देखते ही देखते भारत के किसानों को बर्बाद कर देता है ये पाकिस्तानी दुश्मन!
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देखते ही देखते भारत के किसानों को बर्बाद कर देता है ये पाकिस्तानी दुश्मन!
एक टिड्डी अपने वजन के बराबर वनस्पति हर रोज चट कर जाती है.

टिड्डी हमले को रोकने के लिए हर साल भारत-पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच 6 बैठकें होती हैं. इस दुश्मन को खत्म करने में पाकिस्तान ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाता. भारत पर जब भी टिड्डी दल का हमला होता है वह पाकिस्तान की तरफ से होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 31, 2019, 4:46 PM IST
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नई दिल्ली. पाकिस्तान की टिड्डियां इन दिनों भारतीय किसानों के लिए मुसीबत बनी हुई हैं. ये इतनी बड़ी समस्या है कि देखते ही देखते किसान बर्बाद हो जाते हैं. उनकी फसल तबाह हो जाती है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, एक टिड्डी अपने वजन के बराबर वनस्पति हर रोज चट कर जाती है. टिड्डियों का छोटा दल भी एक दिन में 35,000 लोगों के बराबर खाना खा जाता है. आरोप है कि  इससे संबंधित अधिकारी साल भर मंत्रालय में हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं और जब हमला हो जाता है तो अचानक अति सक्रियता दिखाने लगते हैं. तब तक किसान तबाह हो चुका होता है. इस बार गुजरात और राजस्थान में टिड्डियों का 1993 जैसा बड़ा हमला हुआ है.

गुजरात के भुज, बनासकांठा, साबरकांठा, मेहसाणा, कच्छ और राजस्थान के जैसलमेर, बाडमेर, जालौर, बीकानेर, जोधपुर में किसान परेशान हैंं. जिससे हजारों एकड़ सरसों, अरंडी, सौंफ, जीरा, कपास, आलू, गेहूं और रतनजोत जैसी फसलें तबाह हो चुकी हैं. अभी अधिकारी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि आखिर नुकसान कितना बड़ा है. इस बारे में कृषि मंत्रालय के प्लांट प्रोटेक्शन सलाहकार राजेश मलिक से भी बात की, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

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राजस्थान के बाडमेर, जैसलमेर और जालोर जिले में टिड्डियों के कारण फसल बर्बाद.




इस वजह से बढ़ी किसानों की चिंता
छोटे से छोटे टिड्डी दल में भी लाखों की संख्या में टिड्डी होती हैं. ये दल एक ही दिन में फसल को साफ कर देता है. वयस्क टिड्डी झुंड एक दिन में 150 किमी तक हवा के साथ उड़ सकता हैं. बहुत छोटा झुंड भी एक दिन में लगभग 35,000 लोगों जितना खाना खाता है. इस वजह से किसान फसलों को लेकर चिंतित हैं.

दोनों राज्यों में टिड्डी नियंत्रण दल सक्रिय
कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी के ऑफिस से जानकारी दी गई कि राजस्थान और गुजरात दोनों जगह टिड्डी नियंत्रण दल सक्रिय हैं. अकेले राजस्थान में 50 टीमें काम कर रही हैं. बाडमेर में 47 हजार हेक्टेयर में छिड़काव किया गया है. जैसलमेर और जालौर भी पाकिस्तानी टिड्डियों के हमले से प्रभावित है. इन तीनों जिलों का कृषि राज्यमंत्री ने दौरा किया है. दावा किया गया है कि इस बार हमला बड़ा है, लेकिन इन्हें इन तीन जिलों से आगे नहीं बढ़ने दिया गया है.

चौधरी ने न्यूज18 हिंदी से बातचीत में दावा किया कि तीन-चार दिन में इस समस्या पर पूरी तरह से काबू पा लिया जाएगा. जिस तरह से गुजरात सरकार ने सहयोग किया है वैसी राजस्थान सरकार करती तो किसानों का इतना नुकसान नहीं होता.

टिड्डियों को पनपने के लिए अनुकूल है रेतीला क्षेत्र

>>रेगिस्तानी क्षेत्र टिड्डियों के पनपने के लिए अनुकूल होता है. एक मादा 108 अंडे देती है और ये बढ़ती चली जाती हैं. राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में 2,05,785 वर्ग किमी क्षेत्र रेगिस्तान है.

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कहां-कहां हुआ टिड्डियों का हमला.


गोला-बारूद नहीं, ये है इसका इलाज
भारत में घुसपैठ करने वाला ये पाकिस्तानी दुश्मन कद-काठी में बहुत छोटा होता है, लेकिन उसका खतरा बड़ा है. ये दुश्मन एक साथ लाखों की संख्या में हमला करता है. इसे गोला-बारूद से नहीं बल्कि कीटनाशक से खत्म किया जा रहा है.

पाकिस्तान नहीं दिखाता दिलचस्पी
टिड्डी हमले को रोकने के लिए हर साल भारत-पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच 6 बैठकें होती हैं. ताकि टिड्डी की स्थिति से संबंधित सूचना का आदान-प्रदान किया जा सके. इस दुश्मन को खत्म करने में पाकिस्तान ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाता. भारत पर जब भी टिड्डी दल का हमला होता है वह पाकिस्तान की तरफ से होता है.

Chief minister Ashok Gehlot, tiddi
छोटे से छोटे टिड्डी दल में भी लाखों की संख्या में टिड्डी होती हैं.


इन राज्यों में इसलिए होता है खतरा
राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में रेगिस्तान है. टिड्डी प्रजनन का मौसम जून-जुलाई से अक्टूबर-नवंबर तक होता है. रेगिस्तान इसके लिए मुफीद है. टिड्डियों का दल आमतौर पर हवा की दिशा में उड़ता है. पाकिस्तान से होकर भारत के रेतीले क्षेत्रों में प्रवेश कर जाता है.

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