पत्नी की मौत से पहले दिए दो बयानों की आड़ में बच रहा था पति, SC ने सुनाई अब ये सुप्रीम सजा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दहेज हत्या के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दहेज हत्या के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान कहा कि अगर पीड़ित या पीड़िता (Victim) ने मरने से पहले दो बयान (Two Statements Before Death) दिए हों तो हर बयान का स्वतंत्र रूप से मैरिट के आधार पर मुल्यांकन किया जाना चाहिए.

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को एक अहम फैसला (Important Decision) सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान कहा कि अगर पीड़ित या पीड़िता (Victim) ने मरने से पहले दो बयान (Two Statements Before Death) दिए हों तो हर बयान का स्वतंत्र रूप से मैरिट के आधार पर मुल्यांकन किया जाना चाहिए. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह (Justice D.Y. Chandrachud and M. R. Shah) की पीठ ने गुरुवार को कहा कि किसी एक बयान के आधार पर दूसरे बयान के तथ्यों को अस्वीकार नहीं किया जा सकता. दरअसल, दहेज के खातिर कर्नाटक के नागभूषण ने अपनी पत्नी की जला कर हत्या कर दी थी. मरने से पहले पत्नी ने दो बयान दर्ज करवाए थे. पीड़िता के दिए दोनों बयानों में अंतर थे, जिस कारण निचली अदालत से पीड़िता का पति बड़ी हो गया था. लेकिन, कर्नाटक हाई कोर्ट ने कुछ ही दिनों बाद आरोपी पति को उम्र कैद की सजा सुनाई. आरोपी ने हाई कोर्ट द्वारा सुनाए इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया था. इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया है.

पीड़िता के दो बयान से पति सजा से ऐसे बच रहा था

मरने पहले पीड़िता ने पहला बयान दिया था कि आग लगने की घटना महज एक हादसा है, लेकिन पीड़िता ने अपने माता-पिता के सामने दूसरे बयान में पहले बयान से मुकर गई. पीड़िता ने दूसरे बयान में कहा था कि पति ने बच्चों को मारने की धमकी दी थी इसलिए उसने हादसा बताया था. अब जब माता-पिता आ गए हैं तो मुझे हौसला मिला है और मैं अब सच बता रहा हूं. पीड़िता ने अपने दूसरे बयान में मौत के लिए पति को जिम्मेदार ठहराया था.

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पत्नी की हत्या के आरोप में पति को उम्रकैद की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है.

निचली अदालत से आरोपी हुआ था बरी

बता दें कि कर्नाटक के नागभूषण को अब सुप्रीम कोर्ट ने से भी निराशा हाथ लगी है. हालांकि, निचली अदालत ने नागभूषण को बरी कर दिया था, लेकिन कर्नाटक हाई कोर्ट के बाद अब सूप्रीम कोर्ट ने भी नागभूषण को उम्र कैद की सजा को बरकरार रखा है.

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सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में ये कहा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने कई फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर पीड़िता मरने से पहले कई बार बयान दिए हों तो हर बयान का अलग-अलग मुल्यांकन करना चाहिए. अदालत को गुण के आधार पर हर बयान का सही अर्थ में आकलन कर खुद को संतुष्ट करना चाहिए कि उन्हें कौन सा बयान सही स्थिति को दर्शाता है.
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