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दिल्ली महिला आयोग ने निजी शेल्टर होम के खिलाफ दर्ज कराई एफआईआर

दिल्ली महिला आयोग ने निजी शेल्टर होम के खिलाफ दर्ज कराई एफआईआर

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल (फाइल)

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल (फाइल)

दिल्‍ली महिला आयोग ने दिल्ली के सरकारी और निजी शेल्‍टर होम की जांच करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था.

    दिल्ली महिला आयोग ने द्वारका स्‍थित एक निजी शेल्टर होम के स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है.  दरअसल, केजरीवाल सरकार की सलाह पर दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली में स्थित सरकारी और निजी शेल्टर होम की जांच करने और इनमें सुधार के लिए सलाह देने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी. समिति के सदस्‍यों ने गुरुवार को जब द्वारका स्‍थित एक निजी शेल्‍टर होम का दौरा किया तो वहां पर कई नाबालिग लड़कियों को रखा गया था. विशेषज्ञ समिति के सदस्यों में आयोग की प्रोमिला गुप्ता, फिरदौस खान, वंदना सिंह और ऋतु मेहरा शामिल थीं.

    समिति ने शेल्टर होम में रहने वाली अलग-अलग उम्र समूह 6-9 साल, 10-13 साल और 13-15 साल की लड़कियों से बात की और शेल्टर होम में रहने के उनके अनुभव को जानने की कोशिश की. वहां रहने वाली बड़ी उम्र की लड़कियों ने बताया कि उनको शेल्टर होम में सारे घरेलू काम करने पड़ते थे. शेल्टर होम में स्टाफ की समुचित व्यवस्था न होने की वजह से बड़ी लड़कियों को छोटी लड़कियों की देखभाल करनी पड़ती थी. बड़ी लड़कियों से बर्तन धुलवाए जाते थे. कमरे और टॉयलेट साफ करवाए जाते थे. कपड़े धुलवाए जाते थे और किचन के दूसरे काम करवाए जाते थे. शेल्टर होम में 22 लड़कियों के लिए केवल एक ही रसोइया था और बच्चियों ने बताया कि उनको दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता भी खराब होती है.

    समिति यह देख कर चकित रह गई कि छोटी-छोटी बच्चियों को बहुत कड़ी सजा दी जाती थी. बड़ी लड़कियों ने बताया कि कोई बात न मानने पर छोटी बच्चियों को बहुत गंभीर और कड़ी सजा दी जाती थी जिससे सब लड़कियां डर कर रहती थीं. लड़कियों ने बताया कि उनको अनुशासन में रखने के नाम पर शेल्टर होम वाले उनको जबर्दस्ती मिर्च खिलाते थे. यह बात बहुत ही डरावनी थी कि शेल्टर होम की महिला स्टाफ सजा के नाम पर बच्चियों के गुप्तांगों में मिर्ची डाल देती थीं. कमरे साफ न करने, स्टाफ की बात न मानने पर बच्चियों को और भी दूसरी सजाएं जैसे स्केल से पिटाई करना आदि दी जाती थीं. गर्मियों और सर्दियों की छुट्टियों में बच्चियों को घर नहीं जाने दिया जाता था.

    समिति के सदस्य यह देख कर भौचक्के रह गए और उन्होंने इस बारे में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को बताया, जो तुरंत ही रात में 8 बजे शेल्टर होम पहुंच गईं. आयोग की अध्यक्ष वहां पर स्टाफ के दुर्व्यवहार को देख कर बहुत क्रोधित हुईं. उन्होंने तुरंत द्वारका के पुलिस उपायुक्त से बात की जिन्होंने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम सादी वर्दी में (ताकि बच्चे एक अनुकूल वातावरण में रहें) वहां भेजी और उन्होंने बच्चों के बयान दर्ज किए. इस मामले में शेल्टर होम के स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

    आयोग की अध्यक्ष ने तुरंत महिला एवं बाल विकास मंत्री को मामले से अवगत कराया और निजी शेल्टर होम में व्याप्त गड़बड़ियों और उसके स्टाफ के दुर्व्यवहार के बारे में बताया. महिला एवं बाल विकास मंत्री भी शेल्टर होम की दुर्व्यवस्था पर सन्न रह गए और उन्होंने तुरंत बाल कल्याण समिति की अध्यक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को वहां जाने का आदेश दिया. उन्होंने शेल्टर होम में फैली गड़बड़ियों की जांच की. बच्चियों ने आयोग से अपील की कि उनको वहां से दूसरी जगह न भेजा जाए क्योंकि उनका स्कूल शेल्टर होम के पास में ही है. इसलिए आयोग ने बाल कल्याण समिति से आग्रह किया कि बच्चों को दूसरी जगह न भेजा जाए, बल्कि शेल्टर होम के स्टाफ को हटाया जाए और उसको ठीक किया जाए. सरकार इस मामले में जांच बिठाने पर बिचार कर रही है.
    (शंकर आनंद की रिपोर्ट)

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    Tags: Delhi, Delhi news

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