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दलवाई कमेटी ने कहा, किसानों की आय जानने का अब तक कोई सही सिस्टम नहीं

डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अशोक दलवाई

डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अशोक दलवाई

किसानों से जुड़ी सबसे अहम योजना को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी 1984 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. अशोक दलवाई पर है.

    पीएम नरेंद्र मोदी की ड्रीम योजनाओं में किसानों की आय दोगुनी करना भी है. वह अक्सर इसका जिक्र करते हैं. सरकार 2022 तक इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए काम कर रही है. अब चुनावी साल आने वाला है इसलिए विपक्ष पूछ रहा है कि किसानों की आय कितनी हो गई.

    मोदी सरकार ने किसानों से जुड़ी सबसे अहम योजना का अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी 1984 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. अशोक दलवाई को दे रखी है. वह डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी के अध्यक्ष हैं. उन्हीं की सरपरस्ती में सरकार यह सपना साकार करने के लिए काम कर रही है. वह नेशनल रेनफेड एरिया अथॉरिटी के सीईओ भी हैं. hindi.news18.com संवाददाता ओम प्रकाश ने किसानों की आय के मसले पर दलवाई से विस्तार से बातचीत की.

    सवाल: कृषि परिवारों का आर्थिक स्थिति मूल्यांकन सर्वेक्षण के अनुसार प्रति कृषि परिवार औसत मासिक आय 2003 में 2115 रुपये थी, जो 2013 में 6426 रुपये हो गई. यानी दस साल में तीन गुना. फिर आप छह साल में दोगुना आय करके कौन सा बड़ा काम करने वाले हैं?

    जवाब: आप जिसकी बात कर रहे हैं वह एनएसएसओ का सैंपल सर्वे है. यह नॉमिनल इनकम है. हम जिस इनकम की बात कर रहे हैं उसके अनुसार मुद्रास्फीति तटस्थता (inflation neutralization) करके डबल करना है. हम 6 को 12 हजार नहीं बल्कि बढ़ती महंगाई के अनुपात में इससे कहीं अधिक आय बढ़ाने वाले हैं. रही बात पुराने सर्वे के आंकड़ों की तो यह सैंपल सर्वे है. किसानों की आय को मेजर करने के लिए अभी तक कोई सिस्टम नहीं है. इसे भी बनवाएंगे ताकि एक निश्चित अंतराल में किसानों की आय के बारे में सही जानकारी मिले और फिर हम उसी हिसाब से उनके लिए काम कर सकें.

    पहले सिर्फ कृषि के बारे में सोचा जाता था लेकिन पहली बार किसानों के बारे में भी सोचा गया है, ताकि वह खुशहाल हों. कितनी उपज हुई इसके साथ-साथ यह बहुत महत्वपूर्ण है कि किसान को लाभ कितना मिला.

    पीएम नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा की है उसके बाद से न सिर्फ कृषि मंत्रालय के अधिकारी किसानों की इनकम बढ़ाने को लेकर चिंतित हैं बल्कि वैज्ञानिक समुदाय भी. अब कृषि वैज्ञानिकों को भी सोचना पड़ेगा कि वह जो प्रोजेक्ट बना रहे हैं उसका किसानों की इनकम के लिए कितना फायदा होगा.

    सवाल: कमेटी बनने से अब तक दो साल में सरकार किसानों की आय कितनी बढ़ा पाई है?

    जवाब: 13 अप्रैल 2016 को कमेटी गठित हुई है. अभी तक ऐसा कोई सर्वे नहीं आया है जिससे पता चले कि किसानों की आय कितनी बढ़ी है. 2015-16 हमारा काम शुरू करने का पहला साल था. अभी दूसरा साल भी पूरा नहीं हुआ है. 2016-17 में कृषि विकास दर 4.1 फीसदी रही है. एक साल में भारत में 7 लाख ट्रैक्टर निकाले गए हैं, यह अपने आप में रिकॉर्ड है. किसी भी देश में इतने ट्रैक्टर एक साल में नहीं बिके. यह इस बात का सबूत है कि किसान खुशहाल हो रहा है.

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    सवाल: सबसे बड़ा मसला यह है कि किसानों की आय दोगुनी कैसे होगी?

    जवाब: किसानों की प्रोडक्टिविटी बढ़ जाए,  उत्पादन लागत कम हो जाए, मार्केट मिल जाए और उचित मूल्य मिले तो यह सपना साकार हो सकता है. इस दिशा में सरकार काम कर रही है. विकसित देशों की तुलना में भारत में प्रोडक्टिविटी काफी कम है. इसके लिए कमेटी को 14 खंडों में स्ट्रेटजी बनाई है. जिसके नौ खंड पब्लिक डोमेन में डाल दिए गए हैं. 14वां अध्याय आय दोगुनी करने के लिए की जाने वाली सिफारिशों का है. यह रिपोर्ट (http://agricoop.nic.in/doubling-farmers) पर डाल दी गई है ताकि किसान इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकें.

    सवाल: लेकिन दस्तावेज तो अंग्रेजी में हैं और किसान उतने पढ़े-लिखे नहीं तो कैसे उसका फायदा ले पाएंगे?

    जवाब: देश में इतनी भाषाएं हैं, किस-किस भाषा में ट्रांसलेट करते. अगर हम इस काम में लगेंगे तो दस्तावेज बनता रह जाएगा लेकिन लागू नहीं हो पाएगा, जैसा कि पहले होता था. दस्तावेज अंग्रेजी में हैं तो किसानों को किसान प्रतिनिधियों और एनजीओ के जरिए पता चलेगा कि इसमें क्या है और कैसे इसका फायदा उठा सकते हैं.

