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राकेश अस्थाना की नियुक्ति के खिलाफ याचिका मंजूर, 18 मई को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली पुलिस चीफ के रूप में राकेश अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर 18 मई को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली पुलिस चीफ के रूप में राकेश अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर 18 मई को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली पुलिस के कमिश्नर राकेश अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई को तैयार हो गया ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के कमिश्नर राकेश अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है. वकील प्रशांत भूषण ने दिल्ली पुलिस के मुखिया राकेश अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की, जिसके बाद कोर्ट ने अपनी सहमति दी. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना की दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर 18 मई को सुनवाई करेगा.

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली पुलिस चीफ के रूप में राकेश अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को 18 मई, 2022 को सूचीबद्ध करने के लिए कहा. बता दें कि राकेश अस्थाना की दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्ति को गैर सरकारी संगठन ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ ने चुनौती दी है. संगठन की ओर पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा छुट्टी से पहले इस मामले पर सुनवाई की मांग की.

केंद्र ने इस मसले पर अपने हलफनामे में क्या कहा है
बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और अस्थाना से जवाब दाखिल करने को कहा था. केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि एनजीओ की याचिका कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और जाहिर तौर पर मौजूदा पुलिस आयुक्त के खिलाफ कुछ व्यक्तिगत प्रतिशोध का परिणाम है. हलफनामे में कहा गया है कि सार्वजनिक मुद्दों को उठाने का दावा करने वाले एनजीओ ने कभी भी आठ पूर्व पुलिस आयुक्तों की नियुक्ति को चुनौती देने पर विचार नहीं किया, हालांकि उन्हें उसी तरह से नियुक्त किया गया था जैसा कि अस्थाना के मामले में किया गया.

वहीं, राकेश अस्थाना ने अपने हलफनामे में कहा है कि उन्हें दिल्ली पुलिस कानून, 1978 के तहत निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन करके दिल्ली के पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (जीएनसीटीडी) नियम, 1993 का भी पालन किया गया. अस्थाना ने एनजीओ द्वारा उनके खिलाफ शीर्ष अदालत में दायर याचिकाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन याचिकाओं के बाद उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान चलाया गया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची. अस्थाना ने कहा है कि यह उनकी इस आशंका की पुष्टि करता है कि उनकी नियुक्ति के लिए ये चुनौतियां पूरी तरह से व्यक्तिगत प्रतिशोध का परिणाम थीं.

Tags: Delhi news, Rakesh asthana, Supreme Court

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