दिल्ली में Odd-Even नहीं चाहते व्यापारी, कहा-दो माह में 40,000 करोड़ का हुआ नुकसान, सरकार को भेजे ये सुझाव

दिल्ली के व्यापार के चरित्र को देखते हुए ऑड-इवन व्यवस्था को कतई लागू नहीं किया जाए. (File Photo)

दिल्ली के व्यापार के चरित्र को देखते हुए ऑड-इवन व्यवस्था को कतई लागू नहीं किया जाए. (File Photo)

व्यापारियों ने दिल्ली सरकार से आग्रह किया है कि दिल्ली की मार्केट स्थिति को देखते हुए ऑड-ईवन सिस्टम को लागू न किया जाए. दिल्ली में लगभग 15 लाख व्यापारी हैं जो लगभग 40 लाख लोगों को रोजगार देते हैं. पिछले दो महीने में दिल्ली को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के व्यापार का नुक्सान हुआ है.

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नई दिल्ली. दिल्ली में कोरोना (Corona) संक्रमित मरीजों का आंकड़ा अब हर रोज सैकड़ों में आ रहा है. ऐसे में अब व्यापारी भी मार्केट को खोलने के लिए सरकार पर दबाव बनाने लगे हैं. व्यापारियों ने दिल्ली सरकार (Delhi Government) से आग्रह किया है कि दिल्ली की मार्केट स्थिति को देखते हुए ऑड-ईवन (Odd-Even) सिस्टम को लागू न किया जाए.

पहले ही व्यापारियों को इन 2 माह में ₹40000 करोड़ का नुकसान हो चुका है. व्यापारियों को संकट से उबारने के लिए सरकार को और प्रयास करने की जरूरत है. व्यापारिक संगठनों के सुझावों को अमल में लाने की जरूरत है.

दिल्ली में बाजार खोले जाने के सम्बन्ध में कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने दिल्ली के उप-राज्यपाल (Lieutenant Governor) और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को बताया है कि दिल्ली के व्यापार के चरित्र को देखते हुए ऑड-इवन व्यवस्था को कतई लागू नहीं किया जाए.

कैट का मानना है कि दिल्ली में एक व्यापारी माल की आपूर्ति के लिए दूसरे व्यापारी पर निर्भर है. ऐसे में, ऑड- ईवन व्यवस्था से दिल्ली का व्यापार विपरीत रूप से प्रभावित होगा.
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा है कि दिल्ली में मुख्य रूप से दो तरह के थोक एवं रिटेल बाजार है और जिनके व्यापारिक स्वरुप को देखते हुए सरकार दिल्ली में थोक बाजार सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक और रिटेल बाजार दोपहर 12 बजे से रात्रि सात बजे तक खोले.

वहीं, दिल्ली में रात्रि 10 बजे से सुबह 5 बजे तक रात्रि कर्फ्यू लगाया जाए. माल की आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए कैट द्वारा थोक एवं रिटेल बाजार के प्रस्तावित समय में नो एंट्री व्यवस्था को होल्ड पर डालकर अस्थायी तौर पर ट्रांसपोर्ट सेवाओं को भी बाजारों के काम करने के समय में ट्रांसपोर्ट को काम करने की इजाजत दी जाए जिससे दिल्ली शहर में ही एक स्थान से दूसरे स्थान एवं दिल्ली से दूसरे राज्य में माल की आवाजाही आसानी से हो सके.

दिल्ली में लगभग 15 लाख व्यापारी हैं जो लगभग 40 लाख लोगों को रोजगार देते हैं. पिछले दो महीने में दिल्ली को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के व्यापार का नुक्सान हुआ है.

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