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शाहीन बाग और जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों समेत ये लोग भेजेंगे राष्ट्रपति को पत्र, करेंगे CAA निरस्त करने की मांग
Delhi-Ncr News in Hindi

भाषा
Updated: January 17, 2020, 11:15 PM IST
शाहीन बाग और जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों समेत ये लोग भेजेंगे राष्ट्रपति को पत्र, करेंगे CAA निरस्त करने की मांग
जामिया के छात्र और शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी अब CAA निरस्त कराने को राष्ट्रपति को पत्र भेजेंगे. (फाइल फोटो)

छात्रों के तैयार किए गए संशोधित नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act) विरोधी पत्र के प्रारूप को शाहीन बाग, बाटला हाउस, नूर नगर, ओखला और आसपास के क्षेत्रों के लोगों में बांटा जा रहा है. हस्ताक्षरित पत्र व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति कार्यालय (President Office) को भेजे जाएंगे.

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नई दिल्ली. जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (Jamia Millia Islamia University) के छात्र, जामिया नगर और शाहीन बाग के लोग राष्ट्रपति को पत्र लिखकर संशोधित नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act) को निरस्त करने की मांग करेंगे. छात्रों द्वारा तैयार किए गए पत्र का एक प्रारूप शुक्रवार को शाहीन बाग, बाटला हाउस, नूर नगर, ओखला और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों में वितरित किया गया. जामिया मिल्लिया के पूर्व छात्रों के संगठन के अध्यक्ष शिफा-उल-रहमान ने कहा, ‘ये पत्र व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के कार्यालय को भेजे जाएंगे. हमें इस मामले में राष्ट्रपति को भेजने के लिए लोगों के 50,000 पोस्टकार्ड मिले हैं.’

अगले सप्ताह राष्ट्रपति के कार्यालय में भेजा जाएगा हस्ताक्षरित पत्र
रहमान ने कहा कि छात्रों और नागरिकों द्वारा अब तक 15,000 से अधिक पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिन्हें अगले सप्ताह राष्ट्रपति के कार्यालय में भेजा जाएगा. पत्र का मसौदा कहता है, ‘सीएए भारत के संविधान जो कि सभी नागरिकों को उनकी जाति, पंथ, रंग और धर्म के बावजूद न्याय और समानता सुनिश्चित करता है, के खिलाफ है.’

... इसलिए यह अधिनियम असंवैधानिक है

'अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 15 घोषित करता है कि राज्य धर्म, जाति, जाति, लिंग और बहुलता के आधार पर नागरिकों के बीच भेदभाव नहीं कर सकता. इसलिए यह अधिनियम असंवैधानिक है. इससे राष्ट्रीय बहुलवाद और एकता खतरे में पड़ जाएगी.’ सीएए पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान में धार्मिक तौर पर प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनों, पारसियों और ईसाइयों को नागरिकता देने का प्रावधान करता है.

छात्रों ने लिखा, हमारे बुजुर्गों ने देश की आजादी के लिए दिया है बलिदान
शाहीन बाग और जामिया मिलिया इस्लामिया के बाहर नए कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और निवासियों ने लिखा, हमारे बुजुर्गों ने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया है. उन्होंने दो-राष्ट्र सिद्धांत का दृढ़ता से विरोध किया और सांप्रदायिक विभाजन को छोड़कर राष्ट्रवाद और गंगा-जमुनी तहजीब को प्राथमिकता दी.’ जामिया के छात्र वसीम खान ने कहा कि, ‘हमने कुछ वरिष्ठों और अधिवक्ताओं की मदद से इस पत्र का मसौदा तैयार किया. छात्रों ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि संविधान की नींव की रक्षा के लिए और इसके मूल ढांचे को बरकरार रखने के लिए अधिनियम को निरस्त किया जाए.’ये भी पढे़ं - 

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First published: January 17, 2020, 11:07 PM IST
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