Ghaziabad News:  कोरोना के 9 हजार से अधिक मरीज जिले से गायब, जानें पूरा मामला

स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के रिकार्ड में दर्ज हैं गायब मरीज

स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के रिकार्ड में दर्ज हैं गायब मरीज

गाजियाबाद जिले में पिछले वर्ष से लेकर अब तक कोरोना के 9 हजार से अधिक मरीज गायब हैं. ये कहां गए, किसी को कुछ पता नहीं है. ये सभी मरीज स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हैं.

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गाजियाबाद. जिले में पिछले एक साल की अवधि में 9000 से अधिक कोरोना के मरीज गायब हो चुके हैं. सरकारी रिकॉर्ड में इन मरीजों का कोई पता ठिकाना नहीं है. ये मरीज कोरोना मुक्‍त हुए हैं या फिर कहीं और जाकर कोरोना के स्‍प्रेडर बन चुके हैं. हालांकि स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि ज्‍यादातर मरीज प्रवासी थे, ठीक होने के बाद अपने मूल निवास चले गए हैं.

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार गाजियाबाद में पिछले वर्ष से लेकर सात मई 2021 तक कोरोना संक्रमण के 53927 मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से 307 लोग संक्रमण से जान गंवा चुके हैं. वहीं, 39695 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं. मृत लोगों की संख्‍या हटाने के बाद कुल कोरोना मरीजों की संख्‍या 53620 होती है, सरकारी आंकड़ों के अनुसार इनमें से 396965 लोग कोरोना मुक्‍त हो गए हैं. इस तरह अब जिले में कुल 13925 एक्टिव कोरोना के मामले बचते हैं लेकिन सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह आंकड़ा 7 मई तक 6707 ही है. यानी 7218 मरीजों का पता नहीं है. ये मरीज कहां गए, इसका सही सही जवाब देने वाला कोई नहीं अधिकारी है, लेकिन स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि इनमें से बहुत सारे लोग प्रवासी थे, जो कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद अपने अपने मूल निवास चले गए हैं. इनमें ऐसे लोगों की संख्‍या भी शामिल है, जिनका मोबाइल नंबर गलत था और कोरोना मुक्‍त होने के बाद जानकारी नहीं मिल पाई है.

इस संबंध में गाजियाबाद एओए फेडरेशन के फाउंडर आलोक कुमार बताते हैं कि ट्रांस हिंडन में रहने वाले तमाम लोग प्रवासी हैं, जो पिछले साल से वर्क फ्राम होम काम कर रहे थे, ऐसे लोग अपने अपने गांव चले गए हैं, जहां से वर्क फ्राम होम काम कर रहे हैं. इसी वजह से ये लोग ट्रैस नहीं हो पा रहे रहे हैं. आलोक कुमार ने गाजियाबाद प्रशासन से एक मांग की कि नोएडा की तरह यहां पर एक व्‍हाट्सएप ग्रुप बनाना चाहिए, जिसमें निजी अस्‍पतालों द्वारा मरीजों से अधिक बिल वसूलने की शिकायत दर्ज की जा सके.

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