदान करने जा रही है.

पितृ पक्ष में दिल्‍ली की साउथ एशियन फोरम पीपल अगेंस्‍ट टैरर 26 सितंबर को ऐसे लोगों के लिए गया में पिंडदान करने जा रही है जिनकी मौत कोविड से हुई और उनके परिजन राजधानी के श्‍मशानों में उनकी अस्थियां लेने भी नहीं पहुंचे.

  • News18Hindi
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    नई दिल्‍ली. देश में इस समय पितृ पक्ष (Pitru Paksha) चल रहा है जिसमें मृत परिजनों की आत्‍मा की मुक्ति और शांति के लिए श्राद्ध किए जाने का विधान है लेकिन कहा जाता है कि बिहार के गया (Gaya) में किया गया पिंडदान (Pind Daan) सर्वश्रेष्‍ठ है और यह आत्‍मा की मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल और सहज उपाय है. हालांकि पिछले साल से देश में आई कोरोना महामारी (Corona Pandemic) में सैकड़ों ऐसे लोग भी थे जिनकी कोविड से मौत हो गई और उनका अंतिम संस्‍कार भी उनके परिजन नहीं कर सके बल्कि अस्‍पतालों की तरफ से ही पीपीई किट (PPE Kits) में तैनात कर्मचारियों ने ही श्‍मशानों में मुखाग्नि दी. कोरोना के डर के चलते ऐसे तमाम लोग थे जो परिजनों की अस्थियां लेने भी श्‍मशानों (Burial Sites) में नहीं पहुंचे और आजतक उनकी अस्थियां श्‍मशानों में ही पड़ी हैं.

    हालांकि अब दिल्‍ली में कोरोना से मर चुके ऐसे लोगों के लिए सामाजिक संस्‍था आगे आई है जो न केवल ऐसे लोगों की अस्थियां विसर्जित करेगी बल्कि इस पितृ पक्ष में कोविड से मरने वाले लोगों की मोक्ष प्राप्ति के लिए बिहार (Bihar) के फल्‍गु तट पर बसे गया में पिंडदान भी करेगी. दिल्‍ली की साउथ एशियन फोरम पीपल अगेंस्‍ट टैरर (SAFPAT) 26 सितंबर को ऐसे लोगों के लिए गया में पिंडदान करने जा रही है.

    दिल्‍ली के चार बड़े श्‍मशानों में अभी भी कोविड से मारे गए लोगों की अस्थियां पड़ी हुई हैं.

    दिल्‍ली के चार बड़े श्‍मशानों में अभी भी कोविड से मारे गए लोगों की अस्थियां पड़ी हुई हैं.

    फोरम के अध्‍यक्ष अशोक रंधावा ने न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में बताया कि पिछले साल आई कोरोना महामारी में दिल्‍ली में काफी मौतें हुई थीं. यहां तक कि श्‍मशानों में भी दाह संस्‍कार के लिए लंबी लाइनें लगी थीं. इतना ही नहीं उस महामारी में कोरोना से मारे गए लोगों के शव भी घरवालों को नहीं दिए गए थे और उनका सीधे ही अग्नि-संस्‍कार कर दिया गया था. उसके बाद हुआ यह कि कोविड के डर और मारामारी के कारण इन श्‍मशानों में लोग अपने संबंधियों की अस्थियां लेने भी नहीं पहुंचे.

    रंधावा ने का कि फोरम ने दिल्‍ली के चार बड़े श्‍मशानों निगमबोध घाट (Nigambodh Ghat), सराय काले खां के पास बने श्‍मशान, लोधी रोड स्थित श्‍मशान घाट, पंजाबी घाट स्थित श्‍मशान घाट में बात की तो वहां की समितियां उन श्‍मशानों में कोविड के दौरान संस्‍कार के लिए आए लोगों के नाम देने को तैयार हो गईं. लिहाजा फोरम ने एक सूची बनाई. वहीं कुछ लोगों के परिजनों के नाम और गोत्र भी मालूम किए हैं. इसके बाद श्‍मशानों में पड़ी अस्थियों को अस्थि कलशों और लाल-कपड़ों में अलग-अलग इकठ्ठा किया जा रहा है. इन सभी को प्रवाहित करने के बाद गया में इन सभी के नाम से तर्पण और पिंडदान (Tarpan and Pind daan) किया जाएगा.

    वे कहते हैं कि फोरम के कुछ लोग इन श्‍मशान घाटों से अस्थियां और नाम इकठ्ठे कर चुके हैं. अभी तक 145 लोगों की अस्थियां नाम सहित मिल चुकी हैं. 26 सितंबर को बिहार के गया पहुंचने के बाद तर्पण और पिंडदान की प्रक्रिया की जाएगी. इस दौरान गया में पंडित और कर्मकांड करने वाले विद्वान मौजूद रहेंगे जो ये सब कराएंगे.

    दिल्‍ली बम-धमाकों में मारे गए लोगों का भी कर चुके हैं पिंडदान

    रंधावा ने बताया कि इससे पहले संस्‍था 2005 से 2011 के बीच दिल्‍ली में हुए बम-धमाकों में मारे गए लोगों की मोक्ष प्राप्ति के लिए गया में तर्पण और पिंडदान कर चुकी है. गया में विधिवत तरीके से बड़े स्‍तर पर यह आयोजन होता है. वे कहते हैं कि इस बार भी पुलवामा में मारे गए शहीदों और देश की सीमा पर शहीद होने वाले जवानों के नाम से भी तर्पण और श्राद्ध (Shraddha) किया जाएगा. रंधावा का कहना है कि हिंदू परंपरा के अनुसार पितृ पक्ष में गया में किया गया तर्पण या पिंडदान आत्‍मा की मुक्ति करने के साथ ही उसे स्‍वर्ग और मोक्ष तक पहुंचाता है.

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