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दिल्ली में 6 गज जमीन पर 3 मंजिला मकान बनाने वाला कारीगर कहां गया, क्या फिर खड़ा कर रहा कोई अजूबा?

Delhi Unique 6 Yard House: आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई शख्स 6 गज जमीन में भी तीन मंजिला मकान खड़ा कर सकता है?

Delhi Unique 6 Yard House: आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई शख्स 6 गज जमीन में भी तीन मंजिला मकान खड़ा कर सकता है?

Eighth Wonder of Delhi: छह गज जमीन पर घर बनाने वाला राजमिस्त्री बिहार के मुंगेर जिले का रहने वाला था. आइए जानते हैं कि किस तरह इस शख्स ने यह जमीन खरीदी और इस पर तीन मंजिला मकान खड़ा कर दिया. पढ़िये ये दिलचस्प कहानी...

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई शख्स 6 गज जमीन (Six Yard House in Delhi) में भी तीन मंजिला मकान खड़ा कर सकता है? और ऐसी बिल्डिंग में पांच सदस्यों का परिवार रह भी सकता है? हां, यह करामात किसी इंजीनियर या किसी आर्केिटेक्ट नहीं, बल्कि बिहार के एक साधारण  राजमिस्त्री ने कर दिखाया है. दिल्ली में छह गज जमीन पर बने इस मकान की कहानी बड़ी रोचक है. घर बनाने का आइडिया कैसे आया और बाद में खरीदार ने कैसे यह घर अपने नाम किया है, वह भी कम दिलचस्प नहीं है. आइए जानते हैं बुराड़ी में 6 गज की जमीन पर बने इस घर की पूरी कहानी, साथ ही इसे बनाने वाला अब कहां है और क्या करता है?

दिल्ली के बुराड़ी इलाके में छह गज जमीन पर घर बनाने का आइडिया दरअसल एक राजमिस्त्री का था. बिहार के मुंगेर जिले का रहने वाला उस शख्स की कारीगरी की आप दाद दे सकते हैं. ऐसा क्या हुआ कि उस राजमिस्त्री को 6 गज के प्लॉट में तीन मंजिला मकान खड़ा करने का आइडिया आया, यह कहानी दिलचस्प है. बताते हैं कि जिस जमीन पर आज यह इमारत खड़ी है, वह उसी राजमिस्त्री की थी, जिसे उसने बाद में बेच दिया. निर्माण के कुछ ही दिनों बाद यह अजूबा घर बेचकर भी वह कहीं चला गया.

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जब आप घर के पास पहुंचेंगे तो इस मकान को देखकर कारीगर की तारीफ न करें ऐसा हो नहीं सकता.

छह गज का मकान या दिल्ली का आठवां अजूबा!
बुराड़ी मेन रोड से जब संत नगर मेन मार्केट के आखिरी हिस्से में पहुंचते हैं, तो दाहिने हाथ पर एक छोटी सी चौधरी डेयरी नजर आती है. आपको वहां से ही स्थानीय लोग 6 गज की जमीन पर बने मकान के बारे में बताने लगेंगे. जब आप घर के पास पहुंचेंगे तो इस मकान को देखकर कारीगर की तारीफ न करें, ऐसा हो नहीं सकता. यहां आने वाला हर शख्स कारीगर की तारीफ करते नहीं थकता. लेकिन, इस मकान को बनाने वाला अब इस इलाके में नहीं रहता है.

कौन है मकान बनाने वाला
न्यूज 18 के संवाददाता ने जब इस अजूबे कारीगर के बारे में स्थानीय लोगों से बात की, तो पता चला कि मकान बनाने वाला एक मजदूर था, जो बाद में राजमिस्त्री (मकान बनाने वाला कारीगर) बन गया. वह इलाके के ही एक ठेकेदार के यहां नौकरी करता था. उस ठेकेदार का काम था, इलाके की जमीन की प्लॉटिंग कर और फिर बेच देना. जिस जमीन पर यह मकान है, वहीं से गली नंबर 65 के लिए रास्ता निकलना था. इसलिए रास्ता निकलने के बाद कोने की 6 गज जमीन बच गई. उस कारीगर ने ठेकेदार से 6 गज जमीन का यह हिस्सा अपने नाम करवा लिया.

