कोरोना: पढ़ाई पर लटकी तलवार, प्राइवेट स्‍कूलों के 25 फीसदी छात्र करेंगे सरकारी स्‍कूलों का रुख
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कोरोना: पढ़ाई पर लटकी तलवार, प्राइवेट स्‍कूलों के 25 फीसदी छात्र करेंगे सरकारी स्‍कूलों का रुख
देश के प्राइवेट स्‍कूलों के 25 फीसदी से ज्‍यादा बच्‍चे सरकारी स्‍कूलों में दाखिले लेंगे.

लॉकडाउन के दौरान करीब 30 फीसदी सरकारी स्‍कूलों के बच्‍चे पलायन कर गए हैं. लिहाजा प्राइवेट स्‍कूलों से निकलने वाले बच्‍चे अगर सरकारी स्‍कूलों में दाखिला लेते भी हैं तो इन स्‍कूलों पर अतिरिक्‍त वजन नहीं पड़ेगा.

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नई दिल्‍ली. कोरोना महामारी (Corona Pandemic) का असर छात्रों की पढ़ाई पर सबसे ज्‍यादा पड़ रहा है. पढ़ाई का तरीका क्‍लासरूम से ऑनलाइन (Online study) में बदलने और लॉकडाउन (Lock down) के कारण फीस न दे पाने के कारण अभिभावक बच्‍चों को स्‍कूलों से निकाल रहे हैं. साथ ही साल न खराब हो इसलिए सरकारी स्‍कूलों में दाखिला दिलाने की कोशिश कर रहे हैं. जबकि सरकारी स्‍कूलों में अभी तक दाखिले शुरू नहीं हुए हैं. ऐसे में दिल्‍ली, हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश में छात्रों की संस्‍थागत पढ़ाई पर तलवार लटकी हुई है.

ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अशोक अग्रवाल का  कहना है कि इस बार संभावना जताई जा रही है कि 25 फीसदी से ज्‍यादा निजी स्कूलों के बच्चे सरकारी स्‍कूलों में दाखिला लेंगे. कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन और इस दौरान आजीविका के साधन न होने और स्‍कूली फीस देने में असमर्थ अभिभावक अपने बच्‍चों को सरकारी स्‍कूलों में डालने के लिए तैयारी कर चुके हैं. प्राइवेट स्‍कूलों में बड़ी संख्‍या में टीसी के लिए आवेदन भी पहुंच रहे हैं लेकिन समस्‍या यह भी है कि दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में अभी तक दाखिला प्रक्रिया ही शुरू नहीं हुई है.

दिल्‍ली के अभिभावक सरकारी स्‍कूलों में दाखिले के लिए जा रहे हैं तो उन्‍हें कहा जा रहा है कि दाखिला शुरू हो तब आएं. वहीं प्रक्रिया के शुरू होने को लेकर सरकार की तरफ से भी कोई सूचना नहीं है. ऐसे में प्राइवेट स्‍कूलों से टीसी ले चुके छात्र बीच में लटके हुए हैं. वहीं यूपी की बात करें तो वहां भी प्राइवेट स्‍कूल फीस के लिए अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं. ऐसे में बच्‍चों की शिक्षा को लेकर अभिभावक बहुत परेशान हैं और लगातार शिकायतें कर रहे हैं.



बच्‍चों की पढ़ाई को लेकर चिंता में अभिभावक
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निजी स्कूलों की फीस को लेकर कई बार हरियाणा के पैरेंट्स इकट्ठे हो चुके हें.


दिल्‍ली के मोतीनगर स्थित सिंगल पेरेंट सुमीत उप्‍पल बताती हैं कि वह ट्यूशन देकर आजीविका चलाती थीं और उसी कमाई से अपनी बेटी को प्राइवेट स्‍कूल में पढ़ा रही थीं लेकिन कोरोना आने के बाद ट्यूशन बंद हो गए. पिछले पांच महीने से कोई आय न होने और प्राइवेट स्‍कूल के ऑनलाइन क्‍लास की लगातार फीस मांगने से परेशान होकर उन्‍होंने बेटी का नाम कटा लिया. इसके बाद वे दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूल में बच्‍ची के दाखिले के लिए पहुंची लेकिन उन्‍हें कहा गया कि अभी दाखिले नहीं हो रहे हैं.

