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Delhi Violence: उपद्रवियों से मांगी रहम की भीख फिर हो गए बेहोश, आंख खुली तो खुद को अस्‍पताल के बेड पर पाया
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News18Hindi
Updated: February 27, 2020, 9:27 AM IST
Delhi Violence: उपद्रवियों से मांगी रहम की भीख फिर हो गए बेहोश, आंख खुली तो खुद को अस्‍पताल के बेड पर पाया
दिल्‍ली के कई अस्‍पतालों में घायलों को भर्ती कराया गया है. (News 18)

Delhi Violence: हिंसा में गंभीर रूप से घायल जलालुद्दीन ने बताया कि हाथों में डंडे लिये उपद्रवी मस्जिद में घुस आए थे. उन्‍होंने रहम की भीख भी मांगी, लेकिन परिवार समेत उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई.

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  • Last Updated: February 27, 2020, 9:27 AM IST
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इरम आग़ा

नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली के उत्‍तर-पूर्वी जिले में हुई हिंसा में कई लोगों के घर उजड़ गए. भजनपुरा, मौजपुर, जाफराबाद, सीलमपुर आदि इलाकों में हिंसा से कई लोगों की मौत हो चुकी है और न जाने कितने ही लोग घायल हुए हैं. वहीं, यमुना विहार के दंगा प्रभावित इलाके से एक पीड़ित जलालुद्दीन अस्‍पताल में भर्ती है. उसके पूरे चेहरे पर चोट के निशान हैं और मुंह पर टांके लगे हुए हैं. उन्‍हें बोलने में भी मुश्किल हो रही है. इसके बावजूद उन्‍होंने बामुश्किल तीन शब्द बोले, 'वो कहां हैं (वो मतलब उनकी पत्नी और पांच बच्चे).' लोक नायक जय प्रकाश नारायण (एलएनजेपी) अस्पताल में दर्दनाक मंजर देखने को मिला. यहां जलालुद्दीन एक बिस्तर पर पड़े हुए हैं. उनके आसपास मौजूद सभी पीड़ितों से मिलने कोई न कोई आ रहा था, लेकिन वह अकेले हैं. जलालुद्दीन दर्द में रोता है और दर्द में ही सो जाता है.

नमाज अता करने मस्जिद गया था जलालुद्दीन
दरअसल, मंगलवार की रात वह भी अपने परिवार के साथ हिंसा के शिकार हुए थे, लेकिन उन्‍हें नहीं पता कि वह अस्पताल कब और कैसे पहुंचे. मंगलवार की शाम उनके लिये एक आम शाम की ही तरह थी. नमाज अता करने के लिए वह भी मस्जिद में गए थे, तभी बाहर से आवाजें आने लगीं. सभी लोग बाहर जाने लगे, लेकिन जलालुद्दीन ने अपने परिवार के साथ मस्जिद के अंदर ही रहने का निर्णय लिया. उन्‍हें लगा कि वह मस्जिद के अंदर सुरक्षित रहेंगे. अचानक कुछ अज्ञात लोग मस्जिद परिसर के अंदर आ गए. उन्होंने उन्‍हें और उनके परिवार के साथ मारपीट शुरू कर दी.



जब उपद्रवी बोले- तुम्हें आजादी चाहिए?
इसके बाद जलालुद्दीन को कुछ याद नहीं. बुधवार सुबह जब अस्पताल में उन्‍हें होश आया तो उन्‍होंने अपनी पत्नी और बच्चों के बारे में पूछा. उन्‍होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, 'मुझे नहीं पता कि मेरा परिवार कहां है और वे भी नहीं जानते होंगे कि मैं कहां हूं. सब कुछ इतनी क्रूरता के साथ हुआ कि मुझे लगा मैं नहीं बचूंगा. वहां मेरे और मेरे परिवार पर लाठियों से बेरहमी से हमला किया गया. वे लोग (उपद्रवी) मुझे गालियां दे रहे थे. मैं कुछ भी याद नहीं कर सकता, क्योंकि मेरा सिर और हाथ दर्द कर रहा है.' जलालुद्दीन ने बताया कि उपद्रवी उनसे कह रहे थे- तो तुम्हें आजादी चाहिए?'

'रहम की मांगी भीख, फिर क्या हुआ नहीं पता'
जलालुद्दीन ने बताया, 'हाथों में डंडे लिये वे लोग मुझसे बार-बार पूछ रहे थे कि क्या तुम्हें आजादी चाहिए? साथ ही वे लगातार मुझे मार रहे थे. मैंने उनसे रहम की भीख मांगते हुए कहा कि मुझे छोड़ दो. फिर मैं बेहोश हो गया. मैं नहीं जानता कि मुझे यहां (अस्‍पताल) कौन लाया है.' उनकी पत्नी और पांच बच्चों को बुधवार दोपहर तक उनके बारे में कुछ भी पता नहीं था. बाद में किसी ने उनके परिवार को सूचित किया.

लक्ष्मी नगर के एक इमाम मोहम्मद आमिर ही उन्हें अस्पताल लाए थे और उन्होंने ही जलालुद्दीन के परिवार से संपर्क कर उन्हें जानकारी दी. आमिर ने बताया, 'हमें पहले जलालुद्दीन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. हमने बड़ी मुश्किल से घंटों बाद उनके परिवार के बारे में का पता लगाया. हमें पता चला है कि वे भी सुरक्षित हैं और हमने जलालुद्दीन के बारे में भी उन्हें बता दिया है.'

जलालुद्दीन से साथ कोई भी नहीं
एक डॉक्टर ने बताया, 'अस्पताल के वार्ड में दंगा पीड़ितों के साथ कोई ना कोई आया हुआ है, लेकिन जलालुद्दीन के साथ कोई भी नहीं है. उनका परिवार कर्फ्यू और तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अस्पताल नहीं आ सकता है. वह पूरी रात दर्द में काट रहे हैं. फिलहाल उनका एक्स-रे ले लिया गया है और उनकी देखरेख के लिये एक अटेंडेंट को भी रखा गया है.'

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First published: February 27, 2020, 8:16 AM IST
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