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Human Rights: 'यूनिवर्सिल डिक्लेरेशन में 30 अधिकार शामिल, ज्यादातर लोगों को मानवाधिकारों की सीमित समझ'

डब्ल्यूएचआरपीसी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. तपन कुमार राउतराय ने कहा क‍ि "ज्यादातर लोगों को मानवाधिकारों की सीमित समझ ही है. (File Photo: Shutterstock)

डब्ल्यूएचआरपीसी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. तपन कुमार राउतराय ने कहा क‍ि "ज्यादातर लोगों को मानवाधिकारों की सीमित समझ ही है. (File Photo: Shutterstock)

Human Rights: डब्ल्यूएचआरपीसी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. तपन कुमार राउतराय ने मानवाध‍िकारों के मसलों पर आयोज‍ित पर‍िच ...अधिक पढ़ें

    नई द‍िल्‍ली. दुनिया भर में राजनीतिक वर्चस्व की होड़, युद्ध, उन्माद और टकराव के इस दौर में कुछ लोग और संगठन ऐसे भी हैं, जो खामोशी से विश्व, समाज और आम लोगों के अधिकारों को बनाए रखने और बचाए रखने के लिए काम कर रहे हैं. लेक‍िन विश्व मानवाधिकार संरक्षण आयोग (WHRPC) संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) में निहित अधिकारों के यूनिवर्सिल डिक्लेरेशन की रक्षा के लिए पूरी तरह से समर्पित है. इसमें दुनिया भर के शिक्षाविद और बुद्धिजीवी समूह शामिल हैं, जो पूरी मानव जाति के लिए मानवाधिकारों (Human Rights) की जानकारी और संरक्षण के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं.

    मानवाध‍िकारों के मसलों पर आयोज‍ित पर‍िचर्चा में डब्ल्यूएचआरपीसी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. तपन कुमार राउतराय ने कहा क‍ि “ज्यादातर लोगों को मानवाधिकारों की सीमित समझ ही है. यूनिवर्सिल डिक्लेरेशन में 30 अधिकार शामिल हैं, जिन्हें अपनाकर एक सभ्य, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण समाज बनाया जा सकता है. असल में मानवाधिकार किसी भी समाज के वे मूल अधिकार और स्वतंत्रता हैं जो हर व्यक्ति के साथ जन्म से लेकर मृत्यु तक रहते हैं. उन्हें कभी भी नहीं हटाया जा सकता. हां, प्रतिबंधित जरूर किया जा सकता है.”

    उन्‍होंने कहा क‍ि संगठन का मकसद लोगों को मानवाध‍िकारों से अवगत कराना, जनता से जुड़े मुद्दों पर उल्लेखनीय काम कर रहे लोगों को डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान करना और अन्य गतिविधियां संचालित करना है. डब्ल्यूएचआरपीसी मानवाधिकारों को अपनाने और उनका प्रसार करने के लिए व्यक्तियों, शिक्षकों, संगठनों और सरकारी निकायों को एकजुट करता है. उन्‍होंने कहा क‍ि संबंध‍ित जानकारी https://whrpc.org/  से भी प्राप्त की जा सकती है.

    डब्ल्यूएचआरपीसी के अंतरराष्ट्रीय निदेशक डॉ. अभिन्ना होता ने संगठन की ओर से क‍िए जा रहे कार्यों का उल्‍लेख करते हुए कहा क‍ि “यह एक अनूठी संस्था है क्योंकि यह दुनिया के कुछ विश्व मानवाधिकार संस्थानों (डब्ल्यूएचआरआई) में से एक है, जिसकेअध्यक्ष देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं. विश्व मानवाधिकारों के प्रचार और संरक्षण के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देने और निगरानी करने में भारत के डब्ल्यूएचआरपीसी को एक रोल मॉडल के रूप में देखा जाता है. जहां भी मानवाधिकारों की उपेक्षा या हनन जैसी कोई बात सामने आती है, वहां यह संगठन जनहित याचिका दायर करने से पीछे नहीं हटता क्योंकि हमारा मकसद हर हाल में यूएन चार्टर में निहित अधिकारों के यूनिवर्सिल डिक्लेरेशन की रक्षा करना है.”

    जिन क्षेत्रों में मानवाधिकार से संबंधित पर्याप्त कानून की कमी है या उनमें सुधार की जरूरत है, वहां डब्ल्यूएचआरपीसी कानून और नीतियां बनाने के प्रयासों में सबसे आगे रहता है. बाल यौन शोषण, सांप्रदायिक अपराध, भोजन और काम के अधिकार के लिए संगठन हर वक्त सक्रिय रहता है. ऐसे मुद्दों पर को सामने लाने और उन पर चर्चा के लिए संगठन की ओर से समय-समय पर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी कराए जाते हैं.

    डब्ल्यूएचआरपीसी की ओर से डॉक्टरेट की मानद उपाधि देने का मकसद भी यही है कि मानवाधिकारों के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे लोगों को प्रोत्साहित किया जाए और वे इस विषय पर होने वाले राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय विमर्श और बहसों का हिस्सा बनें. उनमें सक्रिय रूप से भागीदारी करें.

    Tags: Delhi news, Human rights, National Human Rights Commission

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