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शाहीन बाग मामला: प्रदर्शनकारियों और मध्यस्थों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा, कल फिर होगी सुलह की कोशिश
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Updated: February 19, 2020, 5:22 PM IST
शाहीन बाग मामला: प्रदर्शनकारियों और मध्यस्थों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा, कल फिर होगी सुलह की कोशिश
संजय हेगड़े ने शाहीन बाग पहुंचने के बाद मीडियाकर्मियों से कहा कि, हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार यहां आए हैं. चित्र में सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त मध्यस्थ संजय हेगड़े के साथ साधना रामचंद्रन.

शाहीन बाग (Shaheen Bagh) पहुंचे सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से नियुक्त मध्यस्थ संजय हेगड़े (Sanjay Hegde) ने कहा कि, 'हम आपकी बात सुनने आए हैं'. मध्यस्थ मीडिया के सामने बातचीत नहीं करेंगे.

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  • Last Updated: February 19, 2020, 5:22 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से नियुक्त मध्यस्थ संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन (Sanjay Hegde and Sadhana Ramachandran) टीम के अन्य लोगों के साथ बुधवार को ​दिल्ली के शाहीन बाग प्रदर्शन स्थल (Shaheen Bagh Protest Site) पर पहुंच गए. प्रदर्शनकारियों और मध्यस्थों के बीच हुई बातचीत किसी नतीजे पर नहीं निकली. मध्यस्थों ने कहा है कि वे रविवार तक बातचीत जारी रखेंगे. साधना रामचंद्रन ने कहा, "हम गुरुवार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए फिर आएंगे."

इससे पहले संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों से बातचीत की. संजय हेगड़े ने कहा कि, 'हम आपकी बात सुनने आए हैं. मध्यस्थ मीडिया के सामने बातचीत नहीं करेंगे. मध्यस्थों ने मीडिया को धरना स्थल से हटा दिया है. वार्ता के बाद मीडिया को जानकारी दे दी जाएगी. वहीं प्रदर्शनकारी, मीडिया के सामने बातचीत करना चाहते हैं. प्रदर्शनकारियों ने तीसरे मध्यस्थ वजाहत हबीबुल्लाह को बुलाने की मांग की है.

आंदोलन करना आपका हक है, लेकिन दूसरे का हक ना छीना जाए: साधना
साधना रामचंद्रन ने कहा कि, 'सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, आंदोलन करना आपका हक है, जो बरकरार है. सुप्रीम कोर्ट में कानून को चुनौती दी गई है. हम सबकी तरह और भी नागरिक हैं जिनके हक हैं, बहुत से लोग ये रोड इस्तेमाल करते हैं. दुकानदार, डॉक्टर, बच्चे स्कूल जाएं. सुप्रीम कोर्ट कहता है कि, 'आंदोलन करना आपका हक है, लेकिन दूसरे का हक़ ना छीना जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, सबका हक़ बरकरार रहना चाहिए. हमें सुप्रीम कोर्ट ने भेजा है, आपको बताने के लिए. आपके साथ मिलकर हल निकालने के लिए. हम, आप सबकी बात सुनना चाहते हैं. आपकीं हर बात सुनेंगे. अच्छी-बुरी सब बात. आप चाहते हैं कि हम आपसे बात करें. चाहते हो? जनता ने हां में जवाब दिया.'



आप को जानकारी के लिए बता दें कि दक्षिण-पूर्व दिल्ली के शाहीन बाग में 15 दिसंबर 2019 से संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ महिलाओं और बच्चों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है.





संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने शुरू की प्रदर्शनकारियों से बातचीत
संजय हेगड़े ने शाहीन बाग पहुंचने के बाद मीडियाकर्मियों से कहा कि, 'हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार यहां आए हैं. हम सभी से बात करने की उम्मीद करते हैं. हम हर किसी के सहयोग से मामले को सुलझाने की उम्मीद करते हैं.'

देश के हर राज्य में हो रहा है इस कानून का विरोध
संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण देश में शरण लेने आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के उन लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था. ऐसे सभी लोग भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. इस कानून के विरोधियों का कहना है कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिमों को ही नागरिकता देने की बात कही गई है, इसलिए यह कानून धार्मिक भेदभाव वाला है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है.



12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ लागू हो गया कानून
नॉर्थ-ईस्ट खासकर असम में नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों, आगजनी, कर्फ्यू लगने, इंटरनेट बंद होने के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस बिल पर 12 दिसंबर 2019 को हस्ताक्षर कर दिए. इसके बाद नागरिकता कानून, 1955 में संबंधित संशोधन देश भर में लागू हो गया. सरकार की अधिसूचना के अनुसार गुरुवार को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद देश भर में यह कानून लागू हो गया है.

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First published: February 19, 2020, 2:49 PM IST
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