हाथरस कांड से उठ रहे महिला मंत्री, आयोगों पर सवाल, लड़कों के लिए सुधार आयोग की भी मांग

हाथरस की मासूम लड़की 15 दिन तक मौत से जूझती रही लेकिन हार गई. (Source: News18)
हाथरस की मासूम लड़की 15 दिन तक मौत से जूझती रही लेकिन हार गई. (Source: News18)

एंटी रेप एक्टिविस्‍ट और परी फॉर इंडिया की संस्‍थापक योगिता भयाना का कहना है कि महिलाओं के लिए इस देश में संवैधानिक संस्‍थाएं बनाई गई हैं ताकि महिलाओं के सशक्तिकरण के साथ ही उनके लिए न्‍याय की आवाज उठा सकें. लेकिन जब भी देश में कोई बड़ा मामला होता है तो ये सबसे बाद में नजर आती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 7:25 PM IST
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नई दिल्‍ली. उत्‍तर प्रदेश के हाथरस की बेटी के साथ कथित गैंगरेप और फिर हत्‍या की घटना से पूरा देश उबल रहा है. बेटी पर हुए जुल्‍म के बाद जहां उसका शव रात में जलाने को लेकर आम लोग सरकार, पुलिस और प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं वहीं महिलाओं के लिए बनाए गए राष्‍ट्रीय महिला आयोग के देरी से संज्ञान लेने पर भी सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित तमाम लोग सवाल उठा रहे हैं.

एंटी रेप एक्टिविस्‍ट और परी फॉर इंडिया की संस्‍थापक योगिता भयाना का कहना है कि महिलाओं के लिए इस देश में संवैधानिक संस्‍थाएं बनाई गई हैं. ताकि महिलाओं के सशक्तिकरण के साथ ही उन पर हो रहे अत्‍याचारों के दौरान ये उनके लिए न्‍याय की आवाज उठा सकें. लेकिन जब भी देश में कोई बड़ा मामला होता है तो ये सबसे बाद में नजर आती हैं. हाथरस, बारां, बुलंदशहर, बलरामपुर जैसी घटनाएं होती हैं लेकिन राष्‍ट्रीय महिला आयोग बमुश्किल सरकार से सवाल कर पाता है.





योगिता कहती हैं कि इन संस्‍थाओं को पीड़ि‍त की आवाज बनना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं होता. ये संस्‍थाएं राजनीतिक कठपुतली बनकर रह जाती हैं. आखिर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए इन्‍होंने क्‍या किया है. हाथरस मामले पर ही आयोग की ओर से पहले सिर्फ ट्वीट होता है. जब मामला गंभीर होता जाता है तब एक नोटिस जारी होता है.
योगिता पूछती हैं कि आयोगों को महिलाओं के सशक्तिकरण के साथ ही उनकी जिंदगी को बेहतर करने के लिए तमाम जागरुकता कार्यक्रम करने, पीड़ि‍तों को सलाह देने, उनकी मदद करने, पीड़ि‍त की शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस पर दवाब बनाने, सरकारों को सिफारिशें देने के लिए फंड दिया जाता है लेकिन आज जमीन पर ये क्‍यों नहीं दिखाई देते.

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