COVID-19 टेस्ट फ्री करने को लेकर याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस
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COVID-19 टेस्ट फ्री करने को लेकर याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्यप्रदेश सियासी मामले में कांग्रेस की याचिका को खारिज कर दिया. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में कोरोना वायरस (Coronavirus) का टेस्ट फ्री करने को लेकर एक याचिका दाखिल की गई है. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. इस याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई होगी.

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में कोरोना वायरस (Coronavirus) का टेस्ट फ्री करने को लेकर याचिका दाखिल की गई है. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार (Central Government) को नोटिस जारी किया है. जबकि सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते इस याचिका पर सुनवाई करेगा और याचिका की प्रति सॉलिसिटर जनरल को देने को कहा है. इस याचिका में सभी अस्पतालों में कोरोना वायरस का टेस्ट और इलाज मुफ्त में करने की मांग की गई है.

निजी लैब 4500 रुपये में कर रहे हैं कोरोना वायरस का टेस्ट
वर्तमान में निजी लैब कोरोना वायरस की जांच के लिए 4500 रुपये ले रही हैं. गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के लिए यह टेस्ट कराना बहुत महंगा है. खासकर दिहाड़ी मजदूरों और रोज कमाने, खाने वाले लोगों के लिए यह बहुत महंगा है. याचिका में मांग की गई है कि कोरोना वायरस का टेस्ट फ्री में किया जाए और इसका कोई शुल्क न लिया जाए.

कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो: सुप्रीम कोर्ट



इससे पहले शुक्रवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि मास्क और सेनेटाइजर के कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. दिल्ली विश्वविद्यालय के दो छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मास्क और सेनेटाइजर के कालाबाजारी होने की बात बताई थी और लोगों को ये दोनों चीजें मुफ्त बांटने की मांग की थी. याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मुफ्त बांटने वाली मांग को ठुकरा दिया लेकिन सरकार को निर्देश दिया कि कालाबाजारी पर लगाम लगाई जाए. गौरतलब है कि सरकार ने मास्क और सेनेटाइजर का रेट तय कर दिया है. जो भी इससे महंगा बेचेगा, उस पर कार्रवाई होगी.



अनिवार्य वस्तु की श्रेणी में शामिल हैं मास्क और सेनेटाइजर
मोदी सरकार ने शुक्रवार को एन-95 मास्क सहित सभी प्रकार के मास्क और सेनेटाइजर को अनिवार्य वस्तु की श्रेणी में लाने की घोषणा की थी. यह कदम कोरोना वायरस को लेकर उठाया गया है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कहा है कि जून 2020 तक मास्क और सेनेटाइजर अनिवार्य वस्तु की श्रेणी में आने के बाद कालाबाजारी पर लगाम लगेगी.

जमाखोरी, कालाबाजारी पर होगी 7 साल की जेल
केंद्र सरकार का कहना है कि इसके पीछे मास्क और सेनेटाइजर वाजिब कीमत पर उपलब्ध कराना और जमाखोरी रोकना मुख्य मकसद है. अनिवार्य वस्तु की श्रेणी में आने के बाद कोई भी आदमी मास्क और सेनेटाइजर की जमाखोरी करता है या कालाबाजारी करता है तो पकड़े जाने पर उसको सात साल की सजा के साथ दंड भी भुगतने होंगे.

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