Delhi Violence: भाई का दावा, बच्चों के लिए खाने-पीने का सामान लेने गया था फुरकान

दिल्ली हिंसा में मारा गया फुरकान

समय पर इलाज नहीं मिल पाया वरना बच सकता था फुरकान, दिल्ली हिंसा में सोमवार को सबसे पहले इस कारीगर की मौत हुई.

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नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ और समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों ने मौजपुर कर्दमपुरी निवासी फुरकान की भी जान ले ली. उनके भाई इमरान का कहना है कि फुरकान अपने बच्चों के लिए खाने-पीने का सामान लेने गया था. मौत उसे वहां खींच ले गई जहां पर हंगामा हो रहा था. तनाव की वजह से दुकानें बंद थीं वरना वो आगे नहीं बढ़ता. उसके चार साल की बच्ची और दो साल के लड़के को अब भी पता नहीं है कि उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है.

इमरान ने बताया कि उनका शोपीस बनाने और हैंडवर्क का पुस्तैनी काम है. फुरकान भी यही करता था. रविवार से ही क्षेत्र में तनाव था. एहतियातन दुकानें बंद थीं. वैसे आमतौर पर कर्दमपुरी पुलिया क्षेत्र में देर रात तक भी खाने-पीने का सामान मिल जाता है.

इमरान का दावा है कि सोमवार दोपहर बाद फुरकान अपने बच्चों के लिए खाने-पीने का सामान खरीदने निकला. लेकिन पुलिया के आसपास दुकानें बंद थीं. सामान लेने की लालच में वो आगे निकल गया. वहां पर बवाल चल रहा था.

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उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंसाग्रस्त इलाकों में पुलिस और RAF की टीमें फ्लैग मार्च निकाल रही हैं (फोटो: पीटीआई)


इमरान के मुताबिक, यहीं पर उसे गोली लग गई. गोली घुटने के ऊपर लगी और हड्डी को चीरती हुई कमर तक पहुंच गई. इसकी वजह से तेज खून बह रहा था. सात-आठ मिनट तक उसकी सहायता के लिए कोई नहीं पहुंचा. पुलिस उसे अस्पताल ले जाने लगी तो रास्ते में जाम मिल गया. इस वजह से इलाज मिलने में देर हो गई और उसके भाई को बचाया नहीं जा सका.

इमरान सवाल करते हैं कि आखिर उनके भाई का क्या दोष था. उसके बच्चों को जब पता चलेगा तो उन पर क्या गुजरेगी?

(साथ में रविशंकर सिंह)

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