कोरोना का खौफः नोएडा के श्मशान घाटों पर शवों के अंतिम संस्कार के बाद सामने आई बड़ी परेशानी

नोएडा समेत कई श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के बाद लोग अस्थियां लेने नहीं आ रहे हैं. Demo Pic.

नोएडा समेत कई श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के बाद लोग अस्थियां लेने नहीं आ रहे हैं. Demo Pic.

नोएडा के सेक्टर 94 स्थित श्मशान घाट में कोरोना से मौत के बाद शवों का अंतिम संस्कार कराना चुनौती है, लेकिन उससे भी बड़ी समस्या यहां पर जमा होने वाले अस्थियों की. कई श्मशान घाटों पर अस्थियों का ढेर लगा है, लेकिन संक्रमण के डर से उन्हें ले जाने वाले नहीं आ रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 28, 2021, 9:10 PM IST
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नोएडा. अस्पताल हो या श्मशान घाट भीड़ दोनों ही जगह है. अपनी बारी के लिए अस्पताल में भी इंतजार करना पड़ रहा है तो श्मशान घाट पर भी. कोरोना (Corona) के चलते श्मशान घाट पर आम दिनों के मुकाबले चार से पांच गुना तक शव (Dead Body) आ रहे हैं. इतने सारे शवों का अंतिम संस्कार कराना तो एक चुनौती है ही, लेकिन उससे भी बड़ी चुनौती है अस्थियों की. ज्यादातर श्मशान घाट पर अस्थियों का ढेर लग गया है.

गौरतलब रहे लोग कोरोना के डर से परिजनों की अस्थियां लेने के लिए दूसरे दिन श्मशान घाट भी नहीं आ रहे हैं. जहां अब बिल्कुल भी जगह नहीं बची है वहां धार्मिक परंपरा तोड़ते हुए कुछ लोग उसी दिन अस्थियां ले जाने को मजबूर हैं. कुछ ऐसा ही हाल नोएडा के सेक्टर-94 में स्थित श्मशान घाट का भी है.

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हर रोज हो रहे है करीब 80 से 90 अंतिम संस्कार
नोएडा के सेक्टर-94 में अंतिम निवास बना हुआ है. कोरोना के चलते बीते 10 दिन में यहां 800 से 900 शवों को अंतिम संसकार हो चुका है. अंतिम निवास में अब सिर्फ वो शव आ रहे हैं जिनकी मौत कोरोना से हुई है. जैसे तैसे यहां शवों को अंतिम संस्कार कराया जा रहा है. सीएनजी से चलने वाली दो भट्टी भी हैं. लेकिन उनकी अपनी क्षमता है. हाल ही में अंतिम निवास का संचालन करने वाली एनजीओ नोएडा लोकमंच ने एक अपील भी जारी कर कहा है कि यहां सिर्फ वो ही शव लाए जाएं जिनकी मौत कोरोना से हुई है.

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लॉकर 163 और अस्थियों का लगा है ढेर



जानकारों की मानें तो अंतिम निवास में करीब 163 लॉकर बने हुए हैं. यहां अस्थियां रखी जाती हैं. दूसरे दिन आकर परिजन अस्थियों को ले जाते हैं. लेकिन अब यह लॉकर भी भर चुके हैं. अस्थियां यहां तो खुले में रखी हैं या फिर जगह मिलने पर कमरों में रखी जा रही हैं. बहुत सारे लोग तो कोरोना से डर के चलते अपनों की अस्थियां भी लेने नहीं आ रहे हैं. ऐसे में जहां तक मुमकिन हो रहा है कमेटी वाले अस्थियों को संभालकर रख रहे हैं. उनका कहना है कि वक्त आने पर ऐसी अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करा दिया जाएगा.

धार्मिक परंपरा भी लगीं टूटने

कोरोना महामारी में मृत्यु दर बढ़ने पर श्मशान घाट में प्लेटफार्म से अस्थियां उठाने के मामले में धार्मिक परंपरा भी टूट रही हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंगलवार और शनिवार को अस्थियां नहीं उठाई जाती हैं, लेकिन श्मशान घाट में शवों के अंतिम संस्कार का लोड बढ़ने के चलते कुछ जगहों पर रोजाना अस्थियां उठवाई जा रही हैं. श्मशान घाट का संचालन करने वालों ने बताया कि जो लोग मंगलवार एवं शनिवार को अस्थियां विसर्जन नहीं करते हैं, उनकी सुविधा के लिए श्मशान घाट में अस्थियां रखने के लिए लॉकर बना रखे हैं, लेकिन वो भी अब फुल हो गए हैं.
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