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Coronavirus को हराने में जुटे डॉक्‍टर बोले- ऑनलाइन हूं तो मां को पता चलता है कि मैं ठीक हूं
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News18Hindi
Updated: April 7, 2020, 8:52 AM IST
Coronavirus को हराने में जुटे डॉक्‍टर बोले- ऑनलाइन हूं तो मां को पता चलता है कि मैं ठीक हूं
ये हैं हमारे डॉक्टर्स जो रात दिन बिना खुद की या फिर परिवार की चिंता किए अपनी सेवाएं लगातार दे रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Fight Against COVID-19: कोरोना वायरस के संक्रमण को हराने में जुटे दिल्‍ली AIIMS के डॉक्टर्स के परिवार वाले चिंतित हैं. वे दिन-रात उनकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं.

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नई दिल्ली. ये सफेद कोट पहने योद्धा हैं, ये युद्ध के मैदान में पहली पंक्ति में खड़े हैं, लड़ाई है एक ऐसे वायरस से जो दिखता भी नहीं है लेकिन इतना घातक है कि विश्वभर में हजारों लोगों की जान ले चुका है. करोड़ाें लोगों को या तो चार दीवारों में कैद कर दिया है या फिर अस्पताल के बिस्तर पर लिटा दिया है. लेकिन 'सफेद कोट' वाले हमारे ये योद्धा न चारदीवारों में कैद हैं, न ही इस जंग से हारे हैं. ये हैं हमारे डॉक्टर्स जो रात दिन बिना खुद की या फिर परिवार की चिंता किए अपनी सेवाएं लगातार दे रहे हैं. बात की जाए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान दिल्ली (AIIMS) की तो यहां के डॉक्टर्स दिन-रात कोरोना (Corona) के मरीजों को ठीक करने में लगे हैं. इन डॉक्‍टरों के परिवार वाले चिंतित और उनकी सलामती के लिए दिन-रात प्रार्थना कर रहे हैं. कुछ के परिवार कई मीलों दूर हैं और अपनों की चिंता उन्हें हर दिन परेशान करती है. ऐसे में इनका सहारा बना है सोशल मीडिया जो इन्हें अपने परिवार को खुद के ठीक होने की जानकारी पहुंचाता है.

'ऑनलाइन हूं तो मां को पता चलता है कि मैं ठीक हूं'
एम्स में कार्यरत डॉ अंबिका सिंह जो की गैरिएट्रिक्स मेडिसिन की स्पेशलिस्ट हैं, इन दिनों कोविड 19 पेशेंट केयर में पोस्टेड हैं. अंबिका कहती हैं कि हर दिन एक चैलेंज बन कर सामने खड़ा होता है. हर दिन मरीजों की संख्या बढ़ रही है. अपने घर से दूर मैं यहां पर हूं क्योंकि लोगों की जान बचाना एक डॉक्टर के नाते मेरी जिम्मेदारी है. हम भी भावनात्मक तौर पर एक बुरे दौर से गुजरते है. ऐसे में हमारे मित्र और साथियों का भरोसा हमें सहारा देता है. साथ ही परिवार का साथ एक नई उर्जा देता है. अंबिका ने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि मैं अपने परिजन का फोन नहीं उठा पाती हूं. ऐसे में मेरी मां हर समय मेरे वॉट्सएप को देखती रहती हैं यदि मैं उन्हें ऑनलाइन दिखती हूं तो वो निश्चिंत हो जाती हैं कि मैं ठीक हूं. यह बताते हुए अंबिका की आंखों में आंसू छलक आए कि उन्हें मैं बस यही दिलासा देती हूं कि मुझे कुछ नहीं होगा.

ऐसा लगता है जैसे हम सोल्जर हों



वहीं डॉ अनदीप सिंह कहते हैं कि आईसीयू के अंदर ऐसा लगता है जैसे हम एक सोल्जर हों. बस मैं हर दिन यही प्रार्थना कर रहा हूं कि ये आपदा जल्द से जल्द निपटे. मेरा घर चंडीगढ़ में है और मैं वहां नहीं जा सकता हूं. जब ड्यूटी पर होता हूं तो फोन पर बात नहीं कर पाता हूं, ऐसे में मेरी मां एक छोटा सा वॉयस नोट मैसेज मेरे को भेज देती हैं और ये सुन कर बस मैं रो पड़ता हूं.



शादी होते ही कोविड-19 यूनिट में पोस्टिंग
डॉ राजीव रंजन जो कि एम्स में आरडीए जनरल सेक्रेटरी रह चुके हैं और फिलहाल वे लेबोरेट्री मेडिसिन के स्पेशलिस्ट हैं, उनकी भी पोस्टिंग कोविड 19 यूनिट में हुई है. राजीव की हाल ही में शादी हुई है. राजीव अब इंफेक्‍शन के खतरे के चलते अपनी पत्नी से अलग रह रहे हैं. वे बताते हैं कि मेरे को यूनिट जॉइन करने में कोई परेशानी नहीं थी. हम अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और ये भी जानते हैं कि मरीज के लिए हर सैकेंड कीमती होता है. हमें पता है कि आईसीयू में रहने से हमारी जान को भी खतरा है और इसे लेकर हमारा परिवार भी चिंतित है लेकिन ऐसा करके हम समाज के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी भी डॉक्टर हैं और वे भी लगातार लोगों की सेवा कर रही हैं. राजीव का कहना है कि इस परेशानी में केवल सोशल डिस्टेंसिंग ही है जो लोगों को बचा सकती है और मेरी अपील है कि लोग इसका पालन करें.

पत्नी के साथ करना चाहता हूं डिनर
डॉ राजीव का कहना है कि वे अपनी पत्नी के साथ एक शानदार डिनर पर जाना चाहते हैं और इन बातों को भूलना चाहते हैं. राजीव का कहना है कि सूनी सड़कों को फिर चहल पहल के साथ देखना चाहता हूं. प्रार्थना है कि ये आपदा जल्द ही खत्‍म होगी और सब कुछ पहले की तरह सामान्य होगा.

तीन महीने से नहीं गए घर
वहीं डॉ अजीत सिंह जो कि दिल्ली के ही रहने वाले हैं तीन महीने से अपने घर नहीं गए हैं. एम्स में ऑन्कोलाजिस्ट सर्जन के तौर पर तैनात सिंह का कहना है कि परिवार डरा हुआ है और हर दिन मेरे से फोन पर बात करते हैं. हम दो भाई हैं और दोनों ही डॉक्टर हैं. सिंह ने बताया कि दोनों ही कोरोना के मरीजों की देखभाल कर रहे हैं इसके चलते परिवार और भी ज्यादा परेशान होता है.

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First published: April 7, 2020, 8:33 AM IST
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