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30 से 50 सिगरेट के बराबर प्रदूषण फैलाते हैं ये तीन पटाखे!

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

शायद आपको यकीन न हो लेकिन खुद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अधिकारी इसका खुलासा कर रहे हैं. उनका कहना है कि फुलझड़ी, अनार और लड़ी सबसे ज्यादा धुंआ छोड़ते हैं.

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दिवाली के मौके पर बाजार में तीन तरह के पटाखे सबसे ज्यादा बिकते हैं. लेकिन ये भी सच है कि सबसे ज्यादा बिकने वाला ये एक पटाखा 30 से 50 सिगरेट के बराबर वायु प्रदूषण फैलाता है. शायद आपको यकीन न हो लेकिन खुद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अधिकारी इसका खुलासा कर रहे हैं. उनका कहना है कि फुलझड़ी, अनार और लड़ी सबसे ज्यादा धुंआ छोड़ते हैं.

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर दीपांकर साहा का कहना है, "फुलझड़ी और अनार सबसे ज्यादा रंग-बिरंगी और तेज रोशनी देने वाले होते हैं. इन पटाखों से अलग-अलग रंग की रोशनी के लिए अलग-अलग मैटेरियल मिलाया जाता है. रोशनी को रंग देने वाला ये मैटेरियल भी खासा खतरनाक होता है. इसी तरह से एक साथ काफी देर तक आवाज करने वाली लड़ी भी बहुत धुआं छोड़ती है. अगर हम तुलना करें तो ये तीन आइटम इतना धुआं छोड़ते हैं जितना कि 30 से 50 सिगरेट से निकलता है."

इन पटाखों से ज्यादा धुआं निकलने के बारे में साहा बताते हैं, "पटाखे बनाने में आमतौर पर एल्युमिनियम और बेरियम का इस्तेमाल होता है. इसके साथ ही पोटेशियम नाइट्रेट, जिंक, पेपर लेड, चारकोल और राख भी मिलाई जाती है. लेकिन रंग-बिरंगी आतिशबाजी के लिए अलग-अलग तरह के मैटेरियल की जरूरत होती है. जैसे हरे रंग की रोशनी के लिए बेरियम नाइट्रेट, लाल रंग के लिए सोडियम नाइट्रेट और सफेद रंग के लिए मैग्निशियम का इस्तेमाल होता है. खतरनाक बात ये है कि पटाखों का धुआं एकदम से फैल जाता है और इसे छंटने में कई दिन लग जाते हैं."

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