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दिल्ली में हो गई भूमि की कमी, DDA ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को लिखा पत्र, की यह मांग

दिल्ली के नागरिकों की बुनियादी विकास संबंधी जरूरतों के लिए छोटे टुकड़ों में उपलब्ध अन्य खाली भूमि आवश्यक हैं. (सांकेतिक फोटो)

दिल्ली के नागरिकों की बुनियादी विकास संबंधी जरूरतों के लिए छोटे टुकड़ों में उपलब्ध अन्य खाली भूमि आवश्यक हैं. (सांकेतिक फोटो)

Delhi News: डीडीए द्वारा मंत्रालय को लिखे गए पत्र में कहा गया 'यह प्रस्तावित है कि मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के पैरा 2.3 (पांच) में सामान्य तौर पर दिल्ली के लिए ढील दी जा सकती है और पड़ोसी राज्यों में प्रतिपूरक वनीकरण की अनुमति दी जा सकती है.' वन संरक्षण अधिनियम के तहत जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रयोक्ता एजेंसी की कीमत पर प्रतिपूरक वनीकरण उपयुक्त गैर-वन भूमि पर किया जाना है, जो उपयोग परिवर्तन के लिए प्रस्तावित भूमि के क्षेत्र के बराबर है.

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नई दिल्ली. दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखकर राष्ट्रीय राजधानी में भूमि की कमी के मद्देनजर पड़ोसी राज्यों में शुरू की गई सभी परियोजनाओं के लिए प्रतिपूरक वनीकरण (सीए) की अनुमति देने का अनुरोध किया है. भूमि-स्वामित्व वाली एजेंसी ने कहा कि मंत्रालय को कम से कम वन संरक्षण अधिनियम के तहत जारी दिशा-निर्देशों में ढील देनी चाहिए, ताकि पड़ोसी राज्यों में निम्नीकृत वन भूमि पर केंद्र और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा कार्यान्वित परियोजनाओं के लिए प्रतिपूरक वनीकरण की अनुमति दी जा सके.

मंत्रालय को लिखे अपने पत्र में डीडीए ने वन संरक्षण अधिनियम की पुस्तिका के अध्याय 2 के पैराग्राफ 2.3 (पांच) का हवाला दिया. इस पैराग्राफ के मुताबिक, असाधारण मामलों में जहां गैर-वन भूमि/निम्नीकृत वन भूमि जैसा भी मामला हो, विशेष प्रावधान हैं. इसमें कहा गया है, ‘‘यदि उस राज्य-केंद्र शासित प्रदेश में प्रतिपूरक वनीकरण उपलब्ध नहीं कराया जाता, जहां कि वन भूमि के उपयोग में बदलाव प्रस्तावित है, तो प्रतिपूरक वनीकरण के लिए किसी अन्य राज्य-केंद्रशासित प्रदेश की भूमि की पहचान की जा सकती है, हो सके तो पड़ोसी राज्य / केंद्रशासित प्रदेश में ही भूमि की पहचान की जाए.’’

परिवर्तन के लिए प्रस्तावित भूमि के क्षेत्र के बराबर है
डीडीए द्वारा मंत्रालय को लिखे गए पत्र में कहा गया ‘यह प्रस्तावित है कि मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के पैरा 2.3 (पांच) में सामान्य तौर पर दिल्ली के लिए ढील दी जा सकती है और पड़ोसी राज्यों में प्रतिपूरक वनीकरण की अनुमति दी जा सकती है.’ वन संरक्षण अधिनियम के तहत जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रयोक्ता एजेंसी की कीमत पर प्रतिपूरक वनीकरण उपयुक्त गैर-वन भूमि पर किया जाना है, जो उपयोग परिवर्तन के लिए प्रस्तावित भूमि के क्षेत्र के बराबर है.

हरित पट्टी और जंगलों का रखरखाव किया जाता है
केंद्र या सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा कार्यान्वित परियोजनाओं के मामले में, निम्नीकृत भूमि पर प्रतिपूरक वनीकरण किया जा सकता है, लेकिन इस स्थिति में उपयोग परिवर्तन के लिए प्रस्तावित भूमि के दोगुने के बराबर वनीकरण करना होगा. डीडीए ने कहा ‘मंत्रालय पड़ोसी राज्यों दिल्ली में वन भूमि पर केंद्र सरकार/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा कार्यान्वित परियोजना के लिए सीए की अनुमति देने पर विचार कर सकता है.’ डीडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दिल्ली के मास्टर प्लान के तहत मनोरंजन के लिए अधिग्रहित भूमि उपयोग के लिए 15 प्रतिशत क्षेत्र को अलग रखने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत सभी पार्क, हरित पट्टी और जंगलों का रखरखाव किया जाता है.

भूमि की आवश्यकता को पूरा करना बहुत मुश्किल हो रहा है
उन्होंने वन सर्वेक्षण देहरादून द्वारा प्रकाशित नवीनतम वन रिपोर्ट के हवाले से कहा ‘मनोरंजक हरित उपयोग के लिए पहचाने गए 15 प्रतिशत क्षेत्र के मुकाबले, राजधानी में कुल वन और वृक्षों का आवरण अब 23 प्रतिशत से अधिक है.” डीडीए के पत्र में कहा गया है, ‘मास्टर प्लान के तहत चिन्हित किए गए अधिकांश मनोरंजक हरित क्षेत्र पहले से ही वृक्षों से भरे पड़े हैं. दिल्ली के नागरिकों की बुनियादी विकास संबंधी जरूरतों के लिए छोटे टुकड़ों में उपलब्ध अन्य खाली भूमि आवश्यक हैं.’ पत्र में यह भी कहा गया कि दिल्ली में 1990 के बाद से कोई भूमि अधिग्रहण नहीं हुआ है. डीडीए को अब मास्टर प्लान के तहत चिह्नित किए गए हरित क्षेत्रों में से प्रतिपूरक वनरोपण के लिए भूमि की आवश्यकता को पूरा करना बहुत मुश्किल हो रहा है.

Tags: DDA, Delhi news, Delhi news updates

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