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26/11: NSG कमांडो ने होटल के इस रास्ते से किया था आतंकियों पर सबसे पहला हमला

कमांडो फिरे चंद नागर मेजर शहीद संदीप की टीम में शामिल थे.

कमांडो फिरे चंद नागर मेजर शहीद संदीप की टीम में शामिल थे.

होटल में बैठे आतंकी (Terrorist) लगातार गोलिया चला रहे थे. अफरा-तफरी का माहौल था. अंदर कितने आतंकी हैं किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था. तभी ऐसे हालात में हरियाणा (Haryana) से नेशनल सिक्योरिटी गॉर्ड (NSG) कमांडो की टीम मुम्बई (Mumbai) पहुंच गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 26, 2019, 10:21 AM IST
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नई दिल्ली. 11 साल पहले मुम्बई के ताज होटल पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. भारतीयों सहित दर्जनों विदेशी पर्यटक होटल के अंदर फंसे हुए थे. होटल में बैठे आतंकी लगातार गोलिया चला रहे थे. अफरा-तफरी का माहौल था. अंदर कितने आतंकी हैं किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था. तभी ऐसे हालात में हरियाणा से पहुंची नेशनल सिक्योरिटी गॉर्ड (NSG) कमांडो की टीम ने छत के रास्ते होटल में उतरकर एक-एक आतंकी को ठिकाने लगाया था. उस रात के इस हमले का आंखों देखा हाल बयां कर रहे हैं एनएसजी के पूर्व कमांडो फिरे चंद नागर.

'26/11 की उस शाम मैं अपने परिवार के साथ एनएसजी परिसर मानेसर में ही था. हमले को देखते हुए समझ में आ गया था कि कभी भी कॉल आ सकती है. और हुआ भी वही. रात 9 बजे हमे मुम्बई जाने के निर्देश मिले. 10 बजे तक हम पालम एयरपोर्ट से मुम्बई के लिए रवाना हो चुके थे. मुम्बई पहुंचते ही होटल में मोर्चा ले लिया. हमारी 80 लोगों की टीम कई हिस्सों में बंट गई. मैं इस हमले में शहीद होने वाले मेजर संदीप उन्नीकृष्णन की 5 ट्रुप्स टीम में था. सबसे बड़ी परेशानी ये सामने आई कि अभी तक किसी को भी ये साफ नहीं हुआ था कि होटल में कितने आतंकी हैं और कहां-कहां छिपे हुए हैं, हमारे कितने लोग उनके कब्जे में हैं.

सुबह होने से पहले ये तय हुआ कि छत के रास्ते आतंकियों पर हमला बोला जाएगा और होटल के हर फ्लोर को खाली कराया जाएगा. एक खास रणनीति के तहत हम होटल की छत पर पहुंच चुके थे. उसके बाद हमने धीरे-धीरे सीढ़ियों के रास्ते होटल के हर एक फ्लोर पर कब्जा लेना शुरु कर दिया. छत के रास्ते हम तीन फ्लोर खाली करा चुके थे. कई कमरों में हमे होटल में ठहरे हुए लोग बंद मिले. डर के चलते उन्होंने अपने को कमरों में बंद कर लिया था.



किसी तरह से हमने उन्हें भरोसा दिलाया कि हम फोर्स के लोग हैं और आपको छुड़ाने आए हैं. तब कहीं जाकर वह कमरा खोल रहे थे. साथ के साथ हम उन लोगों को नीचे सुराक्षित पहुंचा रहे थे. इस कवायद में चौथे फ्लोर पर आते-आते हम सिर्फ 3 लोग ही बचे थे और बाकी के लोग नीचे होटल के यात्रियों को छोड़ने गए हुए थे.
होटल ताज में मुम्बई हमले को नाकाम करने वाले एनएसजी कमांडो की टीम.


लेकिन चौथे फ्लोर के हालात हमे अलग ही मिले. चौथे फ्लोर पर भी हमे एक कमरा बंद मिला. रणनीती के तहत हमने मदद के लिए आवाज़ दी तो कोई जबाव नहीं मिला. हमने उन्हें बताया भी कि हम फोर्स के लोग हैं. लेकिन जब अंदर से कोई जबाव नहीं मिला तो हम समझ गए कि अंदर आतंकी हैं. अब हमने अपनी दूसरी चाल चली. ऐसे मौकों पर हम दीवार की ओट लेकर पैर की ठोकर से दरवाजे को खोलते हैं. हालांकि इसमे भी रिस्क होता है. लेकिन हमारे लिए वहां फंसे हुए लोगों की जान ज्यादा कीमती थी.

मैंने उसी ट्रिक को अपनाकर दरवाजे में जोर से पैर मार दिया. एक ही ठोकर में दरवाजा खुल गया. लेकिन अंदर बैठा आतंकी इस हमले के लिए तैयार था. जैसे ही दरवाजा खुला उसने तुरंत फायर कर दिया जो मेरे पैर की एढ़ी में लगा और इसी के साथ दरवाजा बंद हो गया. हम 3 लोगों ने तुरंत पोजिशन ले ली. लेकिन इस दौरान तक मुझे ये महसूस नहीं हुआ कि पैर में गोली लग चुकी है. मेरे साथी ने मुझे बताया कि साहब पैर से खून बह रहा है. मुझे नीचे जाने के ऑर्डर मिले. लेकिन मैं पोजिशन को नहीं छोड़ना चाहता था. थोड़ी देर की कवायद के बाद हमने आतंकियों को मार गिराया. सुबह करीब 3 बजे मुझे अस्पताल ले जाया गया.

इस आतंकी हमले में जान की परवाह न कर सूबेदार कमांडो फिरे चंद नागर ने होटल में फंसे कई लोगों को मुक्त कराया और आतंकियों को भी मार गिराया. इस साहस को दिखाने के लिए कमांडो नागर को सेना मैडल से भी सम्मानित किया गया.

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