Budget पर बोले सिसोदिया- MCD के साथ भी धोखा, आखिर दिल्ली से आपकी क्या दुश्मनी है?
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Budget पर बोले सिसोदिया- MCD के साथ भी धोखा, आखिर दिल्ली से आपकी क्या दुश्मनी है?
बीजेपी के नेताओं ने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आप नेताओं पर कई आरोप लगाए हैं (फाइल फोटो)

डिप्टी सीएम (Deputy CM) ने कहा कि आज दिल्ली के लोग 1.5 लाख करोड़ टैक्स देते हैं. इस हिसाब से हमे ज्यादा मिलना चाहिए था लेकिन...

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  • Last Updated: February 1, 2020, 6:00 PM IST
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नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन (Nirmala Sitharaman) द्वारा मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा बजट संसद में पेश किए जाने के बाद दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि दिल्ली को लेकर बजट पर हमारी भी नजर थी, लेकिन यहां के लोगों के साथ बजट (Budget) छलावा है. उन्होंने कहा कि साल 2001 से दिल्ली को सेंट्रल शेयर कम दिए जा रहे हैं. सेंट्रल टैक्स के मुताबिक, 42% राज्यों को दिए जाते हैं. इस हिसाब से दिल्ली को 7 हजार करोड़ मिलना चाहिए था.

डिप्टी सीएम ने कहा कि आज दिल्ली के लोग 1.5 लाख करोड़ टैक्स देते हैं. इस हिसाब से हमें ज्यादा मिलना चाहिए था लेकिन दिल्ली को इस बार भी 325 करोड़ रुपए ही मिले हैं. सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली के लोगों से आपकी क्या दुश्मनी है. MCD के साथ भी धोखा हुआ है. एक पैसा नगर निगम को नहीं दिया गया. सारे देश में नगर निगम को दिया गया है, लेकिन दिल्ली के MCD को नहीं दिया गया. ये पैसे दिल्ली सरकार को नहीं चाहिए. दरअसल, ये पैसे कर्मचारियों की सैलरी के लिए होते हैं. मनीष सिसोदिया ने कहा कि बीजेपी तो MCD चुनाव में किये गए वादों को भूल जाती है. आप नए वादे कैसे ले आते है. उन्होंने इस बजट को फेल करार दिया.

 6% ऑफ GDP होना चाहिए
शिक्षा की बात करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा के बजट को कम कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि 6% ऑफ GDP होना चाहिए. पिछले साल 3.6% था वो अब 3.2% हो गया है. इनकम टैक्स में लोगों को बहुत उम्मीद थी. लेकिन इसबार कहा गया है कि अगर आपको छूट लेनी है तो सभी Exemption छोड़ने होंगे. हमें उम्मीद थी कि चुनाव को देखकर कुछ अच्छा करेंगे, लेकिन दिल्ली के साथ छलावा हुआ है. सिसोदिया ने कहा कि केंद्र शिक्षा में FDI लेकर आ रहा है. इसका मतलब यह हुआ कि वे शिक्षा के नाम पर प्राइवेट सेक्टर के लोगों को लाकर धंधा चलाना चाहते हैं. ऐसे में कहा जा सकता है कि शिक्षा को लेकर आपकी नियत साफ नहीं है.



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