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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-आखिर खराब फेज से गुजरने वाले रियल एस्टेट सेक्टर को क्या सहूलियतें दी गईं?

सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो)

Delhi News: कोर्ट ने अगली तारीख को इस सवाल का जवाब लेकर आने को प्राधिकरणों को निर्देश दिया और कहा कि संतुलन बनाया जाना चाहिए. हालांकि उसने स्पष्ट किया कि तार्किक समय के भीतर भुगतान न करने की स्थिति में दी गई राहत वापस ले ली जाएगी.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. बिल्डरों द्वारा विलंबित भुगतान पर ब्याज दर घटाकर 8 फीसदी किए जाने के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि आखिर खराब फेज से गुजर रहे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए उसने क्या सहूलियतें दी थी?

    टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों ने शीर्ष अदालत से कहा है कि बिल्डरों द्वारा विलंबित भुगतान पर 15 से 23 फीसदी की ब्याज दर को कम करके 8 फीसदी निर्धारित करने से उन्हें कुल 7500 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, इसलिए पिछले साल आठ जून का संबंधित आदेश वापस लिया जाना चाहिए.

    दोनों प्राधिकरणों की ओर से पेश अधिवक्ता रवीन्द्र कुमार ने न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि न्यायालय के उक्त फैसले से प्राधिकरण आर्थिक रूप से ‘बर्बाद’ हो जाएगा, क्योंकि इससे नोएडा प्राधिकरण को 3266 करोड़ रुपये और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को 4279 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. उनकी दलील थी कि बिल्डर खुद विलंबित भुगतान पर होमबायर्स से 20 प्रतिशत मासिक चक्रवृद्धि ब्याज मांगते हैं.

    उन्होंने दलील दी कि उक्त फैसले से बिल्डर गैर-न्यायोचित रूप से समृद्ध होंगे. उन्होंने कहा कि उक्त निर्णय सभी मसलों की समीक्षा किए बिना ही आम्रपाली केस के दौरान दे दिया गया था. कोर्ट आम्रपाली मामले में होमबायर्स और पक्षकार बनाए गए अन्य बिल्डरों के हितों के संरक्षण के लिए वह आदेश दिया था, लेकिन आदेश की प्रकृति सामान्य होने की वजह से यह सभी डेवलपर्स पर लागू होगा. कुमार ने दलील जारी रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के उक्त आदेश के बाद न केवल हाउसिंग सोसाइटियों के बिल्डर्स, बल्कि कॉमर्शियल और संस्थागत उद्देश्यों से भूमि हासिल करने वाले भी ब्याज दर में कटौती की मांग करने लगे हैं.

    बेंच ने कहा कि वह किसी एक कंपनी के बारे में चिंतित नहीं है, वह पूरे सेक्टर को लेकर चिंतित है, जो तीन साल पहले आर्थिक मंदी से बुरी तरह प्रभावित हुआ था. न्यायालय ने पूछा, “क्या प्राधिकरणों ने रियल एस्टेट सेक्टर के सहयोग के तौर पर खराब वक्त में मदद का हाथ किसी रूप में बढ़ाया था या इस सेक्टर के लिए कोई नीतिगत फैसला लिया था?”
    कोर्ट ने अगली तारीख को इस सवाल का जवाब लेकर आने को प्राधिकरणों को निर्देश दिया और कहा कि संतुलन बनाया जाना चाहिए. हालांकि उसने स्पष्ट किया कि तार्किक समय के भीतर भुगतान न करने की स्थिति में दी गई राहत वापस ले ली जाएगी.

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