अयोध्या में फिदायीन हमले के मास्टरमाइंड को इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा ने अपनी टीम के साथ किया था ढेर
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अयोध्या में फिदायीन हमले के मास्टरमाइंड को इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा ने अपनी टीम के साथ किया था ढेर
अयोध्या में किए गए फिदायीन हमले के मास्टर माइंड को मार गिराया था इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा ने.

इलाहाबाद कोर्ट (Allahabad Court) ने पिछले साल 18 जून 2019 को सैफुल्ला को आतंकी माना. इसके बाद स्पेशल सेल के डीसीपी ने पिछले साल ही गैलेंट्री अवॉर्ड के लिए इस टीम का नाम गृह मंत्रालय भेजा था.

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  • Last Updated: August 14, 2020, 6:02 PM IST
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नई दिल्ली. असाधारण वीरता के लिए अशोक चक्र (Ashoka chakra) से सम्मानित दिल्ली पुलिस के शहीद अधिकारी मोहन चंद शर्मा (Inspector Mohan Chand Sharma) के नाम एक और गैलेंटरी पदक (Gallantry Award) हो गया है. पिछले कुछ सालों से यह मामला लंबित पड़ा था. अब केंद्रीय गृह मंत्रालय (home Ministry) ने उस पर मुहर लगाते हुए मोहन चंद शर्मा सहित उनकी टीम के नाम की घोषणा इस पुरस्कार के लिए कर दी है. मोहन चंद शर्मा के बेहद खास रहे हैं उत्तराखंड मूल के इंस्पेक्टर कैलाश सिंह बिष्ट. वे इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के साथ कई ऑपरेशन में सक्रिय रूप जुड़े रहे हैं. इंस्पेक्टर कैलाश सिंह बिष्ट को वीरता और असाधरण कार्यों के लिए अब तक चार बार गैलेंटरी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

क्या था मोहन चंद्र शर्मा और स्पेशल सेल का ऑपरेशन

यह मामला साल 2005 का है. अयोध्या (Ayodhya) में राम जन्मभूमि वाले लोकेशन पर आतंकी संगठन जैश-ए -मोहम्मद के कुछ आतंकियों ने फिदायीन हमले (Fidayeen attack) को अंजाम दिया था. उन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए साल 2008 में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने एक टीम का गठन किया था. हालांकि उस मामले की तफ्तीश में यूपी पुलिस के साथ-साथ दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की टीम भी जुटी हुई थी. अयोध्या में फिदायीन हमले की साजिश रचने में पाकिस्तानी आतंकी आसिफ उर्फ कारी उर्फ सैफुल्ला शामिल था. इस फिदायीन हमले के मुख्य आरोपी सैफुल्ला के खिलाफ गैरजमानती धारा के तहत वारंट जारी किया गया था. स्पेशल सेल के मुताबिक आसिफ जैश-ए-मोहम्मद के डिवीजन कमांडर के तौर पर जम्मू-कश्मीर में काम कर रहा था और वह दिल्ली में बड़ी वारदात को अंजाम देने की कोशिश में जुटा हुआ था.



अयोध्या में फिदायीन हमले के मास्टर माइंड का एनकाउंटर
इस विशेष ऑपरेशन के लिए बनाई गई टीम में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के साथ इंस्पेक्टर कैलाश बिष्ट, इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार , इंस्पेक्टर देवेन्द्र सिंह, एएसआई निसार अहमद शेख और एएसआई परवेश राठी शामिल थे. इन सबने बहुत ही हिम्मत और समझदारी से सफलतापूर्वक ऑपरेशन को अंजाम दिया था. इस टीम ने यूपी में सैफुल्ला और उसके कई आतंकी साथियों को मार गिराया था. स्पेशल सेल की टीम ने इस एनकाउंटर के बाद आतंकियों के पास से 63 लाख रुपये की नगदी, 5 किलोग्राग RDX, 12 हैंड ग्रेनेड, 10 इलेक्टॉनिक डेटोनेटर, 8 मोबाइल फोन, कई चाईनीज हथियार, एक सैटेलाइट फोन, जम्मू-कश्मीर के नाम से फर्जी पहचान पत्र और तीन गुप्त मैट्रिक्‍स कोड भी बरामद किए थे, जो जैश के कोड वर्ड थे.

इतने सालों के बाद ये पुरस्कार क्यों

पिछले कई सालों से यह मामला कोर्ट में लंबित पड़ा था. इस मामले पर कोर्ट की सुनवाई का इंतजार किया जा रहा था. सैफुल्ला सहित अन्य आरोपियों को इलाहाबाद कोर्ट ने पिछले साल 18 जून 2019 को आरोपी माना. जिसके बाद ये प्रमाणित हो गया कि वह एनकाउंटर भी सही था और वे सब आतंकी भी थे. कोर्ट की मुहर लगने के बाद स्पेशल सेल के डीसीपी प्रमोद कुशवाहा ने पिछले साल ही पुरस्कार वाली श्रेणी के लिए इस टीम का नाम पुलिस मुख्यालय के मार्फत गृह मंत्रालय भेजा था. लिहाजा उन जवानों को पुरस्कार देने का फैसला किया गया.

शहीद मोहन चंद शर्मा के नाम बना यह रिकॉर्ड

इस गैलेंटरी पदक की घोषणा होते ही शहीद मोहन चंद शर्मा का नाम देश में सबसे ज्यादा गैलेंट्री पदक पाने वाले पुलिस अधिकारियों की लिस्‍ट में सबसे ऊपर हो गया. अभी तक 9 गैलेंटरी पुरस्कार शहीद मोहन चंद शर्मा के नाम हैं, लेकिन अब एक और पदक मिलने की घोषणा के साथ ही देश में सबसे ज्यादा गैलेंटरी पदक पाने वाले हो गए. मोहन चंद शर्मा के बाद स्पेशल सेल में ही डीसीपी पद पर कार्यरत संजीव कुमार यादव का स्थान है, जिन्हें आठ बार गैलेंटरी पदक प्राप्त हो चुका है.
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