वायु प्रदूषण: और ज़्यादा खराब हुई Delhi-NCR की हवा, चारों तरफ छाए धुंध से ढक गया इंडिया गेट

इस साल भी दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में लगातार तेजी आ रही है. (File Photo)
इस साल भी दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में लगातार तेजी आ रही है. (File Photo)

Air Pollution in Delhi-NCR: सर्दियों के मौसम की आहट के बीचदिल्‍ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण की स्थिति अभी से ही खतरनाक हो गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 22, 2020, 11:20 AM IST
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नई दिल्ली. ठंड की दस्‍तक के साथ ही देश की राष्‍ट्रीय राजधानी और आसपस के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का प्रकोप बढ़ने लगा है. गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में धुंध छाया रहा. धुंध का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंडिया गेट (India Gate) तक नज़र नहीं आ रहा है. हवा में पीएम 2.5 (PM 2.5) का लेवल बढ़ने से वायु गुणवत्‍ता और खराब हो गई है. द्वारका, नरेला, वज़ीपुर और आनंद विहार में पीएम 2.5 का लेवल कहीं 300 तो कहीं 350 को पार कर चुका है. गौरतलब रहे कि इस दौरान पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा लगातार पराली जलाने की खबरें आ रही हैं.

जानिए गुरुवार सुबह 10 बजे कहां-कितना रहा पीएम 2.5 का लेवल

द्वारका 326



नरेला 356
वज़ीपुर 352

आनंद विहार 302

मथुरा रोड 278

अशोक विहार 271

एयरपोर्ट 225

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आईटीओ 256

लोधी रोड 165

डीयू 242

पूसा रोड  202

दिन में चलते वाली हवाओं से बढ़ी समस्‍या
मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि दिन के वक्त उत्तर-पश्चिमी हवाएं चल रही हैं और पराली जलाने से पैदा होने वाले प्रदूषक तत्वों को अपने साथ ला रही हैं. रात में हवा के स्थिर होने तथा तापमान घटने की वजह से प्रदूषक तत्व जमा हो जाते हैं. वहीं, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ‘वायु गुणवत्ता निगरानी एवं मौसम पूर्वानुमान तथा अनुसंधान प्रणाली’ (सफर) के मुताबिक हरियाणा, पंजाब और नजदीकी सीमा पर स्थित क्षेत्रों में लगातार पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं.



इस साल इसलिए ज़्यादा जल रही है पराली
अधिकारियों का कहना है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष इस मौसम में अब तक पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं अधिक हुई हैं. इसकी वजह धान की समयपूर्व कटाई और कोरोना वायरस महामारी के कारण खेतों में काम करने वाले श्रमिकों की अनुपलब्धता है. केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने शुक्रवार को कहा था कि दिल्ली में पिछले साल की तुलना में इस साल सितंबर के बाद से प्रदूषकों के व्यापक स्तर पर फैलने के लिये मौसमी दशाएं 'अत्यधिक प्रतिकूल' रही हैं.
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