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मरीज के गले में फंसा था नारियल जितना बड़ा ट्यूमर, फिर गंगाराम अस्‍पताल के डॉक्‍टरों ने किया कमाल

दिल्‍ली के सर गंगाराम अस्‍पताल में डॉक्‍टरों ने नारियल से भी बड़े थॉइराइड ट्यूमर का ऑपरेशन किया है.

दिल्‍ली के सर गंगाराम अस्‍पताल में डॉक्‍टरों ने नारियल से भी बड़े थॉइराइड ट्यूमर का ऑपरेशन किया है.

सर गंगाराम अस्‍पताल के डॉक्‍टर संगीत अग्रवाल ने बताया क‍ि आमतौर पर थॉइराइड ग्‍लैंड 10 से 15 ग्राम की होती है और इसका सा ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

आमतौर पर थॉइराइड ग्‍लैंड 10 से 15 ग्राम की होती है और इसका साइज 3-4 सेंटीमीटर होता है.
यह ट्यूमर ग्‍लैंड के वास्‍तविक साइज से करीब 6 गुना ज्‍यादा बढ़कर नारियल जैसा हो गया था.
3 घंटे तक चली सर्जरी के बाद डॉक्‍टरों ने इस ट्यूमर को बाहर निकाल दिया.

नई दिल्‍ली. राजधानी स्थित गंगाराम अस्‍पताल के ईएनटी डॉक्‍टरों ने एक मरीज के गले में से नारियल के आकार का ट्यूमर निकालकर उसे जीवनदान दिया है. बिहार के बेगुसराय के रहने वाले 72 वर्षीय किसान को पिछले 6 महीनों से सांस लेने और कुछ भी निगलने में परेशानी हो रही थी. जैसे जैसे यह समस्‍या बढ़ती गई मरीज का जीवन काफी हद तक प्रभावित होने लगा. इसके बाद पिछले महीने ही मरीज को दिल्ली के सर गंगाराम अस्‍पताल में लाया गया. जहां अस्‍पताल के नेक ऑन्‍को सर्जरी, ईएनटी विभाग में दिखाया गया.

नेक ऑन्‍को सर्जरी के प्रमुख डॉ. संगीत अग्रवाल ने बताया कि पिछले कई सालों से प्रेक्टिस के दौरान उन्‍होंने बड़े थॉइरॉइड ट्यूमर की करीब 250 से ज्‍यादा सर्जरी की हैं लेकिन यह ट्यूमर के वजन और साइज के मामले में यह अलग ही केस था. आमतौर पर थॉइराइड ग्‍लैंड 10 से 15 ग्राम की होती है और इसका साइज 3-4 सेंटीमीटर होता है. इसकी शेप भी तितली के आकार की होती है लेकिन इस मरीज के मामले में यह ग्‍लैंड 18 से 20 सेंटीमीटर की नारियल से भी बड़े आकार के ट्यूमर में बदल गई थी.

3 घंटे चला ऑपरेशन, आवाज खोने का था डर 
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि 3 घंटे तक चले इस ऑपरेशन को करने में कई प्रकार की चुनौतियां सामने आईं. इनमें सबसे बड़ी चुनौती मरीज के इस ट्यूमर को निकालते हुए उसकी आवाज को बचाए रखना था. हालांक‍ि उसकी दोनों वोकल कॉर्ड नर्व्‍स को सफलतापूवर्क बचा लिया गया. दूसरी सबसे बड़ी चुनौती थी कि ट्यूमर कई प्रकार की ब्‍लड वेसेल्‍स से भरा हुआ था ऐसे में मरीज में खून कम होने का खतरा था ऐसे में इन ब्‍लड वेसेल्‍स को पंक्‍चर होने से रोक लिया गया और मरीज को कोई नुकसान नहीं हुआ.

इसके अलावा विंड पाइप पर दवाब था लिहाजा एनेस्‍थीसिया के लिए विशेष तकनीक अपनाई गई. इस प्रकार के बड़े ट्यूमर्स में कैल्शियम को संरक्षित करना और पैरा थाइरॉइड ग्‍लैंड को ठीक बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है लेकिन इस केस में चारों पैरा थॉइरॉइड ग्‍लैंड्स को बचा लिया गया.

गले में तितली जितनी बड़ी होती है ये ग्रंथि  
बता दें कि थाइरॉइड ग्‍लैंड तितली के आकार की होती है और यह गर्दन के आधार में स्थित होती है. यह हार्मोन्‍स को रिलीज करती है जो मेटाबोलिज्‍म को नियंत्रित करते हैं ताकि शरीर में ऊर्जा का इस्‍तेमाल हो सके. थॉइरॉइड के हार्मोन्‍स पूरे शरीर के फंक्‍शंस को रेगुलेट करते हैं. इनमें सांस लेना, हार्ट रेट, सेंट्रल और पेरीफेरल नर्वस सिस्‍टम, शरीर का वजन, मसल्‍स की ताकत, मेन्‍स्‍ट्रुअल साइकल, शरीर का तापमान, कॉलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर आदि. थॉइराइड ग्‍लैंड गले के सामने वाले हिस्‍से में होती है जिसे अदम का सेब भी कहते हैं.

Tags: Gangaram Hospital, Health

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