मजदूर बोला- 'जब दिल्ली में भी मरना है भूखे-प्यासे, तो रस्ते में मर जाएंगे; हमारे पास न मोबाइल है न पैसे'
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मजदूर बोला- 'जब दिल्ली में भी मरना है भूखे-प्यासे, तो रस्ते में मर जाएंगे; हमारे पास न मोबाइल है न पैसे'
बिहार के पूर्णिया जिले के एक मजदूर ने कहा कि, हमें सरकार द्वारा चलाई जा रही ट्रेनों के बारे में कोई सूचना नहीं है.

राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) से कुछ मजदूर भूखमरी की स्थिति में पहुंच गए हैं. मजदूरों की स्थिति बिहार (Bihar) के पूर्णिया (Purnia) जिले के एक बिहारी मजदूर ने अपने शब्दों में बयां कर दी. उसके शब्द सरकार, समाज और इंसानियत को झकझोर देंगे.

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नई दिल्ली. कोविड-19 (COVID-19) से निपटने के लिए लागू किए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) मजदूरों के लिए जानलेवा साबित होता लग रहा है. मजदूरों की स्थिति सोमवार को बिहार (Bihar) के पूर्णिया (Purnia) जिले के एक मजदूर ने अपने शब्दों में बयां कर दी. उसके शब्दों को सुनकर सरकार, समाज और इंसानियत पर सवाल खड़े हो जाएंगे.
पूर्णिया के मजदूर ने कहा कि, ‘सारी मजदूरी घर भेज दी थी. हम 2 दिन से भूखे हैं. कोई रोजगार नहीं है, पैदल घर जा रहे हैं. सोचा जब यहां भी मरना है भूखे प्यासे, तो रस्ते में मर जाएंगे भूखे प्यासे. हमारे पास न मोबाइल है न पैसे हैं, कुछ नहीं है. किसी ट्रेन के बारे में कोई जानकारी नहीं है.’


‘हम लोग पैदल गांव जा रहे हैं’
मजदूर ने आगे कहा कि, ‘दिल्ली, मैं यहां वेल्डिंग का काम करता था. यहां खाने-पीने, नहाने-धोने सब चीजों की दिक्कत हो रही थी, जिसकी वजह से हम लोग पैदल गांव जा रहे हैं. हमें सरकार द्वारा चलाई जा रही ट्रेनों के बारे में कोई सूचना नहीं है.’



दिल्‍ली का ये है हाल
दिल्ली में कोविड-19 से 73 लोगों की मौत हुई है. जबकि अब तक कोरोना वायरस के 6,923 मामले सामने आये हैं, जिनमें से 2,069 लोग स्वस्थ हो गए हैं, जबकि 91 मरीज आईसीयू में और 27 वेंटीलेटर पर हैं. यही नहीं , दिल्‍ली में कोरोना के मरीजों का इलाज 10 अस्पतालों में चल रहा है.

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