कूड़े के पहाड़ों को कम करने का इस निगम ने निकाला तरीका! छह माह में ही हिट हुआ ये, 7 लाख किलो का निष्पादन

लैंडफिल साइट पर पहुंचने वाले कूड़े का इलाके में ही सफल निष्पादन किया है.

लैंडफिल साइट पर पहुंचने वाले कूड़े का इलाके में ही सफल निष्पादन किया है.

एसडीएमसी ने एरोबिक कंपोस्ट प्लांट पर कुल एक लाख रुपये की राशि खर्च की है. पिछले 6 माह के भीतर इन प्लांटों से 100000 किलो जैविक खाद का तैयार की जा चुकी है जिसकी मार्केट वैल्यू करीब 25 लाख रुपए आंकी गई है. इनसे केवल जैविक खाद ही तैयार नहीं की गई है बल्कि लैंडफिल साइट पर पहुंचने वाले 700000 किलो कूड़े का भी इलाके में ही सफल निष्पादन किया है. इस कूड़े को लैंडफिल साइट पर पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्टेशन पर होने वाले करीब ₹700000 के खर्च को भी बचाने का काम किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 20, 2021, 1:01 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली में बढ़ते कचरे के पहाड़ों के बोझ को कम करने का काम नगर निगमों (Corporations) की ओर से लगातार किया जा रहा है. दिल्ली की नगर निगम कचरे के निपटान की हरसंभव कोशिश में भी जुटी हुई है. एक तरफ जहां कचरे से बिजली उत्पादन और काम किया जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की एक निगम की ओर से इस कचरे को एरोबिक कंपोस्ट प्लांट के जरिए निष्पादन करने का काम बखूबी किया जा रहा है.

दरअसल, साउथ दिल्ली नगर निगम के वार्ड नं. 5 टैगोर गार्डन एवं वार्ड नं. 9 सुभाष नगर में  5 टीडीपी क्षमता के एरोबिक कम्पोस्ट प्लांट का संचालन किया जा रहा है. इन एरोबिक कंपोस्ट प्लांट पर निगम ने कुल एक लाख रुपये की राशि इन पर खर्च की है.

लेकिन अच्छी बात यह है कि पिछले 6 माह के भीतर एसडीएमसी इन प्लांटों से 100000 किलो जैविक खाद का तैयार कर चुकी है जिसकी मार्केट वैल्यू करीब 25 लाख रुपए आंकी गई है. जैविक खाद की मार्केट वैल्यू प्रतिकिलो 25 रुपये है.

इतना ही नहीं निगम ने 25 लाख रुपए की कीमत की जैविक खाद ही तैयार नहीं की है बल्कि लैंडफिल साइट पर पहुंचने वाले 700000 किलो कूड़े का भी  इलाके में ही सफल निष्पादन किया है. वहीं, इस कूड़े को लैंडफिल साइट पर पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्टेशन पर होने वाले करीब ₹700000 के खर्च को भी बचाने का काम किया है.
एसडीएमसी की ओर से अब इन एरोबिक कंपोस्ट प्लांट से तैयार किए गए जैविक खाद को दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) के शिवाजी कॉलेज को दिया गया है. इससे पहले गत छह महीनों के दौरान में गीले कूड़े का निष्पादन करके बनाई गई एक लाख किलो जैविक खाद को दक्षिणी निगम के उद्यान विभाग, स्कूलों एवं आरडब्ल्यूए आदि को वितरित भी किया गया है.

इसी कड़ी में अब कंपोस्ट प्लांट से उत्पादित 2 मीट्रिक टन जैविक खाद को दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) के शिवाजी कॉलेज को दिया गया है. इस अवसर पर वेस्ट जोन के उपायुक्त राहुल सिंह, एवं स्वच्छ भारत मिशन के नोडल अधिकारी राजीव जैन और शिवाजी कॉलेज के प्रधानाचार्य शिव कुमार सहदेव उपस्थित रहे.

कंपोस्ट प्लांट के सफल संचालन पर स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) के नोडल अधिकारी राजीव जैन ने कहा कि यह दिल्ली का सबसे कम लागत वाला कंपोस्ट प्लांट है. यहां पर जैविक खाद को बनाने के लिए अपशिष्ट कूड़े में थोड़ी मिट्टी और पुरानी खाद को मिलाया जाता है. इस खाद को अलग-अलग मॉड्यूल जैसे ड्रम कंपोस्टर, अलग-अलग आकार के जाली बक्से में तैयार किया जाता है.



जैन ने कहा कि खाद बनाने के लिए सिर्फ तीन सप्ताह का समय लगता है. वर्तमान में पश्चिमी क्षेत्र (West Zone) के सभी 29 वार्डों में गीले एवं सूखे कूड़े का अलग-अलग पृथक्करण किया जा रहा है.

जैन ने बताया कि जैविक खाद की कीमत प्रति किलो 25 रुपए की दर से आंकी जाए तो इसकी कुल कीमत 25 लाख रुपए आती है.

उपायुक्त राहुल सिंह ने परियोजना की सराहना करते हुए बताया कि इस तरह के प्लांटों द्वारा ही लैंडफिल साइटों के बोझ को कम कर पाएंगे. उन्होंने कहा कि जैविक खाद को नागरिकों को भी फ्री वितरित की जाएगी. इससे उनको‌ सूखे और गीले कूड़े को अलग-अलग करने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा.

बताते चलें कि दिल्ली में तीन बड़ी लैंडफिल साइट गाजीपुर, भलस्वा और ओखला अपनी क्षमता से ज्यादा कूड़े की वजह से बड़े पहाड़ के रूप में तबदील हो चुकी हैं. इन कूड़े के पहाड़ों पर से उठने वाली दुर्गंध पर सुप्रीम कोर्ट भी कड़ी टिप्पणी कर चुकी है.
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