कोरोना काल में तिहाड़ जेल से पैरोल पर छूटे 2000 कैदी गए हैं भाग?

दिल्ली-एनसीआर में कोविड-19 (Covid-19) के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए तिहाड़ जेल प्रशासन ने कैदियों से पारिवारिक मुलाकात बंद कर दी है.  (फाइल फोटो)

दिल्ली-एनसीआर में कोविड-19 (Covid-19) के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए तिहाड़ जेल प्रशासन ने कैदियों से पारिवारिक मुलाकात बंद कर दी है. (फाइल फोटो)

कोरोना काल में दिल्ली के तिहाड़ जेल (Tihar Jail) सहित देश के कई जेलों में भी बंद हजार कैदियों (Prisoners) को पैरोल (Parole) पर को छोड़ा गया था. अब एक साल बाद छोड़े गए तकरीबन 2000 कैदी तिहाड़ जेल में वापस नहीं लौटे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 7:45 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना (Corona) से बचने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने पिछले साल राज्य सरकारों (State Governments) को जेल में बंद कैदियों (Prisoners) को पैरोल (Parole) पर छोड़ने के निर्देश जारी किए थे. देश के कई राज्यों ने जेल में बंद कैदियों को पैरोल पर छोड़ा था. दिल्ली के तिहाड़ (Tihar Jail) सहित कई जेलों में भी बंद हजार कैदियों को छोड़ा गया था. अब एक साल बाद पैरोल पर छोड़े गए तकरीबन 2000 कैदी जेल में वापस नहीं लौटे हैं. तिहाड़ जेल प्रशासन इसको लेकर अब नोटिस जारी किया है. तिहाड़ जेल के मुताबिक या तो जानबूझ कर वापस नहीं आना चाहते हैं या फिर वह भाग गए हैं. अब तिहाड़ जेल प्रशासन ने इन कैदियों की डिटेल दिल्ली पुलिस से शेयर की है.

2 हजार कैदी क्यों नहीं लौटना चाह रहे हैं तिहाड़

इन 2 हजार कैदियों की पूरी जानकारी दिल्ली पुलिस मुख्यायल भेजी गई है. दिल्ली पुलिस अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है. ऐसे में माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में इन भगोड़े कैदियों की ढूंढने का काम शुरू हो जाएगा. पिछले साल तिहाड़ जेल में बंद 18 हजार से अधिक कैदियों में से करीब 7 हजार कैदियों को इमरजेंसी पैरोल और जमानत पर छोड़ा गया था. इन कैदियों को इसलिए छोड़ा गया था, क्योंकि देश में कोरोना के मामले में तेजी आई गई थी.

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दिल्ली पुलिस अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है.


घर गए लेकिन वापस नहीं आ रहे हैं

तिहाड़ जेल में बंद बुजुर्ग और बीमार कैदियों को पैरोल पर उनके घर के लिए भेज दिया गया था. जेल प्रशासन ने इसलिए ऐसा किया ताकि जेल में अगर कोरोना फैलता है तो इन बुजुर्ग और बीमार कैदियों को वायरस के चपेट में आने से बचाया जाए. अब, दिल्ली की कई जिला अदालतों ने इन तमाम कैदियों की इमरजेंसी पैरोल बेल आगे न बढ़ाने का फैसला किया है. ऐसे में अदालत ने इन कैदियों को जेल में सरेंडर करने के लिए कहा है, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद इनमें से बहुत कैदी जेल वापस नहीं आना चाह रहे हैं.



इन कैदियों की डिटेल दिल्ली पुलिस को भेजी गई

तिहाड़ जेल प्रशासन के मुताबिक, कोरोना काल में सजायाफ्ता कैदियों में से छोड़े गए 112 कैदी जेल वापस नहीं आए हैं. साढ़े पांच हजार से अधिक विचाराधीन कैदियों में से तकरीबन 3 हजार कैदियों को जेल वापस आ जाना चाहिए, लेकिन वे अभी तक वापस नहीं आए हैं. तिहाड़ जेल प्रशासन का कहना है कि इन विचाराधीन कैदियों में से दो हजार से अधिक कैदी ऐसे हैं, जो अभी तक जेल वापस नहीं आए हैं.

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तिहाड़ जेल प्रशासन के मुताबिक, कोरोना काल में सजायाफ्ता कैदियों में से छोड़े गए 112 कैदी जेल वापस नहीं आए हैं. (file photo)


कई कैदी अदालत की शरण में

हालांकि, इसके पीछे कई और वजहें बताई जा रही हैं. जैसे, बहुत से कैदियों ने जेल नहीं जाने के लिए अदालतों के शरण में गए हैं. हालांकि कई ऐसे भी कैदी हैं जो अभी तक ट्रेसलेस हैं. ये कैदी न तो अदालत में गए हैं और ही इन्होंने जेल प्रशासन को इस बारे में सूचित किया है. अब कुछ दिनों बाद इन कैदियों को भगौड़ा घोषित कराने की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी.

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वहीं वकीलों का कहना है कि तिहाड़ जेल प्रशासन को बताना चाहिए कि इन कैदियों को सरेंडर करने का मेसेज भेजा गया है? कैदियों को जमानत का समय खत्म हो चुका है, इसलिए सबसे पहले प्रशासन को जेल में वापस आने के लिए कैदियों को सूचित तो करना ही चाहिए, जोकि यह नहीं किया गया है.
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