इस एनकाउंटर में बदमाश ने पहली बार AK-47 और पुलिस ने मोबाइल सर्विलांस का किया था इस्तेमाल, बन चुकी है फिल्‍म
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इस एनकाउंटर में बदमाश ने पहली बार AK-47 और पुलिस ने मोबाइल सर्विलांस का किया था इस्तेमाल, बन चुकी है फिल्‍म
माफिया डॉन श्रीप्रकाश शुक्‍ला ने मुख्‍यमंत्री को मारने की ही सुपारी ले ली थी. (फाइल फोटो)

यह एनकाउंटर (Encounter) चर्चित इसलिए भी रहा था कि मरने वाले माफिया डॉन (Mafia Don) ने यूपी के सीएम को मारने की सुपारी ली थी. इस एनकाउंटर में तीन चीजें पहली बार हुई थीं.

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नई दिल्ली. यह देश का एक चर्चित एनकाउंटर (Encounter) था. चर्चित इसलिए भी कि मरने वाले माफिया डॉन (Mafia Don) ने यूपी के सीएम को मारने की सुपारी ली थी. चर्चा इसलिए भी हुई कि इस एनकाउंटर में तीन चीजें पहली बार हुई थीं. किसी बदमाश की तरफ से पहली बार एके-47 (AK-47) का इस्तेमाल किया गया था. बदमाश को पकड़ने के लिए पुलिस ने पहली बार मोबाइल सर्विलांस (Mobile surveillance) का इस्तेमाल किया था. इतना ही नहीं, डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला (Shree Prakash Shukla) को पकड़ने के लिए ही स्पेशल टास्क फोर्स (STF) बनाई गई थी. बाद में इस एनकाउंटर को लेकर बॉलीवुड (Bollywood) में अरशद वारसी को लेकर ‘शहर’ नाम से एक मूवी भी बनाई गई थी.

ऐसे ट्रेस की गई थी श्रीप्रकाश शुक्ला की लोकेशन
आज भी कई मौकों पर आईपीएस राजेश पाण्डेय पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए बताते हैं कि श्रीप्रकाश शुक्ला का आतंक बढ़ चुका था. खासतौर से ठेकेदारी में उसका दखल बढ़ गया था. श्रीप्रकाश के आतंक को खत्म करने के लिए लखनऊ सचिवालय में यूपी के मुख्‍यमंत्री, गृहमंत्री और डीजीपी की एक बैठक हुई. इसमें अपराधियों से निपटने के लिए स्‍पेशल फोर्स बनाने की योजना तैयार हुई.

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4 मई 1998 को यूपी पुलिस के तत्‍कालीन एडीजी अजयराज शर्मा ने राज्य पुलिस के बेहतरीन 50 जवानों को छांट कर एसटीएफ बनाई. इस फोर्स का पहला टास्क था श्रीप्रकाश शुक्ला. यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह बताते हैं कि उस वक्त श्रीप्रकाश के आतंक को खत्म करना एक बड़ा टास्‍क था. इसी के चलते एसटीएफ बनाई गई थी. मैं इसका पहला आईजी था.



मोबाइल सर्विलांस का इस्तेमाल
एसटीएफ को पता चला कि श्रीप्रकाश दिल्‍ली में अपनी किसी गर्लफ्रेंड से मोबाइल पर बातें करता है. एसटीएफ ने उसके मोबाइल को सर्विलांस पर ले लिया, लेकिन श्रीप्रकाश को शक हो गया. उसने मोबाइल की जगह पीसीओ से बात करना शुरू कर दिया. उसे यह नहीं पता था कि पुलिस ने उसकी गर्लफ्रेंड के नंबर को भी सर्विलांस पर रखा है. सर्विलांस से पता चला कि जिस पीसीओ से श्रीप्रकाश कॉल कर रहा है, वो गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में है.

ऐसे मारा गया था श्रीप्रकाश शुक्ला
23 सितंबर 1998 को एसटीएफ के प्रभारी अरुण कुमार को श्रीप्रकाश की गर्लफ्रेंड के मोबाइल को ट्रेस करने के बाद यह खबर मिली कि श्रीप्रकाश दिल्‍ली से गाजियाबाद की तरफ आ रहा है. श्रीप्रकाश शुक्‍ला की कार जैसे ही वसुंधरा इन्क्लेव पार करती है, अरुण कुमार सहित एसटीएफ की टीम उसका पीछा शुरू कर देती है. उस वक्‍त श्रीप्रकाश को जरा भी शक नहीं हुआ था कि एसटीएफ उसका पीछा कर रही है.

उसकी कार जैसे ही इंदिरापुरम के सुनसान इलाके में दाखिल हुई, मौका मिलते ही एसटीएफ की टीम ने अचानक श्रीप्रकाश की कार को ओवरटेक कर उसका रास्ता रोक दिया. पुलिस ने पहले श्रीप्रकाश को सरेंडर करने को कहा, लेकिन वो नहीं माना और फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस की जवाबी फायरिंग में श्रीप्रकाश मारा गया.
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