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मंदिर प्रबंधन का मामला: कोर्ट ने UP सरकार को लिया आड़े हाथ, कहा- राज्य में अराजकता की स्थिति
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News18 Uttar Pradesh
Updated: October 22, 2019, 10:06 PM IST
मंदिर प्रबंधन का मामला: कोर्ट ने UP सरकार को लिया आड़े हाथ, कहा- राज्य में अराजकता की स्थिति
SC ने मंगलवार को यूपी सरकार से राज्य में मंदिरों और धर्मार्थ संस्थाओं के प्रबंधन के बारे में कई तीखे सवाल पूछे और टिप्पणी की कि राज्य में अराजकता की स्थिति है.

पीठ ने सवाल किया कि क्या राज्य (State) में कोई भी व्यक्ति मंदिर (Temple) का निर्माण करके जनता से धन एकत्र कर सकता है. पीठ ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के बीच इस तथ्य से अवगत कराने का निर्देश दिया कि क्या वह मंदिरों और धर्मार्थ संस्थाओं के प्रबंधन से संबंधित मसलों के लिये कोई कानून बनायेगी?

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) से राज्य में मंदिरों (Temple) और धर्मार्थ संस्थाओं के प्रबंधन (Management) के बारे में कई तीखे सवाल पूछे और टिप्पणी की कि राज्य में अराजकता की स्थिति है. जज एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने उप्र के बुलंदशहर (Bulandshahr) में एक प्राचीन मंदिर के प्रबंधन से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को आड़े हाथ लिया. पीठ ने सवाल किया, ’क्या आप अपने शासकीय आदेश से कुछ भी कर सकते हैं? यह तो अराजकता है.’

पीठ ने सवाल किया कि क्या राज्य में कोई भी व्यक्ति मंदिर का निर्माण करके जनता से धन एकत्र कर सकता है. पीठ ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के बीच इस तथ्य से अवगत कराने का निर्देश दिया कि क्या वह मंदिरों और धर्मार्थ संस्थाओं के प्रबंधन से संबंधित मसलों के लिये कोई कानून बनायेगी? शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से सवाल किया कि उसने प्रदेश में मंदिरों और धर्मार्थ संस्थाओं के प्रबंधन के लिये अभी तक कोई कानून क्यों नहीं बनाया? कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि राज्य ने इस बारे में अभी तक केन्द्रीय कानून को क्यों नहीं अभिग्रहण किया?

पीठ ने पिछले सप्ताह अपनी अप्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि यद्यपि यह मामला 2010 से लंबित है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता यह बताने की स्थिति में ही नहीं थे कि क्या इस बारे में कोई कानून बनाया गया है. पीठ ने 17 अक्टूबर को अपने आदेश में कहा था, ‘इस तथ्य के मद्देनजर, हमारे पास उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव/संबंधित सचिव को व्यक्तिगत रूप से 22 अक्टूबर को उपस्थित होने का निर्देश देने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है.’



शीर्ष अदालत बुलंदशहर में करीब 300 साल पुराने इस मंदिर में श्रृद्धालुओं द्वारा दिए गये चढ़ावे को ‘पंडों’ में वितरित करने का आदेश देने संबंधी इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी.



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First published: October 22, 2019, 10:02 PM IST
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