COVID 19 in India: स्टडी में हुआ खुलासा-वैक्सीन डोज लेने वाले 81 फीसदी कोरोना मरीजों ने दी मौत‌ को मात

कोरोना वैक्सीन डोज लेने वाले मरीजों की मौतों के आंकड़ों में 81 फीसदी तक कमी दर्ज होने का खुलासा किया गया है. 

COVID 19 in India: एक स्टडी सामने आई है जिसमें कोरोना वैक्सीन डोज लेने वाले मरीजों की मौतों के आंकड़ों में 81 फीसदी तक कमी दर्ज होने का खुलासा किया गया है. साथ ही कोरोना संक्रमित होने के बाद स्थिति गंभीर होने पर आईसीयू (ICU) में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भी 66 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, अस्पतालों में औसतन खर्च भी 24 फीसदी तक कम दर्ज किया गया है.

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    नई दिल्ली. देश में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और मामले रिकॉर्ड किए गए हैं. ऐसे में एक स्टडी भी सामने आई है जिसमें कोरोना वैक्सीन डोज (Corona Vaccine Dose) लेने वाले मरीजों की मौतों के आंकड़ों में 81 फीसदी तक कमी दर्ज होने का खुलासा किया गया है.

    साथ ही कोरोना संक्रमित होने के बाद स्थिति गंभीर होने पर आईसीयू (ICU) में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भी 66 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, अस्पतालों में औसतन खर्च भी 24 फीसदी तक कम दर्ज किया गया है.

    स्वास्थ्य बीमा कंपनी स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस ने कोविड-19 (COVID-19) रोगियों के बीच टीकाकरण के प्रभाव पर अपनी तरह का पहला पूर्वव्यापी अध्ययन किया. इस अध्ययन ने 45 साल और उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों के बीच टीकाकरण (Vaccination) के महत्वपूर्ण प्रभावों का खुलासा किया है.

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    टीकाकरण की दो खुराकें लेने वाले रोगियों पर सकारात्मक प्रभाव
    अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि टीकाकरण की दो खुराकें लेने वाले रोगियों के मामले में अस्पताल में भर्ती होने के कुल खर्च में लगभग 24 प्रतिशत, ठहरने की औसत अवधि (एएलओएस) में 2.1 दिन, आईसीयू की आवश्यकता में 66 प्रतिशत की कमी और रोगियों में मृत्यु दर में लगभग 81 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी आई है.

    देशभर के 3,820 अस्पताल में भर्ती 45 वर्ष के मरीजों के नमूनों पर हुई स्टडी
    यह अध्ययन कोरोना की दूसरी लहर (मार्च और अप्रैल 2021) के दौरान आयोजित किया गया था और इसमें देशभर के 3,820 अस्पताल में भर्ती ऐसे मरीजों के नमूनों पर विचार किया गया, जिनकी उम्र 45 वर्ष और उससे अधिक थी. कोहोर्ट अध्ययन से पता चला है कि असंबद्ध समूह के अस्पताल में भर्ती होने की औसत लागत 2.77 लाख रुपये थी जबकि टीकाकरण समूह ने 2.1 लाख रुपये की औसत लागत दर्ज की. लागत में यह कमी आईसीयू की जरूरत में कमी और टीकाकरण समूह के लिए अस्पताल में रहने की अवधि को 7 दिनों के औसत से कम करके औसतन 4.9 दिनों तक करने की वजह से हुई.

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    इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एस प्रकाश ने कहा कि वर्ष 2021 की शुरुआत में हमने कोविड-19 (COVID-19) के खिलाफ वैक्सीन की खोज में एक सफलता देखी, जिससे यह अब तक की सबसे तेज वैक्सीन खोज बन गई. हमारा उद्देश्य सटीक रूप से उन रोगियों में कोविड-19 टीकाकरण के प्रभाव को मापना और समझना था, जो कोविड टीके की दूसरी खुराक के 14 दिन बाद संक्रमित हुए थे. इस प्रकार यह अपने आप में एक अनूठा शोध बना.

    कोविड-19 के मद्देनजर, अब तक किए गए अधिकांश अध्ययनों ने आम जनता के बीच टीकाकरण के प्रभाव को जांचा गया है, जबकि स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के कोहोर्ट अध्ययन में कोविड-19 के निदान वाले रोगियों को विशिष्ट तौर पर शामिल किया गया. इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य न केवल चिकित्सा लाभ को समझना है, बल्कि वित्तीय प्रभाव को भी समझना है.

    डॉ. मधुमति रामकृष्णन, ज्वाइंट वाइस प्रेसिडेंट ने बताया कि अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि, जिन लोगों ने टीकाकरण लिया था, उन्हें गैर-टीकाकरण वाले लोगों की तुलना में ज्यादा फायदा था, क्योंकि हमने अस्पताल में रहने, उपचार की लागत और संक्रमण के कारण मृत्यु जैसे मापदंडों में महत्वपूर्ण फर्क दर्ज किया.

    आबादी के एक वर्ग पर किए गए अध्ययन के दौरान स्टार हेल्थ कंपनी के उन ग्राहकों का सर्वेक्षण किया गया, जिन्हें देश भर के 1,104 अस्पतालों में कोविड -19 उपचार के लिए भर्ती कराया गया था और पाया गया कि अन्य बीमारियों से ग्रसित रोगियों के मामले में भी एएलओएस, आईसीयू की आवश्यकता और लागत में कमी दर्ज की गई.

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    वैक्सीनेशन कराने वाले अन्य बीमारियों से ग्रसित रोगियों के मामले में आईसीयू की आवश्यकता 9.4 प्रतिशत से गिरकर 5 प्रतिशत हो गई, वहीं इलाज की लागत भी लगभग 15 प्रतिशत कम हो गई.

    57 फीसदी से अधिक रोगी नहीं लेना चाह रहे थे वैक्सीन डोज
    डॉ प्रकाश ने आगे कहा कि हालांकि, अध्ययन से यह भी पता चला है कि टीके की खुराक नहीं लेने वाले समूह के 57 फीसदी से अधिक रोगी डर, अज्ञानता या अधिक चिंताजनक, सामाजिक कारकों और अरुचि के कारण टीका लेने से हिचकिचा रहे थे. इस मसले पर गंभीर रूप से ध्यान देने की तत्काल आवश्यकता है और हमें उम्मीद है कि इस अध्ययन के माध्यम से हम टीके के लाभों को उजागर करने, शिक्षित करने और जनता को जल्द ही टीकाकरण के लिए प्रेरित करने में सक्षम होंगे.

    टीकाकरण अभियान के शुरुआती चरणों के दौरान आयोजित इस अध्ययन में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से लगभग 86 प्रतिशत ने टीकाकरण नहीं लिया था और इनमें से 43 प्रतिशत के पास टीका नहीं लेने का कोई वैध कारण नहीं था.

    तीसरी लहर को कम करने का एकमात्र तरीका आबादी के बीच टीकाकरण को बढ़ाना 
    स्टार हेल्थ का मानना है कि तीसरी लहर को कम करने का एकमात्र तरीका आबादी के बीच टीकाकरण को बढ़ाना है. साथ ही ग्रामीण और शहरी आबादी तक समान रूप से पहुंचने के लिए सामुदायिक जुड़ाव के माध्यम से सक्रिय कार्यक्रमों और अभियानों को आयोजित करना जरूरी है.

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