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Delhi Riots Case: कोर्ट की फटकार का असर, दिल्ली दंगों की जांच के लिए पुलिस ने उठाया ये कदम

दिल्‍ली पुलिस ने शख्‍स को उसके घरवालों के हवाले कर दिया है.

दिल्‍ली पुलिस ने शख्‍स को उसके घरवालों के हवाले कर दिया है.

Delhi Riots: सबसे अधिक 92 मामले भजनपुरा पुलिस थाने की टीम को सौंपे गए हैं, जिसकी कमान दो इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के पास है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के मामलों में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के खिलाफ अदालतों की कड़ी टिप्पणियों के बाद, अभियोजन एजेंसी ने लंबित जांच की समीक्षा करने और रिकॉर्ड पर अधिक वैज्ञानिक साक्ष्य लाने के लिए अधिकारियों का मार्गदर्शन करने के लिए विशेष टीमें (Special Teams) गठित की हैं.

    इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 सितंबर को डीसीपी (पूर्वोत्तर) द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार, पुलिस ने 10 टीमें बनाई हैं जोकि रिकॉर्ड पर उपलब्ध वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य का विश्लेषण करने और आईओ को रिकॉर्ड पर अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य लाने के लिए मार्गदर्शन करने पर विशेष जोर देगी. इसके बाद यह जानकारी दंगा प्रकोष्ठ को भेजी जाएगी. यह पहल 24 सितंबर तक पूरी हो जाएगी और टीम प्रभारी को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि यह पहल परिणाम उन्मुख तरीके से आयोजित की गई हो और इसे निर्धारित समय के भीतर पूरा किया गया है.

    एसीपी या इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में छह टीमों का पहला बैच समीक्षा संबंधी कार्यों में शामिल होगा. संबंधित अपर डीसीपी उनके सुपरवाइजरी ऑफिसर होंगे. सबसे अधिक 92 मामले  भजनपुरा पुलिस थाने की टीम को सौंपे गए हैं, जिसकी कमान दो इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के पास है. इस टीम में, सदस्यों को लंबित दंगा मामलों की केस फाइलों की समीक्षा करनी होगी और रिकॉर्ड पर दस्तावेजों की जांच करके यह सुनिश्चित करना होगा कि ये उचित हैं या नहीं.

    नोटिस में कहा गया है कि पर्यवेक्षी अधिकारी प्रोफार्मा पर अपनी विशिष्ट टिप्पणियां करेंगे और इस तरह के प्रोफार्मा को दैनिक आधार पर आगे के संकलन के लिए दंगा प्रकोष्ठ/एनईडी को प्रस्तुत किया जाएगा. टीमों को समीक्षा किए गए मामलों के संबंध में हर दिन शाम 7 बजे अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी. इस बीच, एसीपी सीलमपुर को पर्यवेक्षी अधिकारी के रूप में काम सौंपा जाएगा.

    तकनीकी टीम में विशेष स्टाफ अधिकारी और एक निजी कंपनी की एक तकनीकी टीम शामिल है जो पुलिस को उनके सॉफ्टवेयर के साथ मदद करेगी. यह टीम उपलब्ध डंप डेटा से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के संबंध में और चेहरे की पहचान तकनीक के माध्यम से आरोपी की पहचान करने में आईओ/एसएचओ को तकनीकी सहायता प्रदान करेगी. चेहरे की पहचान संबंधी टेक्नोलॉजी दंगा प्रकोष्ठ में हाल ही में स्थापित किया गया है.

    नई दिल्ली. पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के मामलों में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के खिलाफ अदालतों की कड़ी टिप्पणियों के बाद, अभियोजन एजेंसी ने लंबित जांच की समीक्षा करने और रिकॉर्ड पर अधिक वैज्ञानिक साक्ष्य लाने के लिए अधिकारियों का मार्गदर्शन करने के लिए विशेष टीमें (Special Teams) गठित की हैं.

    इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 सितंबर को डीसीपी (पूर्वोत्तर) द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार, पुलिस ने 10 टीमें बनाई हैं जोकि रिकॉर्ड पर उपलब्ध वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य का विश्लेषण करने और आईओ को रिकॉर्ड पर अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य लाने के लिए मार्गदर्शन करने पर विशेष जोर देगी. इसके बाद यह जानकारी दंगा प्रकोष्ठ को भेजी जाएगी. यह पहल 24 सितंबर तक पूरी हो जाएगी और टीम प्रभारी को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि यह पहल परिणामोन्मुखी तरीके से आयोजित की गई हो और इसे निर्धारित समय के भीतर पूरा किया गया है.

    एसीपी या इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में छह टीमों का पहला बैच समीक्षा संबंधी कार्यों में शामिल होगा. संबंधित अपर डीसीपी उनके सुपरवाइजरी ऑफिसर होंगे. सबसे अधिक 92 मामले  भजनपुरा पुलिस थाने की टीम को सौंपे गए हैं, जिसकी कमान दो इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के पास है. इस टीम में, सदस्यों को लंबित दंगा मामलों की केस फाइलों की समीक्षा करनी होगी और रिकॉर्ड पर दस्तावेजों की जांच करके यह सुनिश्चित करना होगा कि ये उचित हैं या नहीं.

    नोटिस में कहा गया है कि पर्यवेक्षी अधिकारी प्रोफार्मा पर अपनी विशिष्ट टिप्पणियां करेंगे और इस तरह के प्रोफार्मा को दैनिक आधार पर आगे के संकलन के लिए दंगा प्रकोष्ठ/एनईडी को प्रस्तुत किया जाएगा. टीमों को समीक्षा किए गए मामलों के संबंध में हर दिन शाम 7 बजे अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी. इस बीच, एसीपी सीलमपुर को पर्यवेक्षी अधिकारी के रूप में काम सौंपा जाएगा.

    तकनीकी टीम में विशेष स्टाफ अधिकारी और एक निजी कंपनी की एक तकनीकी टीम शामिल है जो पुलिस को उनके सॉफ्टवेयर के साथ मदद करेगी. यह टीम उपलब्ध डंप डेटा से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के संबंध में और चेहरे की पहचान तकनीक के माध्यम से आरोपी की पहचान करने में आईओ/एसएचओ को तकनीकी सहायता प्रदान करेगी. चेहरे की पहचान संबंधी टेक्नोलॉजी दंगा प्रकोष्ठ में हाल ही में स्थापित किया गया है.

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