Odd-Even : CM केजरीवाल बोले- जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे लागू, सुप्रीम कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट
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Odd-Even : CM केजरीवाल बोले- जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे लागू, सुप्रीम कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट
चुनाव आयोग से अनुमति नहीं मिलने के कारण केजरीवाल का रोड शो टल गया है.

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कहा कि जरूरत पड़ी तो राष्‍ट्रीय राजधानी में फिर से Odd-Even स्‍कीम को अमल में लाया जाएगा.

  • News18India
  • Last Updated: November 13, 2019, 2:57 PM IST
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नई दिल्ली. केजरीवाल सरकार की Odd-Even स्‍कीम का मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गया है. शीर्ष अदालत ने एक जनहित याचिका पर दिल्‍ली सरकार से रिपोर्ट तलब की है. दूसरी ओर दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कहा कि जरूरत पड़ी तो राष्‍ट्रीय राजधानी में फिर से Odd-Even स्‍कीम को अमल में लाया जाएगा.

अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि पराली जलाने की वजह से दिल्ली में 10 अक्टूबर से प्रदूषण का स्तर बढ़  गया. हालांकि,पंजाब और हरियाणा में हुई बारिश की वजह से फिलहाल धुआं कम हुआ है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश को नहीं माना जा रहा है. केजरीवाल ने कहा कि वो बीते दिनों एक्सपर्ट से मिले हैं. पराली से CNG बनाया जा सकता है. करनाल में एक प्रोजेक्ट का फाउंडेशन रखा गया है. इस दौरान उन्होंने पंजाब और हरियाणा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि दोनों सरकारें इसे प्रमोट नहीं करना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि पराली से जितनी CNG वहां से निकलेगी, उसे दिल्ली सरकार खरीदेगी. दिल्ली के सीएम ने कहा कि पंजाब में कई लोगों से वो मिले हैं. पंजाब में कुछ ऐसी फैक्ट्रियां लगाई गई हैं, जो पराली से कोयला बना रही हैं. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इसको क्यों प्रमोट नहीं कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट में PIL
वहीं, दिल्‍ली में Odd-Even स्‍कीम लागू करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है. वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता संजीव कुमार ने इस बाबत शीर्ष अदालत में जनहित याचिका दायर की है. अर्जी में केजरीवाल सरकार की इस योजना के तहत वाहनों को गैरकानूनी तरीके से वर्गीकृत करने का आरोप लगाया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर दिल्‍ली सरकार से प्रदूषण के स्‍तर के आंकड़ों के साथ रिपोर्ट तलब की है. जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी.



सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार


बता दें कि आज ही दिल्ली-एनसीआर की दमघोंटू हवा और प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कड़ी फटकार लगाई. शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही केंद्र सरकार को हाइड्रोजन आधारित फ्यूल टेक्नोलॉजी खोजने को कहा है, ताकि जानलेवा वायु प्रदूषण का स्तर और असर कम करने के लिए कोई समाधान निकाला जा सके. कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा कि जापान ने इसी टेक्नोलॉजी के जरिए प्रदूषण का स्तर कम किया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र से 3 दिसंबर तक जवाब मांगा है.

हाइड्रोजन आधारित टेक्नोलॉजी
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को कम करने में नाकाम रही सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा, 'नई दिल्ली समेत उत्तरी भारत के अन्य हिस्सों में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ चुका है कि लोगों का सांस लेना दूभर है. ऐसे में केंद्र सरकार देखे कि क्या पेट्रोल के बजाय हाइड्रोजन आधारित फ्यूल टेक्नोलॉजी एक समाधान के रूप में कारगर साबित हो सकती है.'

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First published: November 13, 2019, 2:17 PM IST
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