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सिंघु बॉर्डर पर दलित की हत्‍या का मामला UN मानवाधिकार उच्‍चायुक्‍त तक पहुंचा, सामाजिक संगठन ने की शिकायत

सिंघु बॉर्डर पर दलित की हत्‍या का मामला UN मानवाधिकार उच्‍चायुक्‍त तक पहुंचा, सामाजिक संगठन ने की शिकायत

बीते 15 अक्टूबर को सिंघु बॉर्डर पर दलित मजदूर की निर्ममता से हत्‍या कर उसका शव बैरिकेड से लटका दिया गया था. घटना के बाद तैनात सुरक्षाबल. (File Pic)

बीते 15 अक्टूबर को सिंघु बॉर्डर पर दलित मजदूर की निर्ममता से हत्‍या कर उसका शव बैरिकेड से लटका दिया गया था. घटना के बाद तैनात सुरक्षाबल. (File Pic)

Singhu Border पर लखबीर की हत्‍या कर उसका क्षत-विक्षत शव बैरिकेड पर लटकाए जाने के निर्मम मामले को लेकर सामाजिक संगठन मिशन आंबेडकर ने OHCHR को पत्र लिखकर हस्‍तक्षेप की मांग की है. शिकायती पत्र में कहा गया है कि मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन और जाति आधारित नृशंस हत्या के इस मामले पर तुरंत संज्ञान लिया जाए.

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नई दिल्‍ली : सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर शुक्रवार को दलित युवक लखबीर सिंह (Lakhbir Singh) की बर्बरता से की गई हत्या का मामला संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार उच्‍चायुक्‍त कार्यालय (OHCHR) तक पहुंच गया है. लखबीर की हत्‍या कर उसका क्षत-विक्षत शव बैरिकेड पर लटकाए जाने के निर्मम मामले को लेकर सामाजिक संगठन मिशन आंबेडकर ने OHCHR को पत्र लिखकर हस्‍तक्षेप की मांग की है. शिकायती पत्र में कहा गया है कि मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन और जाति आधारित नृशंस हत्या के इस मामले पर तुरंत संज्ञान लिया जाए.

सामाजिक संगठन मिशन आंबेडकर के संस्‍थापक सूरज कुमार बौद्ध ने रविवार को संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार उच्‍चायुक्‍त कार्यालय को यह पत्र लिखा. उन्‍होंने पत्र में कहा कि 15 अक्टूबर 2021 को नई दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर एक 35 वर्षीय दलित मजदूर की निहंग समूह निर्वेर खालसा-उड़ना दल के निहंगों ने इसलिए लिंचिंग की, क्योंकि उसने कथित तौर पर सिखों की धार्मिक किताब को छुआ था. उसकी इतनी बेरहमी से हत्या कर दी गई कि न केवल उसका एक हाथ और एक पैर को बेरहमी से कुल्हाड़ी से काट दिया गया, बल्कि आतंक फैलाने के लिए पुलिस के बैरिकेड्स पर सार्वजनिक रूप से उसे लटका दिया गया. इस घटना ने दहशत का माहौल पैदा कर दिया है.

पुलिस मशीनरी ने हमेशा की तरह काम नहीं किया
उन्‍होंने पत्र में कहा, एक दलित शख्‍स के साथ हुई इस बर्बरता ने पूरे भारत में एससी/एसटी (SC/ST) के विवेक और आत्मविश्वास को हिला दिया है. उन्‍होंने आरोप लगाते हुए कहा क‍ि सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और गृह विभाग जैसे संवैधानिक तंत्र सहित राज्य की पुलिस मशीनरी ने हमेशा की तरह काम नहीं किया.

नियमित रूप से बलात्कार किए जा रहे हैं
सूरज कुमार बौद्ध ने पत्र में कहा कि इस घटना में कई लोग आपराधिक रूप से शामिल हैं, जिसके परिणामस्वरूप राज्य की कानून और व्यवस्था की मशीनरी विफल हो गई है. जातिवाद के कारण दक्षिण एशिया विशेष रूप से भारत अनुसूचित और अन्य निचली जातियों, समुदायों के लिए अपमान, मौत का बिस्तर और गैस चैंबर बन गया है. पत्र में उनकी तरफ से आगे कहा गया कि भारत में अनुसूचित जातियों और उत्पीड़ित समुदायों के मानवाधिकारों का न केवल घोर हनन हो रहा है, बल्कि उनकी हत्या की जा रही है और उनकी महिलाओं के साथ नियमित रूप से बलात्कार किए जा रहे हैं.

स्थिति के समाधान का अनुरोध भी किया गया है
उन्‍होंने सिंघु बॉर्डर की घटना को लेकर कहा कि यह जाति आधारित अत्याचार का मुद्दा है, जिसका एक जातीय मूल है, वंश श्रेष्ठता, हीनता की धारणा और एक नस्लीय पृष्ठभूमि है. लिहाजा, ओएचसीएचआर जो किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है. इसलिए संयुक्त राष्ट्र के इस निकाय को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए. उन्‍हें मामले की स्थिति का पता लगाने के लिए अपनी टीम को तैनात करना चाहिए. बिना किसी पूर्वाग्रह के प्रभावी तंत्र और उपाय सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के साथ जुड़ना चाहिए. उनकी ओर से इस केस पर जल्‍द प्राथमिकता के आधार पर गौर करने के अनुरोध के साथ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता, तत्काल संज्ञान और स्थिति के समाधान का अनुरोध भी किया गया है.

Tags: Dalit, Delhi Singhu Border, Kisan Andolan, Singhu Border

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