वहीं गुरुग्राम स्थित पूनम कहती हैं कि वे अपने दोनों बच्‍चों को प्राइवेट स्‍कूल में पढ़ा रही थीं. उन्‍होंने मई तक की फीस भी जमा करा दी लेकिन अब व्‍यवस्‍था न होने के कारण उन्‍होंने दोनों बच्‍चों को सरकारी स्‍कूल में दाखिल करने का फैसला किया है. हालांकि अभी टीसी नहीं मिली है.

यूपी के अलीगढ़ निवासी देवप्रकाश कहते हैं कि प्राइवेट काम ठप हो जाने के बाद बच्‍चों की फीस निकालना मुश्किल हो रहा है. साथ ही ऑनलाइन क्‍लासेज की फीस के साथ ही इसलिए तीनों बच्‍चों को सरकारी स्‍कूल में दाखिल कराएंगे.

सरकारी स्कूलों से भी बड़ा ड्रापआउट, नहीं बढ़ेगा स्‍कूलों पर बोझ

एजुकेशन एक्टिविस्‍ट एडवोकेट अग्रवाल कहते हैं कि कोरोना के बाद बड़े स्‍तर पर देश में माइग्रेशन हुआ है. दिल्‍ली आसपास के शहरी क्षेत्रों से गांवों की ओर हए पलायन के बाद सरकारी स्‍कूलों में सीटें खाली हो गई हैं. इन स्‍कूलों में मजदूर वर्ग के बच्‍चे बड़ी संख्‍या में पढ़ते थे. लॉकडाउन के दौरान करीब 30 फीसदी सरकारी स्‍कूलों के बच्‍चे पलायन कर गए हैं. लिहाजा प्राइवेट स्‍कूलों से निकलने वाले बच्‍चे अगर सरकारी स्‍कूलों में दाखिला लेते भी हैं तो इन स्‍कूलों पर अतिरिक्‍त वजन नहीं पड़ेगा. वहीं मेनस्‍ट्रीम में से बच्‍चे आ रहे हैं तो शिक्षा का स्‍तर गिरेगा नहीं अलबत्‍ता सुधरेगा ही.

हरियाणा में दो लाख से ज्‍यादा बच्‍चे सरकारी में जाने को तैयार, नहीं मिल रही टीसी

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निजी स्‍कूलों से बच्‍चों के माइग्रेशन को लेकर सरकारी स्‍कूलों में बोझ बढ़ने की संभावना जताइ्र जा रही है;


अभिभावक एकता मंच के महासचिव कैलाश शर्मा कहते हैं कि अकेले हरियाणा में ही प्राइवेट स्‍कूलों में पढ़ने वाले दो लाख से ज्‍यादा बच्‍चे सरकारी स्‍कूलों में दाखिला लेने के लिए तैयार हैं. कोरोना और लॉकडाउन के कारण मार्च तक स्‍कूलों की फीस देने के बाद अभिभावकों के पास प्राइवेट स्‍कूलों की फीस देने के लिए पैसा नहीं है. इस संबंध में सरकार तक भी मांगें पहुंची जिसके बाद सरकार ने इन बच्‍चों का सरकारी स्‍कूलों में अस्‍थाई रूप से दाखिला करने और टीसी (Transfer Certificate) आने के बाद स्‍थाई करने की बात कही. लेकिन हरियाणा में अब प्राइवेट स्‍कूल बच्‍चों की टीसी नहीं दे रहे हैं. जिससे छात्र बीच में लटके हुए हैं. इस संबंध में शिकायतें दी जा रही हैं लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है.

सेंट्रल स्‍क्‍वायर फाउंडेशन ने भी जारी की रिपोर्ट, किया ये खुलासा

हाल ही में एक एनजीओ सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन की प्राइवेट स्‍कूल इन इंडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राइवेट स्कूलों की फीस न भर पाने, ऑनलाइन क्लासेज़ के लिए पर्याप्त संसाधन जैसे लेपटॉप, स्‍मार्टफोन, इंटरनेट की सुविधा या ऑनलाइन क्‍लास के दौरान दी जाने वाली फीस की व्‍यवस्‍था न होने के कारण इस बार करीब 45% छात्र निजी स्कूलों के बजाय सरकारी स्कूलों का रुख कर सकते हैं.

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