निजी उपयोग और गिफ्ट में मिले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पर न लगे GST: दिल्ली हाईकोर्ट

ऑक्‍सीजन कंसंट्रेटर को लेकर द‍िल्‍ली हाईकोर्ट का फैसला

ऑक्‍सीजन कंसंट्रेटर को लेकर द‍िल्‍ली हाईकोर्ट का फैसला

Delhi News: ऑक्‍सीजन कंसंट्रेटर को लेकर दिल्‍ली हाईकोर्ट का एक फैसला आया है ज‍िसके बाद से अब केन्‍द्र सरकार द्वारा उस पर लगाए गए 12 प्रतिशत जीएसटी नहीं देने होगा.

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नई दिल्ली. द‍िल्‍ली हाईकोर्ट का ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को लेकर बड़ा फैसला द‍िया है. हाईकोट ने कहा है क‍ि निजी उपयोग के कंसंट्रेटर पर IGST ना लगे और बाहर से उपहार में आए कंसंट्रेटर पर भी जीएसटी नहीं लगना चाह‍िए. आपको बता दें क‍ि केंद्र सरकार ने अभी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पर 12 प्रतिशत IGST लगती है.  आपको बता दें क‍ि इससे पहले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कीमतों को लेकर हाईकोर्ट चिंता जाहिर कर चुका है और केंद्र सरकार से कहा था कि वो एमआरपी तय करें, ताकि हर जरूरतमंद ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीद पाए. यहां तो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कीमत हर जगह अलग-अलग है और कीमत काफी है. ये दिक्कतें इसलिए हैं, क्योंकि एमआरपी तय नहीं है.

केन्‍द्र सरकार ने द‍िल्‍ली हाईकोर्ट में क्‍या कहा था

केंद्र सरकार के वकील ने हाईकोर्ट से कहा था क‍ि इस समय हर देश में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की किल्लत है. इस वजह से एक्सपोर्टर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कीमत तय करते हैं. ज्यादातर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बाहर से आते हैं और अगर इन ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के कीमतों को तय कर दिया जाए तो हो सकता है विदेशी कंपनियां ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हमें दें ही नहीं.

85 वर्षीय एक बुजुर्ग मह‍िला ने हाईकोर्ट में याचिका दाख‍िल कर कहा था क‍ि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जैसे जीवन रक्षक उपकरण पर सरकार 12 फीसदी जीएसटी ले रही है जो गैरकानूनी है. याच‍िका में मह‍िला का कहना था क‍ि उनके भतीजे ने अमेरिका से उनके लिए एक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेजा ताक‍ि उनकी सेहत में सुधार हो सके. यह एक उपहार था और सरकार ने इस उपहार पर भी 12 फीसदी आईजीएसटी वसूला.
हाईकोर्ट ने केन्‍द्र सरकार से क्‍या कहा था

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर की कीमत तय करने को कहा था. हाईकोर्ट ने कहा कि कीमत ऐसी रहे जिससे लोग खरीद सकें इसलिए इस पर एमआरपी तय होनी चाहिए. सरकार के तरफ से कहा गया कि वो कोर्ट को इस मामले में अवगत कराएंगे. साथ ही कोर्ट के सामने चिंता जाहिर की ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर की काफी कमी है. लिहाजा, इसकी कीमत तय करना एक्सपोर्टर पर निर्भर करता है. अगर एमआरपी तय कर दी जाती है तो शायद वो ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर सप्पलाई ही न करे. हाईकोर्ट ने कहा कि कोई फार्मूला तैयार करिए, जिससे ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर इतनी ज्यादा कीमत पर न बिके.

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