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पिछले साल संजय का काम छूट गया था, फिर भी वह कोरोना काल इसी मकान में गुजारा.

मकान का आर्किटेक्ट क्यों है लाजवाब
ठेकेदार ने उस समय कारीगर को एक लाख रुपये में जमीन बेची थी, जिस पर उस राजमिस्त्री ने अजूबा इमारत खड़ी कर दी. इस इमारत के ग्राउंड फ्लोर से ही पहली मंजिल पर जाने का रास्ता निकलता है और ग्राउंड फ्लोर पर ही सीढ़ियों से सटा एक बाथरूम भी है. ग्राउंड फ्लोर से ऊपर चढ़कर जब आप पहली मंजिल पर जाएंगे तो एक बेड रूम और उससे सटा बाथरूम नजर आएगा. बेडरूम से ही दूसरी मंजिल के लिए रास्ता निकाला गया है. पहली मंजिल पर पहुंचते ही एक बेड आपको नजर आएगा. उस बेड को इस मकान के पहले मालिक ने कमरे के अंदर ही बनवाया था. तब से अब तक बेड उसी जगह पर है जहां वह पहले दिन से लगा था. मकान तिकोने आकार का है. यानी दरवाजे से शुरू होकर अंत तक जाते-जाते दीवारें त्रिभुज की तरह जुड़ जाती हैं.

क्यों मकान बनाने वाला मकान बेच दिया
पवन कुमार उर्फ सोनू इस मकान के मौजूदा मालिक हैं. न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में सोनू कहते हैं, ‘इस मकान को हमने 6-7 साल पहले अरुण कुमार नाम के एक शख्स से खरीदा था. अरुण कुमार बिहार के मुंगेर जिले का रहने वाला था और पेशे से वह कारीगर था. उसने खुद के रहने के लिए मकान बनाया था, लेकिन कर्ज के तले इतना दब गया कि उसे मौजूदा मकान मालिक को यह घर बेचना पड़ा.

जहां तंग गलियों से निकलने पर लोग झल्ला जाते हैं, वहीं एक शख्स ने तंग जमीन पर तीन मंजिला इमारत खड़ी कर दी.छह गज का मकान, दिल्‍ली छह गज का घर, delhi six yard house, smallest house of delhi, delhi smallest house, lockdown experience in smallest house of delhi, delhi life in corona lockdown, lockdown diaries, lockdown special story, second wave corona in delhi, लॉकडाउन स्‍टोरी, लॉकडाउन के अनुभव, कोरोना और सोशल डिस्‍टेंसिंग, सबसे छोटा घर, बिल्‍डर, कला का नमूना, अजब गजब, आठवां अजूबा, कोरोना की दूसरी लहर

6 गज की जमीन को बेचकर अरुण अंडरग्राउंड हो गया.

क्यों गुमनामी में जी रहा है मकान बनाने वाला
आस-पास के लोगों ने बातचीत में कहा कि 6 गज जमीन पर बने इस मकान का मालिक जुएबाज था और एक ही रात काफी रकम जुए में हार गया था. इस लत की वजह से उस पर काफी कर्ज भी हो गया था. कर्ज चुकाने के लिए उसने रातोंरात जमीन की पावर ऑफ एटार्नी सोनू के नाम कर दी. क्योंकि, यह कच्ची कॉलोनी है, इसलिए यहां पर मकान की रजिस्ट्री नहीं होती है. हालांकि, बिजली और पानी की कोई दिक्कत नहीं है.

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इस 6 गज की जमीन को बेचकर अरुण अंडरग्राउंड हो गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि कहां और कैसे रह रहा है, ये लोगों को पता नहीं है, लेकिन वह अच्छा आदमी था और दिमाग बहुत था. वह अपने चार-पांच भाइयों के साथ इस इलाके में रहता था. जबसे मकान बेचा है वह संपर्क में नहीं है. घर के मौजूदा मालिक सोनू ही नहीं, दूसरे पड़ोसियों ने भी कहा कि अरुण पर लोगों का कर्जा काफी हो गया था. वह कर्जा चुकाने में असमर्थ था, इसलिए उसने अंडरग्राउंड हो जाना ही सही समझा.

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