इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी पूजा के लिए इस बार पास जरूरी, भक्त कर सकेंगे ऑनलाइन दर्शन
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इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी पूजा के लिए इस बार पास जरूरी, भक्त कर सकेंगे ऑनलाइन दर्शन
जन्माष्टमी के दिन इस्कॉन मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाया जाता है

कोरोना काल (Corona Virus) में इस बार बदली हुई परिस्थितियों में सिर्फ तीन से चार हजार लोग ही पूजा के दौरान मंदिर में दर्शन के लिए आ सकेंगे. हालांकि भक्तों की सुविधा के लिए इस बार पूजा का ऑनलाइन प्रसारण भी किया जाएगा जिससे घर में रहकर लोग जन्माष्टमी (Krishna Janmashtmi) के मौके पर आयोजित पूजा को लाइव देख सकेंगे

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  • Last Updated: August 11, 2020, 8:41 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना महामारी और सरकार की गाइडलाइन को देखते हुए दिल्ली के इस्कॉन मंदिर ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव को लेकर पूजा विधि में कई बदलाव किए हैं. इस्कॉन मंदिर में इस बार पूजा के लिए प्रबंधन की ओर से पास जारी किया गया है. इसलिए इस बार पूजा के लिए पास धारकों को ही मंदिर में आने की इजाजत होगी.

इस्कॉन मंदिर के प्रबंधन से जुड़े व्रजेंद्र नंदन दास का कहना है कि प्रत्येक वर्ष इस्कॉन टेंपल में पांच से छह लाख लोग श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर पूजा करने आते थे. लेकिन इस बार बदली हुई परिस्थितियों में सिर्फ तीन से चार हजार लोग ही पूजा के दौरान मंदिर में दर्शन के लिए आ सकेंगे. हालांकि भक्तों की सुविधा के लिए इस बार पूजा का ऑनलाइन प्रसारण भी किया जाएगा जिससे घर में रहकर लोग जन्माष्टमी के मौके पर आयोजित पूजा को लाइव देख सकेंगे.

भगवान के भोग और प्रसाद में भी किया गया बदलाव



श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर पूजा का आयोजन पूर्व की ही भांति होगा. लेकिन भगवान के ऋंगार को इस बार सीमित किया गया है. इसके साथ ही इस बार भगवान के भोग में भी बदलाव किया गया है. दिल्ली इस्कॉन मंदिर के प्रबंधन से जुड़े व्रजेंद्र नंदन दास का कहना है कि इस बार भगवान को 501 तरह का भोग लगाया जाएगा. जबकि पहले 1008 तरह के भोग लगाए जाते थे. भक्तों के लिए प्रसाद में भी इस बार बदलाव किया गया है. इस बार भक्तों को सिर्फ सूखे प्रसाद बांटे जाएंगे.
दास का कहना है कि पूरे देश में इस बार पूजा की पद्धति में बदलाव किया गया है. कृष्ण नगरी वृंदावन में इस बार सिर्फ ऑनलाइन तरीके से पूजा का दर्शन किया जा सकेगा. कमोवेश यही स्थिति मुंबई और कोलकाता इस्कॉन मंदिर की भी रहेगी.
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