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    Special Marriage Act: आपत्ति के लिए सार्वजनिक नोटिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

    दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार ने जवाब मांगा है.  (फाइल फोटो)
    दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार ने जवाब मांगा है. (फाइल फोटो)

    स्पेशल मैरिज एक्ट (Special Marriage Act ) को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने राज्य और केंद्र सरकार ने जवाब तलब किया है. कोर्ट में दाखिल याचिका में संबंधित कानून के तहत होने वाली शादियों में सार्वजनिक नोटिस के प्रावधान को कोर्ट में चुनौती दी गई है. 

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 7, 2020, 3:53 PM IST
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    दिल्ली. स्पेशल मैरिज एक्ट में बदलाव को लेकर लगाई गई याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में संबंधित कानून के तहत होने वाली शादियों के लिए आपत्ती मांगने को लेकर जारी किए गए जाने वाले सार्वजनिक नोटिस के प्रावधानों को कोर्ट में चुनौती दी गई थी. दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में यह कहा गया कि इस तरह के सार्वजनिक नोटिस जारी करके 1 महीने का वक्त लगाने के कारण स्पेशल मैरिज एक्ट में शादी करने वालों की तकलीफ बढ़ जाएंगी. कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि खुद लॉ कमीशन ने माना है कि आपत्तियां दर्ज करवाने के लिए दिए जाने वाला एक महीने का वक्त स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत होने वाली शादियों को हतोत्साहित करता है.

    आपको बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट में यह याचिका याचिकाकर्ता रहमान की तरफ से लगाई गई है. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट में वकील उत्कर्ष सिंह से कोर्ट ने पूछा कि क्या स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत  शादी करने वाले जोड़ों को व्यवहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है?  जिस पर कोर्ट में बहस के दौरान याचिकाकर्ता द्वारा बताया गया कि व्यवहारिक दिक्कतों के आने के कारण ही याचिका कोर्ट में लगाई गई है, ताकि कोर्ट इस मामले में स्पष्ट आदेश जारी करें.

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    जानें क्या है पूरा मामला
    आपको बता दें कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत दो अलग-अलग धर्मों के लोग शादी करते हैं तो उन जोड़ों को शादी करने से पहले दोनों पक्षों की तरफ से कोई भी आपत्ति दर्ज कराने के लिए 30 दिन का समय दिया जाता है, जबकि बाकी धर्मों में शादी करने वाले जोड़ों के लिए यह नियम लागू नहीं होते हैं. कोर्ट में याचिकाकर्ता की तरफ से दलील दी गई कि जब स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कोई भी जोड़ा शादी करता है तो कोर्ट में इसको लेकर हलफनामा दाखिल किया जाता है जिसमें व्यक्तिगत तौर पर सभी जानकारियां साझा की जाती हैं. वहीं इसमें 30 दिन का वक्त यह सुनिश्चित करने के लिए दिया जाता है जिससे यह साफ हो सके कि शादी करने वाले 2 लोगों में से पहले कोई शादीशुदा तो नहीं है या मानसिक रूप से उसे कोई परेशानी तो नहीं है. इसी तरह की कोई और व्यक्तिगत परेशानी को लेकर अगर दोनों पक्षों में से किसी के भी परिवार का सदस्य आपत्ति दर्ज करना चाहे तो स्वतंत्र होता है. वहीं मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता का कहना है कि हलफनामा दाखिल करते वक्त दोनों पक्ष अपनी जानकारियां शादी से पहले कोर्ट मैरिज के दौरान देते हैं. ऐसे में 30 दिन का यह वक्त दिए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है. फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तो मांग लिया है, जिस पर अब अगली सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट 27 नवंबर को होगी.
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