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भारत में कचरा बीनने वालों का हुआ सबसे बड़ा सर्वे, 10 में से 6 के पास नहीं बैंक खाता

भारत में कचरा बीनने वालों का हुआ सबसे बड़ा सर्वे, 10 में से 6 के पास नहीं बैंक खाता

भारत में 10 में से 6 सफाई साथियों के अपने बैंक खाते ही नहीं हैं .

भारत में 10 में से 6 सफाई साथियों के अपने बैंक खाते ही नहीं हैं .

यूएनडीपी द्वारा 14 शहरों के 9300 सफाई कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार किए गए इस विश्लेषण को अब तक का सबसे बड़ा आकलन माना जा रहा है.

    नई दिल्ली. स्वच्छ समाज के लिए कचरा बीनने का महत्वपूर्ण काम करने वाले सफाई साथियों की देश में सामाजिक और आर्थिक स्थिति अच्‍छी नहीं है. 10 में से 6 सफाई साथियों के अपने बैंक खाते ही नहीं हैं वहीं अधिकांश सफाई साथी अस्वास्थ्यकर अस्थाई जगहों या टीन शेड्स में रहने को मजबूर हैं. यूएनडीपी इंडिया (यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम इंडिया) ने हाल ही में इस विषय को लेकर एक विस्तृत विश्लेषण तैयार किया था जिसे नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने औपचारिक रूप से जारी किया है. खास बात है कि 14 शहरों के 9300 सफाई कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार किए गए इस विश्लेषण को अब तक का सबसे बड़ा आकलन माना जा रहा है.

    ये है कचरा बीनने वालों की स्थिति
    – दस में से छह सफाई साथियों के पास अपना बैंक खाता ही नहीं है.
    – केवल 21 प्रतिशत सफाई साथियों को जनधन योजना का लाभ मिला, जबकि अधिकारी सफाई साथियों ने कहा कि अब भी डिजिटल पेमेंट उनकी पहुंच से बाहर है.
    – आधार और मतदाता पहचान पत्र के अतिरिक्त साठ से 90 प्रतिशत सफाई साथियों के पास अन्य किसी तरह का औपचारिक प्रमाणपत्र जैसे जन्म प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, रोजगार कार्ड आदि नहीं है.
    – 50 प्रतिशत सफाई साथियों के पास अपना राशन कार्ड जरूर पाया गया है.
    – 5 प्रतिशत से भी कम सफाई साथियों के पास अपना स्वास्थ्य बीमा है.
    – अधिकांश सफाई साथी अस्थाई व अस्वच्छकर निवास जैसे टीनशेड्स या सड़क किनारे सोने को मजबूर हैं.
    – 90 प्रतिशत सफाई साथियों ने यह स्वीकार किया कि नियमित रूप से पीने के पानी और बिजली की आपूर्ति होती है.
    – अधिकांश सफाई साथी लकड़ी आधारित ईंधन पर खाना बनाते हैं.

    कचरा बीनने वालों की उपस्थिति को लेकर अमिताभ कांत ने कहा कि कचरा बीनने वाले या सफाई साथी सही मायने में अदृश्‍य पर्यावरणविद् हैं जो कचरे के निस्तारण में अहम भूमिका निभाते हैं. इनका ठोस प्लास्टिक कचरा प्रबंधन में भी अहम योगदान होता है. नीति आयोग, आवास एवं विकास मंत्रालय और यूएनडीपी के साथ मिलकर समाज के इस अहम वर्ग के विकास में अपना योगदान देने को लेकर काफी खुश है. गौरतलब है कि यूएनडीपी के प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रम के तहत बेसलाइन परियोजना उत्थान- राइज विद रिसाइलेंस के एक हिस्से के रूप में शुरू की गई थी.

    उत्‍थान यूएनडीपी इंडिया, कोविड-19 के समय में सफाई साथियों तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने, योजनाओं को ज्‍यादा बेहतर, सुलभ और समुदायों के अनुसार बनाने की पैरवी करता है. बेसलाइन या जमीनी आकलन में महिला और पुरूष दोनों की ही सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता लगाया गया जोकि लगभग दोनों ही वर्ग में एक समान देखी गई. आकलन में पाया गया कि सफाई साथी अपनी आय और व्यवसाय न बदल पाने को लेकर मजबूर हैं. इसके लिए यूएनडीपी ने कई तरह की कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश की है. इससे पहले यूनएनडीपी ने साल 2021 में सबसे पहले जापान दूतावास के सहयोग से गोवा राज्य में सफाई साथियों के सामाजिक कल्याण योजना की शुरूआत की थी. केन्द्र सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का संचालन करने वाले सरकारी विभाग और सफाई साथियों के बीच महत्वपूर्ण सेतु का काम करता है.

    जापान भी कर रहा मदद
    वहीं जापान दूतावास के सोशल एंड डेवलमेंट मंत्री शिंगो मियामोतो ने कहा कि जापान इस तरह के उत्कृष्ट कार्यो का समर्थन देने में खुशी महसूस करता है जिसका उद्देश्य एक विशेष वर्ग के सामजिक उत्थान के साथ ही प्लास्टिक अपशिष्ट निस्तारण के साथ समाज को सशक्त बनाना हो. यूएनडीपी के उत्थान प्रोजेक्ट का समर्थन करना ही हमारी इस बात को लेकर कटिबद्धता को दर्शाता है. शिंगो मियामोतो ने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि सरकारी योजनाओं और सामाजिक समावेश से इस वर्ग के एक बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है.

    यूएनडीपी इंडिया की रेजिडेंट प्रतिनिधि सुश्री शोको नाडा ने कहा कि सफाई साथी प्लास्टिक कचरा के निस्तारण में अहम भूमिका निभाते हैं सफाई साथियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का विश्लेषण के मजबूत निष्कर्ष के माध्यम से शहरी निकायों और सरकारी विभागों के साथ मिलकर ऐसे कार्यक्रम बनाने में योगदान देगें जिससे सफाई साथियों के जीवन पर व्यापक असर पड़ेगा.

    हिंदुस्‍तान लिवर करेगा 300 सफाई साथियों का सहयोग
    इस अवसर पर हिंदुस्तान लिवर ने अगले चरण के उत्थान में अपना सहयोग देने की बात कही और कहा कि कंपनी दिल्ली और मुंबई के 3000 सफाई साथियों तक पहुंचेगा. इससे पहले भी हिंदुस्तान यूएनडीपी के साथ मिलकर मुंबई में प्लास्टिक कचरा निस्तारण पर काम कर रहा है. वर्तमान में यूएनडीपी इंडिया स्थाई अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में कारपोरेट्स व शहरी स्थानीय निकायों के साथ काम कर रहा है. जिसके जरिए अब तक 83000 मिट्रिक टन प्लास्टिक कचरे का निस्तारण किया जा चुका है.

    यूएनडीपी की सिफारिशें
    – सफाई साथियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू की जानी चाहिए.
    – इस समुदाय के उत्थान के लिए आर्थिक योगदान को मजबूत और औपचारिक बनाना चाहिए.
    – सफाई साथियों की आजीविका के लिए अतिरिक्त कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार के विकल्प बढ़ाने चाहिए.
    – सफाई साथियों के बीच सामाजिक सुरक्षा के ताने बाने को अधिक मजबूत किया जाना चाहिए.

    Tags: India, Japan, Niti Aayog, Sanitation worker

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