    सवाल: सरकार जो रिपोर्ट बना रही है उसे किसानों तक कैसे लागू करवा पाएगी?

    जवाब: अब तक जो कृषि आयोग बनते थे उसकी रिपोर्ट लंबे समय बाद सार्वजनिक होती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है. कैसे आय बढ़ेगी इसकी स्ट्रेटजी हम इंटरनेट पर डालते जा रहे हैं. साथ ही साथ हम उस पर अमल भी कर रहे हैं. राज्य और जिले स्तर पर मॉनिटरिंग कमेटियों का गठन हो रहा है.

    सवाल: अब तक क्या काम हुआ है, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद दिखाई दे रही है?

    जवाब: जहां-जहां पर स्वायल हेल्थ कार्ड हिसाब से खाद का इस्तेमाल हुआ है. नीम कोटेड यूरिया का इस्तेमाल हुआ है वहां-वहां पर प्रोडक्टिविटी बढ़ी है और प्रोडक्शन कॉस्ट 8-10 फीसदी कम हुई है.

    News18 Hindi63 हजार प्राइमरी एग्रीकल्चर कॉपरेटिव सोसायटियों (पैक्स) को कम्यूटराइज्ड किया जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि कृषि के नाम पर लोन गलत लोग न लें. किसानों को ही लोन मिले. इससे सही किसानों तक पैसा पहुंचेगा और उसका इस्तेमाल खेती-किसानी में ही होगा. इसका असर पड़ेगा.


    मार्केटिंग में सुधार: इसके लिए एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एंड लाइवस्टॉक मार्केटिंग एक्ट 2017 बनाया गया है. मार्केटिंग सुधार के लिए इसे लागू कर दिया गया है. इसके तहत सरकारी के साथ-साथ प्राइवेट मंडियां भी बनेंगी. इस समय छोटी-बड़ी करीब 6700 मंडियां हैं, जिन्हें 30 हजार तक पहुंचाएंगे. ससका काम शुरू हो गया है. इसी के तहत ऑनलाइन ट्रेड भी होगा. जब किसान को नजदीक में बाजार मिलेगा तभी उसे फायदा मिलेगा.

    आय बढ़ाने के लिए जो एक और काम हो रहा है, वह है कांट्रैक्ट फार्मिंग का. निजी कंपनियां बुवाई के समय ही किसानों से एग्रीमेंट कर लेंगी कि वह उत्पाद किस रेट पर लेंगी. रेट पहले ही तय हो जाएगा. ऐसे में किसान फायदा देखकर दाम बताएगा. कांट्रैक्ट करने वाली कंपनी को उसी रेट पर उत्पाद खरीदना पड़ेगा. इसके लिए कांट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट बन रहा है. इसका ड्रॉफ्ट (Model Contract Farming Act 2018) मंत्रालय की वेबसाइट पर डालकर सार्वजनिक करके किसानों की राय मांगी गई है.


    कृषि उत्पादों का रख-रखाव: इस समय देश भर में कोल्ड स्टोरेज की क्षमता 32 मिलियन टन की है. कोल्ड स्टोरेज के साथ-साथ रिफर वैन की संख्या जरूरत के हिसाब से काफी कम है. 60 हजार रिफर वैन की जगह सिर्फ 10 हजार ही हैं. रिफर वैन का मतलब कोल्ड स्टोर से सामान दूसरे जगह भेजने के लिए ट्रासंपोर्ट की. यह बढ़ेगा तब किसानों की आय बढ़ेगी.

    देखा यह गया है कि जब कृषि वैज्ञानिक कोई रिसर्च प्रोजेक्ट करते हैं तो वह बहुत अच्छा दिखता है. लेकिन जब वही काम किसान करता है तो उतना असरदार नहीं रह जाता है. इस खाई को पाटना है. इसके लिए वैज्ञानिक समुदाय काम कर रहा है.

    -किसानों के कर्ज के लिए फंड सरकार हर साल बढ़ा रही है. रिकॉर्ड 10 लाख करोड़ रुपये इसके लिए रखे गए. किसानों को 4 फीसदी की दर पर कर्ज मिल रहा है.

    इन सब योजनाओं से निश्चित तौर पर किसानों की आय बढ़ेगी.

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    सवाल: लोकसभा में पेश किए गए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के एक आंकड़े के अनुसार 1970-1971 में जोत का औसत आकार 2.28 हेक्टेयर था जो 2010-11 में 1.15 हेक्टेयर रह गया है. जब जमीन कम होती जा रही है तो आय कैसे बढ़ेगी?

    जवाब: पहले लोग ज्यादा खेती में भी कम पैदावार लेते थे. अब किसान वैज्ञानिक तकनीक से कम खेती में भी अधिक उपज ले रहे हैं. जमीन कम हो रही है तो कुछ लोग दूसरा भी काम कर रहे हैं. यह भी देखा गया है कि जिस देश में जितने कम किसान हैं वह सुखी हैं. इसलिए जमीन कम होना बड़ा मसला नहीं है. बड़ा मसला यह है कि कैसे कम खेती में भी अधिक पैदावार हो और उसका किसान को ज्यादा फायदा मिले.

    Tags: Narendra modi

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