आम की दशहरी-चौसा, लंगड़ा ही नहीं ज्यादातर किस्म हो गई हैं बेस्वाद, जानिए वजह

आम उगाने वाले किसान और उसके जानकार भी मान रहे हैं कि आम के स्वाद में फर्क आ गया है.

आम (Mango) की मिठास कम हो गई है या अजीब सी हो गई है. इसे लेकर आम खाने वाले ग्राहक से ज्यादा उसे उगाने वाले किसान (Farmer) परेशान हैं.

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नई दिल्ली. क्या आम और क्या खास, शायद ही कोई ऐसा होगा जो फलों के राजा आम का दीवाना न हो. कहा जाता है कि अकेला आम एक ऐसा फल है, जिसकी हर एक वैराइटी को खाने का अपना अलग तरीका है. मुगल (Mugal) बादशाह बाबर (Babar) के सामने उसके एक सरदार ने अरबी मुसाफिर इब्न बतूता के हवाले से आम की तारीफ कुछ इस तरह से बयां की थी- 'हिन्दुस्तान (Hindustan) में एक फल अम्बा होता है. देखने में पहले यह हरा होता है, लेकिन पकने के बाद पीला दिखाई देता है. कुछ लोग इसे चाकू से काटकर खाते हैं तो बहुत सारे लोग इसे हाथ की हथेलियों से पिलपिला कर चूसते हैं.' लेकिन आम की दशहरी-चौसा, लंगड़ा ही नहीं ज्यादातर किस्मों का स्वाद बेस्वाद हो गया है. आम की मिठास कम हो गई है या अजीब सी हो गई है. इसे लेकर आम खाने वाले ग्राहक से ज्यादा उसे उगाने वाले किसान (Farmer) परेशान हैं.

गर्मियों के इस मौसम में अगर किसी की जुबान पर मलिहाबाद का नाम आता है तो उसकी सिर्फ एक ही वजह आम है. इन दिनों मलिहाबाद के आम उगाने वाले किसान भी खासे परेशान हैं. वजह है आम के स्वाद में आया फर्क. मलिहाबाद के किसान इस्लाम अली का कहना है, 'पहले हम आम को तमाम तरह की बीमारियों से बचाने के लिए पूरी फसल के दौरान तीन बार दवाई का स्प्रे करते थे, लेकिन अब उसी दवाई का 7 से 8 बार तक स्प्रे करना पड़ता है. अब तीन-चार बार स्प्रे करने से दवाई का असर नहीं दिखाई देता है. इसीलिए आम के स्वाद में फर्क आ गया है. एक वजह इस बार की बेमौसम बारिश भी है. हमने कृषि मंत्रालय में भी नकली और मिलावटी दवाई के बारे में शिकायत की है, लेकिन अभी तक इसे रोकने के लिए कोई काम नहीं हुआ है.'

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आंधी न चलने से खूब आ रहा है आम
अलीगढ़ के अतरौली कस्बे में आम का पैदावार करने वाले रिंकू चौधरी बताते हैं, 'बीते साल कोरोना-लॉकडाउन के चलते आम की सप्‍लाई नहीं हो पाई थी. जितना मौका मिला था, उस वक्त में लोकल मंडी में ही आम खपाया गया था. इस बार वक्त रहते लॉकडाउन में छूट मिल गई. आंधी और तेज हवाएं भी नहीं चलीं, जिससे पकने से पहले ही आम पेड़ से टूटकर नहीं गिरा. इसी वजह से खूब पैदावार हो रही है.'




केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (रहमानखेड़ा, लखनऊ) के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन का इस बारे में कहना है कि आम की फसल खासतौर से दशहरी को सूखी जगह और गर्म मौसम चाहिए. लेकिन इस बार मार्च महीने में भी खूब बारिश हुई और ऐसा नहीं है कि आम के स्वाद में यह फर्क एकदम से आया है. पर्यावरण में आ रहे बदलाव के साथ यह असर हर साल देखने को मिल रहा है.

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