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कोरोना में ऑक्सीजन की कमी से बढ़ता है मौत का खतरा, घर बैठे ऐसे कर सकते हैं कम

IMA के पूर्व प्रेजिडेंट के के अग्रवाल (File Photo)

IMA के पूर्व प्रेजिडेंट के के अग्रवाल (File Photo)

अगर आप छह मिनट में दो सौ मीटर चल सकते हैं तो आप में ऑक्सीजन की कमी को झेलने की क्षमता है: केके अग्रवाल

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस के फेफड़ों और रेस्पिरेटरी सिस्टम पर अटैक करने के कारण शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घट जाता है. जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव सांस लेने पर पड़ता है. ऐसे में मरीज की जान भी चली जाती है. लिहाजा ऑक्सीजन के स्तर को ठीक रखना इस वक्त की सबसे बड़ी चुनौती है. आप अगर रोजाना पांच प्रमुख प्राणायाम करते हैं तो कोरोना जैसी बीमारी से बचे रहने की संभावना बढ़ जाएगी.

आईएमए के पूर्व प्रेसीडेंट केके अग्रवाल के मुताबिक योगासन के साथ ही सोने के तरीके में भी बदलाव करेंगे तो बचाव का प्रतिशत बढ़ जाएगा. हालांकि सबसे पहले अपने शरीर की ऑक्सीजन की कमी झेलने की क्षमता को भी नापें.

कैसे पहचानें, ऑक्सीजन की कमी झेलने की अपने शरीर की क्षमता

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अग्रवाल बताते हैं कि आप खुद ही अपने शरीर का ऑक्सीजन लेवल माप सकते हैं. इसके लिए आप देखें कि छह मिनट में दो सौ मीटर चल सकते हैं या नहीं. अगर ऐसा कर लेते हैं तो आप ऑक्सीजन की कमी को झेलने की क्षमता रखते हैं. फिर छह मिनट में इस दूरी को पांच सौ मीटर कर सकते हैं या नहीं. ऐसा कर सकते हैं तो आपकी स्थिति बेहतर है.

एक मिनट तक रोकें अपनी सांस

बाबा रामदेव कहते हैं कि सभी लोग अपने-अपने घरों में एक मिनट तक सांस रोकने की कोशिश कर सकते हैं. एक मिनट तक नहीं हो पाता तो देखें कि आप कितने सेकेंड तक खुद को सांस लेने से रोक सकते हैं. इस अभ्यास से शरीर की क्षमता का पता चलता है.

रोजाना करें ये प्रमुख प्राणायाम

कोरोना से बचाव के लिए प्रमुख पांच व्यायाम महत्वपूर्ण हैं जो श्वास तंत्र को दुरुस्त करने के साथ ही आंतरिक अंगों को मजबूती प्रदान करते हैं.

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भस्त्रिका- सबसे पहले ध्यान या वायु मुद्रा में बैठकर भस्त्रिका व्यायाम करें. यह मुख्य रूप से डीप ब्रीदिंग है. कोरोना का सबसे पहला अटैक हमारे रेस्पिरेट्री सिस्टम पर होता है, ऐसे में डीप ब्रीदिंग के माध्यम से हम कोरोना की संभावनाओं को काफी कम कर सकते हैं. करीब पांच मिनट तक रोजाना डीप ब्रीदिंग करें, इससे आपका रेस्पिरेटरी सिस्टम मजबूत हो जाएगा. साथ ही इम्यूनिटी पावर बढ़ जाएगी.

कपालभाति- दूसरा सबसे महत्वपूर्ण व्यायाम कपालभाति है. इसके माध्यम से हम अपने अंदरूनी अंगों को मजबूती प्रदान कर सकते हैं. इस प्राणायाम के अभ्यास से अंग मजबूत होंगे और कोरोना आपके हृदय, लिवर, पेनक्रियाज, फेफड़ों आदि को नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा. इस प्राणायाम को आप 5 मिनट से शुरू करके 15 मिनट तक कर सकते हैं.

अनुलोम विलोम- यह प्राणायाम हमारे पूरे नर्वस सिस्टम के लिए, ह्रदय, फेफड़ों और मस्तिष्क के लिए ज़रूरी है. इससे हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां खत्म होती हैं. इसे भी आप 5 से 15 मिनट तक रोजाना कर सकते हैं.

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भ्रामरी- रोगमुक्त और तनाव मुक्त जीवन जीने के लिए भ्रामरी एक बहुत ही उपयोगी प्राणायाम है.

उद्गीथ प्राणायाम- यह भ्रामरी से थोड़ा अलग है. इसमें मुख से आवाज़ करते हैं जबकि भ्रामरी में नाक से ध्वनि निकाली जाती है. इस दौरान ओम का उच्चारण करना शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्थिति में बेहद लाभदायक है. जितनी लंबी और देर तक आप अपनी श्वास खींच पाएंगे उतना ही आप कोरोना के दौरान होने वाली ऑक्सीजन की कमी के खतरे से खुद को बचा पाएंगे.

पेट के बल सोएं, वेंटिलेटर की नहीं पड़ेगी ज़रूरत

केके अग्रवाल कहते हैं कि लोगों को पेट के बल सोना चाहिए. जिसमें उनका पेट बिस्तर पर रहे और पीठ ऊपर. अग्रवाल कहते हैं कि इस प्रकार सोने से हमारे फेफड़े पूरी तरह काम करने लगते हैं और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर ठीक बना रहता है. सोने के तरीके में बदलाव करने भर से ऑक्सिजन की कमी होने पर वेंटिलेटर की जरूरत को काफी हद तक कम किया जा सकता है. वहीं शरीर में ऑक्सीजन के प्रसार को बेहतर किया जा सकता है.

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