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भोपाल गैस त्रासदी: 7,844 करोड़ रुपए के अतिरिक्त धन के लिये केन्द्र की अर्जी पर सुनवाई करेगा कोर्ट
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Updated: January 27, 2020, 7:46 PM IST
भोपाल गैस त्रासदी: 7,844 करोड़ रुपए के अतिरिक्त धन के लिये केन्द्र की अर्जी पर सुनवाई करेगा कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन के भोपाल स्थित संयंत्र से दो-तीन दिसंबर, 1984 को एमआईसी गैस के रिसाव के कारण हुयी त्रासदी में तीन हजार से अधिक लोग मारे गये थे और 1.02 लाख लोग इससे बुरी तरह प्रभावित हुये थे.

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  • Last Updated: January 27, 2020, 7:46 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिये अमेरिका स्थित यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन की उत्तराधिकारी फर्म, अब इसकी मालिक डाउ केमिकल्स है, से 7,844 करोड़ की अतिरिक्त राशि दिलाने के लिये केन्द्र की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करेगी. जज अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ गैस पीड़ितों के लिये मुआवजे की राशि बढ़ाने की केन्द्र की सुधारात्मक याचिका पर विचार करेगी.

संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी, न्यायमूर्ति विनीत सरन, न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट शामिल हैं. केन्द्र चाहता है कि गैस त्रासदी से पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के लिये पहले निर्धारित की गयी 47 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि के अलावा यूनियन कार्बाइड और दूसरी फर्मो को 7,844 करोड़ रूपए का अतिरिक्त धन देने का निर्देश दिया जाये.

तीन हजार से अधिक लोग मारे गये
यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन के भोपाल स्थित संयंत्र से दो-तीन दिसंबर, 1984 को एमआईसी गैस के रिसाव के कारण हुयी त्रासदी में तीन हजार से अधिक लोग मारे गये थे और 1.02 लाख लोग इससे बुरी तरह प्रभावित हुये थे. यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन ने इस त्रासदी के लिये मुआवजे के रूप में 47 करोड़ अमेरिकी डालर दिये थे.

कारखाने से नहीं हटा जहरीला कचरा
सन 2012 में सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद भी यूनियन कार्बाइड कारखाने में दफन जहरीला कचरा राज्य की सरकारें हटवाने में आज तक नाकाम रहीं. सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निष्पादन किया जाए, लेकिन कारखाने में दफन 350 टन जहरीले कचरे में से 2015 तक केवल एक टन कचरे को हटाया जा सका है. इसे हटाने का ठेका रामको इन्वायरो नामक कंपनी को दिया गया है, लेकिन कचरा अभी तक क्यों नहीं हटाया जा सका, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. इस कचरे के कारण यूनियन कार्बाइड से आसपास की 42 से ज्यादा बस्तियों का भूजल जहरीला हो चुका है. पानी पीने लायक नहीं है, लेकिन किसी को फिक्र नहीं है.

और मुआवजे की दरकारमुआवजे के मामले में कंपनी और केन्द्र सरकार के बीच हुए समझौते के बाद 705 करोड़ रुपए मिले थे. इसके बाद भोपाल गैस पीड़ित संगठनों की ओर से 2010 में एक पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी, जिसमें 7728 करोड़ मुआवजे की मांग की गई थी. इस मामले में अब तक फैसला नहीं हो पया.

गैस राहत अस्पताल खुद हुए बीमार
1989 में मप्र सरकार ने गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग का गठन किया. इसके बाद बीएचएमआरसी समेत 6 गैस राहत अस्पताल बनाए गए, लेकिन इन अस्पतालों में न डॉक्टर हैं, न संसाधन. गैस पीड़ितों के लिए बने सबसे बड़े अस्पताल बीएमएचआरसी का हाल ये है कि यहां कई विशेषज्ञ डॉक्टर नौकरी छोड़ कर निजी अस्पतालों में ऊंची तनख्वाहों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अस्पताल के गैस्ट्रो, हार्ट जैसे विभागों में तो लगभग ताले ही लग चुके हैं. भोपाल गैस पीड़ितों के लिए अस्पताल, इलाज, मुआवजे के लिए सड़क से सुप्रीमकोर्ट तक लंबी लड़ाई लड़ने वाले गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के नेता अब्दुल जब्बार की हाल ही में समय पर बीएमएचआरसी में बेहतर इलाज न मिलने के चलते मौत हो गई थी.

 

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First published: January 27, 2020, 7:42 PM IST
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