केन्द्र सरकार दक्षिण दिल्ली में संत रविदास मंदिर के लिए जगह देने को राजी, कोर्ट में दिया प्रस्ताव
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केन्द्र सरकार दक्षिण दिल्ली में संत रविदास मंदिर के लिए जगह देने को राजी, कोर्ट में दिया प्रस्ताव
मंदिर टूटने के बाद संत रविदास के भक्तों ने इसका खासा विरोध किया था. सड़क से लेकर जंतर-मंतर तक हंगामा किया था. (फाइल फोटो)

दक्षिण दिल्ली में पहले जहां संत रविदास का मंदिर था वहां अब इसके पुनर्निमाण का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है. सुप्रीम कोर्ट इस बारे में सोमवार को फैसला सुना सकती है.

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  • Last Updated: October 18, 2019, 12:42 PM IST
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नई दिल्ली. संत गुरू रविदास भक्तों (Sant Ravidas) के लिए एक बड़ी खबर है. अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो दोबारा से संत रविदास का मंदिर उसी जगह बन सकेगा. केन्द्र सरकार (Central Government) मंदिर (Temple) के लिए जगह देने को राजी हो गई है. सरकार ने जगह देने का एक प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दाखिल कर दिया है. कोर्ट अब सोमवार को इस पर फैसला सुना सकती है.

संत गुरू रविदास भक्तों के लिए ये है राहत भरी खबर

केंद्र सरकार गुरु रविदास भक्तों को दक्षिण दिल्ली के उसी स्थान पर जगह देने के लिए सहमत है, जहां कुछ महीने पहले रविदास मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था. सरकार ने पीठ को बताया है कि यह निर्णय शांति और सद्भाव सुनिश्चित करने के लिए लिया गया था. अटॉर्नी जनरल के. के वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि साइट (जमीन) के 200 वर्ग मीटर क्षेत्र को मंदिर निर्माण के लिए भक्तों की एक समिति को सौंपा जा सकता है. कोर्ट ने केंद्र के प्रस्ताव को रिकॉर्ड में ले लिया और सोमवार को आदेश पारित करने के लिए मामले को सूचीबद्ध (लिस्टेड) किया.



कोर्ट में क्या बोले अटॉर्नी जनरल  
केन्द्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया कि उन्होंने भक्तों और सरकारी अधिकारियों सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ परामर्श किया और केंद्र सरकार ने साइट के लिए भक्तों की संवेदनशीलता और विश्वास को देखते हुए जमीन देने के लिए सहमति व्यक्त की. वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि सात याचिकाकर्ताओं में से पांच, जिन्होंने मंदिर के विध्वंस के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था, उसमें से सरकार के प्रस्ताव पर केवल दो सहमत हैं. कोर्ट का कहना है कि वो उनकी आपत्तियों को सुनने के बाद आदेश पारित करेगा.



बता दें कि मंदिर टूटने के बाद संत रविदास के भक्तों ने इसका खासा विरोध किया था. सड़क से लेकर जंतर-मंतर तक इस मुद्दे को लेकर हंगामा किया था. दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार भी मंदिर को तोड़ने के विरोध में आ गई थी. भीम आर्मी के चन्द्रशेखर ने भी दिल्ली आकर इसका विरोध किया था.

(सुशील पांडे से इनपुट)

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