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मुंबई अटैक के हीरो से वादाख़िलाफ़ी! 10 साल बाद भी नहीं मिली 100 गज ज़मीन
Faridabad News in Hindi

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: November 26, 2018, 3:42 PM IST
मुंबई अटैक के हीरो से वादाख़िलाफ़ी! 10 साल बाद भी नहीं मिली 100 गज ज़मीन
फाइल फोटो- कमांडो सूबेदार फिरेचंद नागर.

सेना से रिटायर्ड एनएसजी के कमांडो फिरेचंद नागर ने मुंबई अटैक के साथ-साथ कारगिल, मालदीव में तख्तापलट की कोशिश को नाकाम करने सहित दर्जनों ऑपरेशन में हिस्सा लिया है.

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  • Last Updated: November 26, 2018, 3:42 PM IST
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सेना से रिटायर्ड एनएसजी के कमांडो फिरेचंद नागर जसाना, फरीदाबाद के रहने वाले हैं. नागर ने 26/11 के मुंबई अटैक के साथ-साथ कारगिल, मालदीव में तख्तापलट की कोशिश को नाकाम करने सहित दर्जनों ऑपरेशन में हिस्सा लिया है. नागर सेना मेडल से भी सम्मानित हो चुके हैं.

नागर की इसी बहादुरी के सम्मान में उनकी गांव जसाना की पंचायत ने एक सम्मान समारोह में उन्हें गांव में 100 गज ज़मीन देने का ऐलान किया था. इसे लेकर प्रस्ताव भी बनकर तैयार हो गया था. इस बात को अब 10 साल बीत चुके हैं, लेकिन कमांडो नागर को 100 ज़मीन तो दूर 10 गज का टुकड़ा भी नहीं मिला है.

नागर ने न्यूज18 हिन्दी से बात करते हुए बताया, 'मैंने सेना और एनएसजी में रहते हुए जितनी भी लड़ाई लड़ी, वो इस 100 गज़ ज़मीन के लिए नहीं, अपने देश की ज़मीन को दुश्मनों से बचाने के लिए लड़ी हैं. अब बात सिर्फ पंचायत में हुई घोषणा की नहीं है. बात अपमान की है.

फाइल फोटो- मुम्बई हमले को नाकाम करने वाली टीम के साथ कमांडो फिरेचंद नागर.




वह कहते हैं, 'एक सैनिक से वादा करने के बाद उसे लटका दिया गया है. ज़मीन से जुड़ा प्रस्ताव और उसके संबंध में फरीदाबाद प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के पत्र एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस में या तो घूम रहे हैं या फिर कहीं किसी कोने में धूल फांक रहे हैं. ज़िला सैनिक कल्याण बोर्ड के जरिए भी ज़मीन के संबंध में अधिकारियों से पत्राचार हो चुका है. लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई.'

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नागर कहते हैं, 'अब तो ज़मीन के मामले से जुड़े लोगों ने कन्नी काटनी शुरू कर दी है. कोई इस संबंध में बात नहीं करना चाहता है. मैं अब इस लड़ाई को इसलिए और लड़ना चाहता हूं कि मैं तो जिंदा लौट आया और इस मामले को देख सकता हूं.'

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हालांकि नागर की आवाज़ में थोड़ी मायूसी भी झलकती है, जब वह कहती हैं, 'लेकिन उनका क्या होता होगा जो जंग से लौटकर नहीं आते और उनके परिवार वाले ऐसे ही किसी हक़ के लिए यहां-वहां चक्कर काटते रहते हैं.'

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First published: November 26, 2018, 2:16 PM IST
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